धीरेन्द्र शास्त्री ने 251 गरीब कन्याओं के हाथ पीले कर उन्हें बेटी की तरह विदा किया, लेकिन फिर भी यह आयोजन कई सवालों और चर्चाओं का विषय बना रहा। बागेश्वर धाम के पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने महाशिवरात्रि के अवसर पर एक भव्य कन्या विवाह समारोह आयोजित किया, जिसमें देश भर से 251 गरीब कन्याओं की शादी धूमधाम से कराई गई। इस आयोजन में मध्य प्रदेश के सीएम, राज्यपाल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समेत देश-विदेश के कई नामी-गिरामी लोग शामिल हुए।
यह कार्यक्रम न केवल गरीब कन्याओं की शादी जैसे सामाजिक कार्य के लिए चर्चा में आया, बल्कि जातिवाद और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ एक बड़ा संदेश देने के लिए भी सराहा गया। धीरेन्द्र शास्त्री का कहना था कि बेटियां बोझ नहीं होतीं, बल्कि बेटे जितनी ही क़ीमती होती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अपने जीवन में बहन की शादी उधार लेकर की थी, जहां कई कठिनाइयां आईं। उसी अनुभव से प्रेरित होकर उन्होंने तय किया कि वे अब बेटियों के विवाह में किसी को निराश नहीं होने देंगे।
शास्त्री ने 251 कन्याओं के लिए ब्यूटीशियन बुलाकर उन्हें सजाया-संवारा, जिससे वे अपनी शादी के दिन राजकुमारी जैसी दिख सकें। इस आयोजन में 5 लाख से ज्यादा लोगों के खाने-पीने की व्यवस्था और कई विशाल पंडाल बनाए गए थे। एनआरआई भक्त भी इस आयोजन में शामिल हुए, जिनका योगदान इस सामाजिक कार्य को और महान बनाने में सहायक रहा।
हालांकि आयोजन के बावजूद यह भी देखा गया कि समाज में अभी भी कई तरह के सवाल और विरोध मौजूद हैं। कुछ लोग इस तरह के सामूहिक विवाह को सही नहीं मानते या इसे शोभायमान नहीं समझते। लेकिन धीरेन्द्र शास्त्री ने इसे एक सामाजिक सुधार के रूप में देख कर आगे बढ़ने की अपील की है। उनके इस कदम ने बुंदेलखंड क्षेत्र की कई कन्याओं की जिंदगी बदल दी है और उन्हें सम्मानपूर्वक बेटी की तरह विदा किया गया।
इस तरह, धीरेन्द्र शास्त्री ने एक बड़े सामाजिक कार्य के तहत 251 कन्याओं के लिए खुशियों का आयोजन कर साबित किया कि बेटियां भी समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और उनकी शादी में कोई कमी या बाधा नहीं होनी चाहिए। यह प्रयास न केवल गरीब परिवारों को आर्थिक बोझ से राहत देता है, बल्कि समाज में लड़कियों के प्रति सम्मान और समानता का संदेश भी फैलाता है।






