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यूपी की राजनीति में नया चक्रव्यूह! क्या दलित वोट बैंक के लिए खेला जा रहा है बड़ा दांव?

लालजी सुमन और राजुकमार भाटी तो केवल मोहरा हैं बस और कुछ नही असली खेल तो अखिलेश यादव खेल रहे दलितों का वोट बटोरने के लिए स्वर्णों को अपमानित करवाते हैं लेकिन इन दोनो को ये नही पता की अखिलेश यादव के चक्कर में इनका राजनीतिक कैरियर ही खत्म हो जाएगा।

क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजनीति में अभी इस समय जो कहानी लिखी जा रही है उसे बड़े ध्यान से समझने की जरूरत है।
आज जो लालजी सुमन और राजकुमार भाटी जैसे नेताओं को आगे करके ये ऊट-पटांग बयानबाजी करवाई जा रही है, वह तो महज एक मोहरा हैं। इससे ज्यादा कुछ नही असली ‘मास्टरमाइंड’ तो कोई और ही है।

समाजवादी पार्टी का एकमात्र एजेंडा है, तुष्टिकरण और समाज को जातियों में बांटना तथा दलितों के वोट बैंक पर अपना कब्जा करने के लिए जानबूझकर सवर्ण समाज को अपमानित करने की राजनीति को हवा दी जा रही है और समाज में नफरत घोलकर सत्ता पाने की यह छटपटाहट अब खुलकर जनता के सामने भी आ चुकी है।

और इस तरह की राजनीति का इतिहास गवाह है की जो दूसरों के इशारे पर नफरत फैलाते हैं, उनका अपना स्वयं का करियर सबसे पहले खत्म होता है और लालजी सुमन और राजकुमार भाटी जैसे को शायद इस बात का अहसास भी नहीं है कि अखिलेश यादव के इस चक्रव्यूह में फंसकर वह अपना खुद का भविष्य अंधकार में डाल रहे हैं।

क्योंकि उत्तर प्रदेश की जनता अब इस “बांटो और राज करो” की नीति को अच्छी तरह समझ चुकी है तथा विकास, सुरक्षा और सुशासन के दम पर यूपी को आगे ले जाने वाली डबल इंजन सरकार के सामने सपा का यह नफरती मॉडल तो टिकने वाला है नहीं।

और इस बात को लिख कर रख लीजिए की जो समाज को तोड़ने की साजिश रच रहे हैं, 2027 के चुनाव में जनता उन्हें ऐसा सबक सिखाएगी की ‘समाजवादी पार्टी’ पूरी तरह से समाप्तवादी पार्टी बनकर रह जाएगी।

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Author: sssrknews

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