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अंतरिक्ष से चिट्ठियों तक: राकेश शर्मा और एक पानवाले की 35 साल पुरानी दोस्ती

अपने ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन से लौटते ही राकेश शर्मा की ज़िंदगी पल भर में बदल गई। देश और दुनिया में उनका नाम गूंजने लगा। रूस ने उन्हें ‘हीरो ऑफ़ सोवियत यूनियन’ के सर्वोच्च सम्मान से नवाज़ा, और भारत ने अर्जुन चक्र देकर उनका अभिनंदन किया।

लेकिन इन तमाम सम्मानों से कहीं ज़्यादा क़ीमती एक ऐसा तोहफ़ा है, जो राकेश शर्मा को पिछले लगभग 35 सालों से लगातार मिलता आ रहा है— हर जन्मदिन पर, हर नए साल पर; और हर साल उनकी अंतरिक्ष यात्रा की सालगिरह पर।

अंतरिक्ष से वापसी के करीब एक साल बाद, राकेश शर्मा के पास अहमदाबाद से एक सादा सा ख़त पहुँचा। इसे लिखा था किशन सिंह चौहान ने; जो वहाँ एक छोटी सी पान की दुकान चलाते हैं।

किशन सिंह बचपन से ही अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखते थे। नील आर्मस्ट्रांग और डॉ. विक्रम साराभाई की कहानियाँ सुन-सुनकर बड़े हुए थे। लेकिन घर की आर्थिक मजबूरियों ने उन्हें आगे पढ़ने का मौक़ा नहीं दिया। फिर भी, उनका सपना ज़िंदा रहा।

जब रेडियो पर उन्होंने सुना कि एक भारतीय अंतरिक्ष में गया है और सुरक्षित लौट आया है; तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भावनाओं के उस ऊफान में, वे खुद को रोक नहीं पाए; और उन्होंने राकेश शर्मा को ख़त लिख डाला।

जब राकेश शर्मा ने वह ख़त पढ़ा, तो उन्हें एहसास हुआ कि कोई ऐसा है जो दिल से उनकी उपलब्धि को अपना मानता है। उन्होंने तुरंत जवाब लिखा- बधाई और प्यार के लिए धन्यवाद कहा, और किशन सिंह को लिखते रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

यहीं से शुरू हुई एक अनोखी दोस्ती।

तब से लेकर आज तक, किशन सिंह हर साल तीन बार राकेश शर्मा को ख़त भेजते हैं, और हर बार राकेश भी उतने ही मन से उनका जवाब देते हैं। यह ख़तों का रिश्ता दशकों तक चलता रहा।

फिर साल 2010 में, एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना किशन सिंह ने कभी नहीं की थी। राकेश शर्मा खुद, विशेष रूप से, उनसे मिलने अहमदाबाद पहुँच गए।

अपने हीरो को सामने देखकर किशन सिंह की आँखें भर आईं। लेकिन इस ऐतिहासिक मुलाक़ात के बाद भी उन्होंने ख़त लिखना नहीं छोड़ा। आज भी उनका ख़त बिल्कुल समय पर राकेश शर्मा तक पहुँच जाता है।

किशन सिंह मुस्कुराते हुए कहते हैं- “मैं हमेशा 31 मार्च को ख़त पोस्ट कर देता हूँ, ताकि वो समय पर पहुँच जाए। आज तक मेरा एक भी ख़त देर से नहीं पहुँचा।”

और राकेश शर्मा कहते हैं- “हो सकता है दुनिया को मेरी अंतरिक्ष यात्रा की तारीख़ याद न रहे, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि किशन और मैं— इस दिन को कभी नहीं भूलते।”

ऐसी दोस्ती बहुत कम देखने को मिलती है जहाँ न कोई स्वार्थ हो, न कोई औपचारिकता।
राकेश शर्मा और किशन सिंह के बीच का यह स्नेह और सम्मान से भरा रिश्ता आने वाली पीढ़ियों के लिए एक शांत, सुंदर और सच्ची प्रेरणा है।

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Author: sssrknews

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