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नेपाल में सैकड़ों शव मिलने से बढ़ी चुनौती, चितवन में सिर्फ 50 शव रखने की क्षमता; अब तक 130 से ज्यादा बरामद

नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद शवों के प्रबंधन का संकट गहराता जा रहा है। बाढ़ और भूस्खलन के बीच अब तक करीब 400 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई इलाकों में शवों की तलाश अभी भी जारी है। दूर-दूर तक बह चुके शवों के कारण राहत और बचाव अभियान पहले ही चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। वहीं, पर्याप्त शवगृह और कोल्ड स्टोरेज की सुविधा नहीं होने से प्रशासन के सामने शवों को सुरक्षित रखने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।

चितवन में सिर्फ 50 शव रखने की क्षमता, बरामदगी का आंकड़ा 130 के पार

चितवन के स्वास्थ्य संस्थानों में कुल मिलाकर अधिकतम 50 शवों को सुरक्षित रखने की क्षमता है, जबकि यहां बरामद शवों की संख्या 130 के पार पहुंच चुकी है। नियमों के मुताबिक शवों का अंतिम प्रबंधन करने से पहले उनका विस्तृत विवरण दर्ज करना, तस्वीरें लेना और पहचान से जुड़े जरूरी साक्ष्यों को सुरक्षित रखना अनिवार्य है। ऐसे में सीमित शवगृह क्षमता प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

जल्दबाजी में अंतिम संस्कार नहीं करने की सलाह

त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल के वरिष्ठ फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. गोपाल चौधरी ने कहा कि बड़ी प्राकृतिक आपदा के दौरान शव मिलने के बाद जल्दबाजी में अंतिम संस्कार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि शव मिलने की जगह, उसकी स्थिति और शरीर पर मौजूद पहचान चिह्नों समेत सभी जरूरी जानकारियों को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करना आवश्यक है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, आपदा की स्थिति में शवों के प्रबंधन के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक और दिशा-निर्देश मौजूद हैं। सबसे पहली प्राथमिकता शवों को सुरक्षित रखना और उनकी पहचान से जुड़े सभी साक्ष्यों को संरक्षित करना है।

अस्पतालों में पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज नहीं

डॉ. चौधरी के अनुसार, नेपाल के अधिकांश अस्पतालों में एक साथ बड़ी संख्या में शवों को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था नहीं है। बाढ़ और मलबे में लंबे समय तक दबे रहने के बाद बरामद शवों को सुरक्षित रखना और भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे शवों में तेजी से बदलाव आने और दुर्गंध की समस्या के कारण उनके संरक्षण की चुनौती बढ़ जाती है।

नेपाल की बाढ़ के बाद यूपी में भी हाई अलर्ट

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर जिलों में प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। गंडक नदी और वाल्मीकि गंडक बैराज पर निगरानी बढ़ा दी गई है। बैराज से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण कुशीनगर में नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राहत और बचाव अभियान के लिए 32 सदस्यीय एसडीआरएफ टीम और 22 पीएसी जवानों को नेपाल भेजा गया है। इसके अलावा एक अतिरिक्त एसडीआरएफ टीम के साथ रबर की चार नावें और एल्युमीनियम की एक नाव भी भेजी जा रही है। सीमावर्ती जिलों की स्थिति पर राहत आयुक्त का नियंत्रण कक्ष लगातार नजर बनाए हुए है। नेपाल में फंसे उत्तर प्रदेश के लोगों के परिजन 1070 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

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