हमारी ओर के सबसे चतुर व्यक्ति हैं बाबू कबूतर लाल। बस यूं समझिए कि संसार में ऐसी कोई बात नहीं जो वे न जानते हों। राजकुमार के बाद वे देश के पहले व्यक्ति हैं जो पलक झपकते ही मिसाइलों के फ्यूज कंडक्टर निकाल सकते हैं।
कल कबूतर जी ने सुना कि प्रधानमंत्री जी ने कुछ निवेदन किया है। वे सदा कि भांति पिनक गए। गरजते हुए बोले, “वो कौन होता है हमको सोना खरीदने से रोकने वाला? हम अभी सोना खरीदेगा। ढेर सारा सोना खरीदेगा…”
कबूतर जी कुर्ता बदल कर बाजार निकलने को ही थे कि याद आया, सोना तो लगभग डेढ़ लाख रुपए तोला है और जेब में कुल डेढ़ सौ रुपए भी नहीं। उन्होंने सोचा, यदि चारों बकरियां बेच दूं तब भी दो ग्राम का पैसा नहीं जुटता… बेचारे लौट आए। उन्होंने मोबाइल पर खबर दुबारा पढ़ी। मोदी जी ने दूसरी बात कही थी, ” खेतों में रासायनिक खाद कम डालें।”
कबूतर गरजे, “तुम रोकेगा हमको खाद डालने से? अभी खेत में अभी चार बोरा खाद डालेगा…” कबूतर साइकल मोड़ के बाजार की ओर जाने ही वाले थे कि याद आया, खेत कहां है जो खाद डालेंगे? साढ़े तीन कट्ठा जमीन थी वो तो बहुत पहले ही जूए में हार गए थे, अब तो घर के बाद खड़े होने की भी जगह नहीं… बेचारे फिर रुक गए। मोबाइल फिर निकाला!
कबूतर भाई ने देखा, “मोदीजी ने कहा है कि ऑफिस मत जाओ, वर्क फ्रॉम होम करो..” कबूतर फिर गरजे, “हम क्यों करेगा वर्क फ्रॉम होम? हम डेली जायेगा ऑफिस…” अचानक याद आया, “नौकरी कहां है जी? आठ साल पहले तक गोपालगंज कचहरी में मूस मरवा दवाई बेचते थे, वह भी छोड़ दिए… तीन बार के मैट्रिक फेल को नौकरी कौन देता है? वह तो भला हो बतख प्रसाद अध्यक्ष जी का जो नारा वारा लगाने के लिए कभी कभी हजार पांच सौ दे देते हैं, रिचार्ज करा देते हैं वरना…
कबूतर जी ने अगला प्वाइंट देखा, ” विदेश यात्रा न करें…” वे चिल्लाए, “हम अभी जाएगा विदेश… अभी का अभी जाएगा…” अचानक घर के भीतर से भौजाई बोलीं,” विदेश जा के क्या उखाड़ेंगे? आपके दादाजी की जमींदारी है क्या विदेशों में? घर का काम तो होता नहीं, चले हैं विदेश जाने…” कबूतर चुप हो गए। कबूतर हों या बाघ, पत्नी के आगे सभी भीगी बिल्ली हो जाते हैं।
उन्होंने चुपचाप निकाला और अगला प्वाइंट देखा, पीएम कहते हैं, “डीजल पेट्रोल बचाइए…” कबूतर गरजने वाले ही थे कि साइकल पर दृष्टि गई, पिछले चक्का में भलावडर फेंक दिया था। वे चुप रह गए। तभी पड़ोस के एक बच्चे ने कहा, “कबूतर चचा, ऐ कबूतर चचा! जल्दी चलो, डीलर साहब राशन बांट रहे हैं। देर हो गई तो गेहूं खत्म हो जाएगा, केवल चावल मिलेगा…”
कबूतर बोरी ले कर चले। बच्चे से कहा, “यह सरकार चोर है। बड़े लोग खाते हैं बासमती चावल और हमको मिलता है मोटका सरजू 52, गरीब का कोई सुनने वाला है कि नहीं?
साभार : सर्वेश तिवारी श्रीमुख
गोपालगंज, बिहार।






