हरियाणा के वरिष्ठ IPS अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या मामले में परिजनों की एक बड़ी मांग को चंडीगढ़ पुलिस ने स्वीकार कर लिया है। देर रात पुलिस ने एफआईआर में SC/ST एक्ट की धारा 3(2)(V) जोड़ दी है, जिसकी मांग परिवार लंबे समय से कर रहा था। परिवार का कहना था कि एफआईआर में भले ही SC/ST एक्ट लगाया गया था, लेकिन उसमें सबसे सख्त प्रावधान शामिल नहीं किए गए थे।
क्या है SC/ST एक्ट की धारा 3(2)(V)?
यह धारा तब लागू होती है जब किसी अनुसूचित जाति या जनजाति के व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर गंभीर चोट या मृत्यु का सामना करना पड़ता है। इस प्रावधान के तहत दोषी को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा दी जा सकती है।
पहले दर्ज धाराओं में अधिकतम सजा 5 साल तक थी, लेकिन इस नई धारा के जुड़ने से अब अपराधी को उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान हो गया है।
आत्महत्या से जुड़े मामले की पृष्ठभूमि
7 अक्टूबर को हरियाणा कैडर के 2001 बैच के IPS अधिकारी वाई. पूरन कुमार (52) ने चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित अपने आवास के बेसमेंट में सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली थी।
मौके से पुलिस को 9 पन्नों का सुसाइड नोट मिला था, जिसमें उन्होंने 12 सीनियर IAS और IPS अधिकारियों पर जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, सार्वजनिक अपमान और प्रशासनिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे।
जांच के लिए SIT गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT (Special Investigation Team) का गठन किया गया है।
वहीं, पूरन कुमार की पत्नी और IAS अधिकारी अमनीत पी. कुमार ने पोस्टमॉर्टम से इनकार करते हुए न्याय की मांग की थी।
अब SC/ST एक्ट की कठोर धारा जोड़े जाने के बाद परिवार ने कहा है कि यह न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।






