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आसनसोल DRM विनीता श्रीवास्तव प्रकरण: क्या ईमानदारी की यही सज़ा है?

आसनसोल की मात्र 6 महीने की drm रही श्रीमती विनीता श्रीवास्तव को प्रताड़ित करने का मामला उजागर हुआ है।

जमुई में हुए रेल हादसे में इन्हें बली का बकरा बनाने की साजिश हुई जिसमें बड़े अफसर और GM / ER शामिल हैं।

महिला अधिकारी (DRM) ने दुर्घटना के बाद जो साईट मैनेजमेंट की कुशलता और तत्परता दिखाई है वह वास्तव में सराहनीय है।

रेल ही नहीं सभी सरकारी संस्थानों का वर्क कल्चर ऐसा ही है
बैंक हों या मंत्रालय, यदि आप बीच के दर्जे के अधिकारी हैं और नियमानुसार काम करते हैं तो झेलने को तैयार रहें.

सारे नियम कागजी हैं, उच्च अधिकारियों के ज़रुरत-मर्ज़ी से लागू हैं
आज रेल बैलगाड़ी हाल में है, दोषी कौन है बताने की जरूरत नहीं है।

आसनसोल की मंडल रेल प्रबंधक (DRM) विनीता श्रीवास्तव की तरफ से अक्टूबर में रेलवे को एक पत्र मिला था, जिसमें उन्होंने आसनसोल मंडल की एक महत्वपूर्ण और रेलवे की कीमती जमीन को RLDA (Rail Land Development Authority) को सौंपने के संबंध में पूर्व रेलवे मुख्यालय (कोलकाता) को पत्र लिखकर जांच कराने का अनुरोध किया था. रेलवे से जुड़े कुछ अधिकारी इस ट्रांसफर को भू-माफियाओं के दबाव में लिया गया एक्शन बता रहे हैं.

DRM विनीता श्रीवास्तव ने CAT कोलकाता में अपने ट्रांसफर ऑर्डर पर कानूनी जंग शुरू कर दी है। और सुधीर शर्मा को पदभार भी नहीं दी है।

उनके वकील ने कहा कि बिना प्रशासनिक जरूरत के उन्हें वेस्ट सेंट्रल रेलवे भेजा गया और ट्रांसफर आदेश की प्रति भी उन्हें नहीं दी गई। ट्रांसफर की जानकारी उन्हें सुधीर कुमार शर्मा के माध्यम से दी गई कि अब वे नए DRM होंगे।

CAT में दोनों पक्षों (रेलवे और DRM) की मौजूदगी दर्ज हुई।

CAT कोलकाता ने मामले को सुनवाई के बाद स्वीकार कर लिया है। ट्रिब्यूनल ने रेलवे से पूछा कि बिना स्पष्ट प्रशासनिक आवश्यकता के उसी दिन ट्रांसफर और चार्ज सौंपने की क्या वजह थी। रेलवे के वकील ने जवाब देने के लिए समय मांगा।

अगली सुनवाई 08 जनवरी 2026 को होगी। तब तक ट्रिब्यूनल ने यथास्थिति बनाए रखने और आवेदक के खिलाफ कोई दमनात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया है।

DRM/Asansol का स्थानांतरण Telwa Bazaar दुर्घटना के बाद यातायात बहाली में कथित देरी से जोड़ा जा रहा है। यह देरी 30.12.2025 को रात 20:00 बजे प्रस्तुत 2.22 करोड़ रुपये के कैश इम्प्रेस्ट के हस्तलिखित प्रस्ताव को DRM द्वारा अनुमोदन न दिए जाने से जोड़कर बताई गई है।

जबकि MSOP Part-C, Para 10(E) के अनुसार दुर्घटना की स्थिति में बहाली से संबंधित व्यय की पूर्ण शक्तियाँ JAG/SG अधिकारियों को निहित हैं।

DRM की स्वीकृति आवश्यक नहीं है, वित्तीय सहमति की भी आवश्यकता नहीं है। रोड क्रेन एवं अन्य बहाली उपकरणों की हायरिंग हेतु स्वतंत्र अधिकार है।

DRM ASN 28.12.2025 को 00:14 बजे ART के साथ दुर्घटना स्थल पर पहुंची, 31.12.2025 सुबह लगभग 04:00 बजे तक लगातार (लगभग 75 घंटे) शशरीर उपस्थित रहकर बहाली कार्य की निगरानी की।

Down Main Line (ट्रैक एवं OHE) 30.12.2025 को 00:10 बजे फिट घोषित कर दी गई थी, इसके बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा 19 घंटे से अधिक समय तक सिंगल लाइन वर्किंग की अनुमति नहीं दी गई।

2.22 करोड़ रुपये के कैश इम्प्रेस्ट हेतु हस्तलिखित प्रस्ताव 30.12.2025 को लगभग 20:00 बजे प्रस्तुत किया गया, जब तक बहाली कार्य लगभग पूर्ण हो चुका था।
DRM की स्वीकृति पर जोर देना MSOP प्रावधानों के अनुरूप नहीं था।

वास्तविक देरी का कारण रोड क्रेन एवं काउंटरवेट की देर से उपलब्धता रहा, जिसकी व्यवस्था पूर्व रेलवे के Principal Chief Engineer एवं Construction Organisation द्वारा की जा रही थी। इस देरी का कारण DRM को जिम्मेदार ठहराए जाने योग्य नहीं है।

DRM का स्थानांतरण बिना अवसर और सुनवाई दिए तथा तथ्यों की अपूर्ण समझ के आधार पर किया गया प्रतीत होता है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

CAT में हुई सुनवाई और प्रस्तुत दस्तावेज की कॉपी (6 पेज) कमेंट में संलग्न है। ????

आपने इस आलेख की अगली कड़ी में क्या हुआ नया अपडेट हमारे अगले पोस्ट में पढ़ सकते हैं। लिंक नीचे दिए गए हैं

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Author: sssrknews

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