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चुनाव आयोग-SIR विवाद पर CM धामी का कांग्रेस पर हमला, बोले- ‘हार के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराना बंद करें’

SIR विवाद पर CM धामी का कांग्रेस पर पलटवार, बोले- ‘हार का ठीकरा संवैधानिक संस्थाओं पर न फोड़े विपक्ष’

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान चुनाव आयोग, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), ECINet, युवाओं से जुड़े मुद्दों और कांग्रेस के आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती में संवैधानिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है और चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में चुनावी प्रक्रिया का संचालन करता है।

SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर धामी ने दी सफाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 सितंबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की पूर्ण आयोग बैठक हुई थी। बैठक के बाद जारी आधिकारिक नोट में आयोग ने SIR से जुड़े प्रमुख निर्णयों को सर्वसम्मति से लिया जाना बताया है। आयोग ने आंतरिक टिप्पणियों और अंतिम संस्थागत निर्णय के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए SIR से जुड़े फैसलों पर अपनी स्थिति रखी है।

धामी ने कहा कि किसी आंतरिक टिप्पणी या आपत्ति को सीधे तौर पर आयोग के अंतिम निर्णय में मतभेद के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, किसी भी मामले में तथ्य केवल सुर्खियों के आधार पर नहीं, बल्कि पूरी फाइल और अंतिम संस्थागत निर्णय के आधार पर देखे जाने चाहिए।

SIR की वैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने बिहार में SIR से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले का भी उल्लेख किया। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक निर्णय सारांश के अनुसार, अदालत ने बिहार में SIR की वैधानिकता को बरकरार रखा और माना कि चुनाव आयोग के पास संविधान के अनुच्छेद 324 तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के तहत विशेष पुनरीक्षण कराने की शक्ति है। अदालत ने प्रक्रिया को संबंधित वैधानिक प्रावधानों और 1960 के नियमों के अनुरूप माना।

धामी ने कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखे गए पत्र से जुड़े विवाद पर भी चुनाव आयोग की ओर से दी गई सफाई का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आयोग के अनुसार यह प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की कार्यप्रणाली से जुड़ा प्रशासनिक विषय था।

Form-6 और मतदाताओं की सुविधा को लेकर क्या कहा?

मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 सितंबर के चुनाव आयोग के नोट में SIR प्रक्रिया के दौरान Form-6 से जुड़े प्रावधानों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। आयोग ने यह भी बताया है कि सामान्य गैर-SIR अवधि में Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित सामान्य प्रक्रिया लागू रहेगी।

उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में मैपिंग नहीं हो पाई है या कोई तार्किक विसंगति सामने आती है, उनके दस्तावेज हासिल करने के लिए BLO को घर भेजने की व्यवस्था की गई है। आयोग ने अधिकांश मामलों में मतदाताओं को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए कार्यालय बुलाने के बजाय BLO के माध्यम से दस्तावेज लेने की व्यवस्था बताई है।

धामी ने कहा कि रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, श्रमिकों, गरीब और बेघर नागरिकों के लिए हेल्प डेस्क तथा विशेष कैंप लगाने की व्यवस्था भी की गई है। साथ ही छूटे हुए और पहली बार मतदाता बनने वाले नागरिकों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही गई है।

ECINet की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा पर भी चर्चा

मुख्यमंत्री ने ECINet को लेकर उठ रहे सवालों का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने इसकी स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा का फैसला किया है। आयोग की ओर से ECINet से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों को शामिल करने की बात कही गई है।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने आगे से बैठकों का एजेंडा पहले प्रसारित करने और बैठकों के मिनट्स जारी करने से जुड़े कदमों की भी जानकारी दी है।

कांग्रेस पर धामी का निशाना

प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी राजनीतिक हमला बोला। धामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक कमजोरियों को छिपाने के लिए प्रशासनिक और संस्थागत मुद्दों को ढाल के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।

उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी राजनीतिक मुद्दों को समझती है और देश की सुरक्षा तथा विकास से जुड़े विषयों पर गंभीरता से विचार करती है।

राहुल गांधी के बयानों पर भी साधा निशाना

राहुल गांधी का नाम लेते हुए धामी ने कहा कि कांग्रेस की ओर से चुनावी हार के लिए कभी EVM और कभी संवैधानिक संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराया जाता है। उन्होंने राहुल गांधी के बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर रहते हुए राजनीतिक वक्तव्यों में गंभीरता होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के पिछले शासनकाल को लेकर भी आरोप लगाए और कहा कि विपक्ष को अपनी राजनीतिक असफलताओं के लिए लगातार नए कारण तलाशने के बजाय तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।

नकल विरोधी कार्रवाई और युवाओं के मुद्दे पर सरकार का पक्ष

उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं और नकल के मामलों का जिक्र करते हुए धामी ने कहा कि सरकार ने नकल माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री के अनुसार, नकल से जुड़े मामलों में 100 से अधिक आरोपियों को जेल भेजा गया है।

उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने के लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। धामी ने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बयान देने से पहले तथ्यों को सामने रखना जरूरी है।

जाति और वर्ग के मुद्दे पर भी विपक्ष को घेरा

हल्द्वानी प्रकरण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी घटना को जातीय या वर्गीय दृष्टिकोण से देखने से पहले उससे जुड़े तथ्यों की जांच की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे से जुड़ी रही है। धामी ने कहा कि प्रदेश को जाति और वर्ग के आधार पर बांटने की राजनीति नहीं होनी चाहिए और सामाजिक एकता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

जमीन से जुड़े आरोपों पर धामी की विपक्ष को चुनौती

जमीन से जुड़े कांग्रेस के आरोपों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि विपक्ष के पास सरकार या किसी सरकारी संस्था द्वारा नियमों के विरुद्ध जमीन बेचने अथवा आवंटित करने से संबंधित कोई ठोस प्रमाण है, तो उसे सार्वजनिक करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि केवल आरोप लगाने या उन्हें बार-बार दोहराने से कोई बात तथ्य साबित नहीं हो जाती। मुख्यमंत्री ने विपक्ष से जमीन से जुड़े मामलों में दस्तावेज और प्रमाण सार्वजनिक करने को कहा।

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Author: sssrknews

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