तेजस्वी यादव को महागठबंधन का सीएम चेहरा बनाए जाने पर सियासी घमासान — एनडीए का हमला, राजद का पलटवार
राजद नेता तेजस्वी यादव को महागठबंधन का मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाए जाने की खबर के बाद बिहार की सियासत गरमा गई है। विपक्षी गठबंधन एनडीए ने इस घोषणा पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि चेहरा बदलने से महागठबंधन की किस्मत नहीं बदलेगी।
जदयू का तंज — “चेहरा बदलने से नहीं सुधरेगी हालत”
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, “महागठबंधन की स्थिति में सुधार अब संभव नहीं है, चाहे वे कितनी भी कोशिश कर लें। एनडीए का विजय रथ बहुत आगे निकल चुका है और महागठबंधन कहीं दिखाई नहीं दे रहा। तेजस्वी यादव सीएम चेहरा बनें या नहीं, चुनाव में हार तय है।”
भाजपा का निशाना — “एकजुटता सिर्फ दिखावा”
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “बिहार की जनता सब देख रही है। महागठबंधन में अंदरूनी कलह है। जो दल सीटों का बंटवारा तय नहीं कर पा रहे, वे सरकार चलाने का सपना कैसे देख सकते हैं?”
उन्होंने आगे कहा, “तेजस्वी यादव जब राहुल गांधी से मिलने दिल्ली गए थे, तब जिस तरह का व्यवहार हुआ, उसने साफ कर दिया कि कांग्रेस और राजद की दोस्ती सिर्फ दिखावे की है। कांग्रेस नहीं चाहती कि राजद उससे आगे बढ़े।”
कांग्रेस की प्रतिक्रिया — “थोड़ा इंतज़ार कीजिए”
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने कहा, “थोड़ा इंतज़ार कीजिए, प्रेस कॉन्फ्रेंस में सब साफ हो जाएगा।”
उन्होंने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा, “भारत निर्वाचन आयोग अपनी विश्वसनीयता खो चुका है। उन्हें सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर चुनाव तैयारियों पर चर्चा करनी चाहिए थी, लेकिन अब वह केंद्र सरकार के अधीन एक विभाग जैसा बन गया है।”
राजद का पलटवार — “बिहार में तेजस्वी ही तेजस्वी है”
महागठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “बिहार की जनता पहले ही तय कर चुकी है — मुख्यमंत्री तो तेजस्वी यादव ही होंगे। जनता 243 सीटों पर उनके वादों और संकल्पों के साथ है। अब बस औपचारिक घोषणा बाकी है।”
उन्होंने कहा, “तेजस्वी यादव पर बिहार की जनता को पूरा भरोसा है। उन्होंने अपने काम और इरादों से लोगों का दिल जीत लिया है।”
बिहार चुनावी मैदान में अब तेजस्वी यादव की आधिकारिक ताजपोशी को लेकर माहौल और गरमाता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि महागठबंधन इस घोषणा से कितना लाभ उठा पाता है, या एनडीए का “विजय रथ” सच में रफ्तार पकड़ता है।






