अहमदाबाद की एक छोटी सी सोडा दुकान से शुरू हुआ सफर आज दुनिया के 45 से ज्यादा देशों तक पहुंच चुका है। 🇮🇳🍨
1907 में वाडीलाल गांधी ने सड़क किनारे एक साधारण सोडा फाउंटेन दुकान खोली थी। उस दौर में आइसक्रीम लग्जरी मानी जाती थी और इसे हाथ से चलने वाली मशीन व ‘कोठी’ नाम के बर्तन में तैयार किया जाता था। लेकिन इसी छोटे से कारोबार ने आगे चलकर भारत की सबसे पुरानी और बड़ी आइसक्रीम कंपनियों में अपनी जगह बना ली।
वाडीलाल की असली उड़ान तब शुरू हुई जब रणछोड़ लाल गांधी ने कारोबार संभाला। उन्होंने 1926 में भारत का पहला व्यवस्थित आइसक्रीम पार्लर शुरू किया और जर्मनी से आइसक्रीम बनाने की आधुनिक मशीन मंगवाई। उस समय यह कदम बेहद बड़ा और आधुनिक माना गया। इतना ही नहीं, उन्होंने होम डिलीवरी जैसी सुविधा भी शुरू की, जो उस दौर में नई सोच थी।
1950 में वाडीलाल ने भारतीयों को मशहूर ‘कसाटा’ आइसक्रीम का स्वाद चखाया, जो आज भी लोगों की पसंद बनी हुई है। समय के साथ कंपनी ने नई तकनीक अपनाई, मजबूत कोल्ड चेन नेटवर्क तैयार किया और देशभर में 1.25 लाख से ज्यादा डीलरों का नेटवर्क खड़ा कर लिया।
आज वाडीलाल 45 से अधिक देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है। कंपनी का कारोबार हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और इसकी पांचवीं पीढ़ी इस विरासत को आगे बढ़ा रही है।
वाडीलाल की कहानी इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि कोई भी ब्रांड रातोंरात सफल नहीं बनता। लगातार मेहनत, नई सोच, गुणवत्ता और समय के साथ बदलाव अपनाने की क्षमता ही किसी छोटे कारोबार को वैश्विक पहचान दिलाती है। ✨
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