वर्षा ऋतु विशेष : 21 जून से वर्षा ऋतु प्रारंभ हो रही है | इसे शास्त्रीय भाषा में आदानकाल बोलते है | जठराग्नि दुर्बल होती है | वायु, गैस की तकलीफें उभरती हैं| पित्त संचित होता है| अगर सावधान नहीं रहें तो पित्त व वात मिलकर हार्ट अटैक बना सकता है| इस आदानकाल में कब्जियत न रहे इसका ध्यान रखना चाहिए|
करने योग्य कार्य :
१. पेट साफ़ रहे इसके लिए हरड़ रसायन २-२ गोली खाना | हरड रसायन, रसायन से बना हुआ टोनिक है। दिनभर खाया हुआ टोनिक बन जायेगा|
२. शुद्ध वातावरण व शुद्ध जल का सेवन करना|
३. मधुर भोजन, चिकनाईवाला, शरीर को बल देने वाला भोजन करना चाहिये और दोपहर के भोजन में नींबू, अदरक, सैंधा नमक, लौकी, मैथी, खीरा, तुरई आदि खाने चाहिए |
४. वर्षाऋतु में पानी गरम करके पियें अथवा तो पानी की शुद्धता का ध्यान रखें|
५. वायुप्रकोप से जोडों में दर्द बनने की संभावना है और बुढ़ापे में लकवा मारने की संभावना बढ़ जाती है| भोजन में लहसुन की छौंक लकवे से फाईट करता है|
६. चर्मरोग, रक्तविकार आदि बिमारियों की इस ऋतु में संभावना बढ़ जाती है| नींबू, अदरक, गाजर, खीरा स्वास्थ्यप्रद रहेगा|
७. सूर्यकिरण स्नान सभी ऋतुओं में स्वास्थ्य के लिए हितकारक है|
८. अश्विनी मुद्रा-श्वांस रोककर योनि संकोच लेना और मन में भगवान का जप करना इस सीज़न की बीमारियों को भगाने की एक सुंदर युक्ति है|
न करने योग्य कार्य :
१. गरम, तले हुए, रूखे, बासी, डबल रोटी, आटा लगा हुआ बिस्किट आदि स्वास्थय के लिए इस सीज़न में हितकर नहीं है। फास्ट फ़ूड से बचना चाहिए|
२. देर रात बारिश के सीज़न में न जागें|
३. अधिक श्रम, अधिक व्यायाम न करें |
४. खुले आकाश में सोना खतरे से खाली नहीं है।
५. ज्यादा देर तक शरीर भीगा हुआ न रखें| सिर गिला हो तो तुरंत पोछ लें।
६. भीगे शरीर न सोयें और रात्रि को स्नान न करें| मासिक धर्म आये तो तुरंत स्नान करके सूखे कपडे से अपने को पींछ लें|





