रेवंत रेड्डी के ‘राम अमीरों के, शिव गरीबों के’ बयान पर विवाद, BJP ने किया पलटवार
नई दिल्ली: तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के भगवान राम और भगवान शिव को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। दिल्ली में आयोजित एक मीडिया कार्यक्रम के दौरान रेवंत रेड्डी ने भगवान शिव को गरीबों और भगवान राम को अमीरों से जोड़ते हुए BJP पर धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया। उनके बयान पर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
रेवंत रेड्डी ने क्या कहा?
रेवंत रेड्डी ने दिल्ली में आयोजित The Conclave 2026 कार्यक्रम में उत्तर और दक्षिण भारत की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक पहचान पर बात करते हुए भगवान राम और भगवान शिव का उल्लेख किया।
रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कहा कि “शिव गरीबों के भगवान हैं और राम अमीरों के भगवान हैं।” उन्होंने BJP के ‘जय श्री राम’ नारे का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि भाजपा नेता ‘हर हर महादेव’ का नारा क्यों नहीं लगाते।
रेवंत रेड्डी ने अपने संबोधन में खुद को द्रविड़ परंपरा से जोड़ते हुए उत्तर और दक्षिण भारत में धार्मिक एवं राजनीतिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP ने भगवान राम को राजनीतिक प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया है।
BJP ने रेवंत रेड्डी पर साधा निशाना
रेवंत रेड्डी के बयान पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता बंदी संजय कुमार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवान राम और भगवान शिव के बीच राजनीतिक विभाजन की रेखा खींच रहे हैं।
बंदी संजय कुमार ने कहा कि तेलंगाना में वेमुलावाड़ा को ‘दक्षिण काशी’ और भद्राचलम को ‘दक्षिण अयोध्या’ कहा जाता है, ऐसे में राज्य के मुख्यमंत्री को राम और शिव को उत्तर-दक्षिण या अलग-अलग वर्गों से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू परंपरा में भगवान शिव और भगवान विष्णु के बीच एकता का भाव है और राजनीतिक लाभ के लिए दोनों के बीच विभाजन की बात नहीं की जानी चाहिए।
BJP का दावा—धार्मिक प्रतीकों को राजनीति से जोड़ने का आरोप
बंदी संजय कुमार ने रेवंत रेड्डी की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए कहा कि भगवानों को किसी विशेष वर्ग, क्षेत्र या सामाजिक समूह से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा किए जाने का भी उल्लेख किया और कहा कि BJP नेताओं द्वारा भगवान शिव की पूजा किए जाने के उदाहरण मौजूद हैं।
भाजपा की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि कांग्रेस धार्मिक प्रतीकों को राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रही है।
उत्तर-दक्षिण की राजनीति का भी जिक्र
रेवंत रेड्डी के संबोधन में केवल भगवान राम और शिव का मुद्दा ही नहीं था। उन्होंने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सांस्कृतिक अंतर से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।
रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने BJP के उत्तर भारत में मजबूत राजनीतिक प्रभाव और दक्षिण भारत में कांग्रेस की स्थिति को धार्मिक एवं क्षेत्रीय प्रतीकों के संदर्भ में समझाने की कोशिश की।
बयान के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद
रेवंत रेड्डी की टिप्पणी सामने आने के बाद BJP नेताओं ने इसे लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि यह बयान कांग्रेस और भाजपा के बीच चल रही राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन गया है।
इस पूरे विवाद में एक तरफ रेवंत रेड्डी का BJP पर धार्मिक प्रतीकों को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल करने का आरोप है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा नेताओं का कहना है कि भगवान राम और भगवान शिव को अमीर-गरीब या उत्तर-दक्षिण के आधार पर अलग करना उचित नहीं है।
मामले को लेकर दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और रेवंत रेड्डी की टिप्पणी अब राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है।
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