पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा और कनेक्टिविटी को बड़ी मजबूती देने वाली एक अहम घोषणा सामने आई है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे आमतौर पर “चिकन नेक” कहा जाता है, में लगभग 40 किलोमीटर लंबी भूमिगत रेलवे लाइन के निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है। इस परियोजना का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत को मुख्य भूमि से जोड़ने वाला एक ऐसा सुरक्षित और बाधा-रहित रेल मार्ग तैयार करना है, जो किसी भी आपात स्थिति या संकट के समय निर्बाध रूप से काम करता रहे।
भूमिगत रेलवे ट्रैक के साथ-साथ इस कॉरिडोर में मौजूद मौजूदा रेल लाइनों को चार ट्रैक तक विस्तारित किया जाएगा। इससे न केवल यातायात क्षमता और गति में वृद्धि होगी, बल्कि पूरे नेटवर्क की परिचालन क्षमता और लचीलापन भी काफी मजबूत होगा। इस कदम को केवल परिवहन सुधार के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की दृष्टि से एक रणनीतिक उन्नयन के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह पहल उस सोच को दर्शाती है, जहां बुनियादी ढांचे का विकास केवल सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा और रणनीतिक मजबूती से भी जुड़ा हुआ है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर को मजबूत करके सरकार का लक्ष्य पूर्वोत्तर के लिए भरोसेमंद संपर्क सुनिश्चित करना, आर्थिक विकास को गति देना और रक्षा तैयारियों को और सुदृढ़ करना है।
यह परियोजना केवल एक रेलवे योजना नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के लिए एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। यह क्षेत्र को देश के बाकी हिस्सों से और मजबूती से जोड़ने, तेज आवागमन सुनिश्चित करने और एक सुरक्षित व अधिक लचीले भविष्य की नींव रखने का वादा करती है।







