तुमसे नहीं हो पाएगा, नौकरी कर लो!” जब आकांक्षा गुप्ता ने ये सुना था, तो शायद उन्होंने भी नहीं सोचा था कि यही ताना उन्हें करोड़ों के साम्राज्य की मालकिन बना देगा। दिल्ली के मॉडल टाउन के एक ऐसे परिवार से, जहाँ लड़कियों के लिए करियर से ज्यादा घर की चारदीवारी अहम थी, वहाँ से निकलकर 100 करोड़ के टर्नओवर का सपना देखना कोई छोटी बात नहीं है। आकांक्षा ने अपनी शुरुआत SRCC जैसे बड़े कॉलेज से की और देखते ही देखते ‘Deloitte’ जैसे ग्लोबल ब्रांड में मैनेजमेंट कंसल्टेंट बन गईं, लेकिन उनकी किस्मत में ऑफिस की एसी वाली कुर्सी नहीं बल्कि मिट्टी से जुड़ा एक क्रांतिकारी बदलाव लिखा था। साल 2019 में शादी हुई और फिर आया वो दौर जिसने पूरी दुनिया की रफ़्तार थाम दी—यानी लॉकडाउन! घर पर खाली बैठने के बजाय आकांक्षा और उनके पति संभव ने गार्डनिंग वर्कशॉप शुरू की और हज़ारों लोगों से बात करते हुए उन्हें मार्केट का एक कड़वा सच समझ आया कि लोग पौधे तो लगाना चाहते हैं, पर नर्सरी के चक्कर काटना और महंगे दाम चुकाना सबके बस की बात नहीं। बस यहीं से जन्म हुआ ‘Urvan’ का, लेकिन ये सफर इतना आसान नहीं था क्योंकि उनका पहला स्टार्टअप बुरी तरह फेल हो चुका था, कमाई ज़ीरो थी और एक्सपर्ट्स का कहना था कि ये बिजनेस कभी नहीं चलेगा। लेकिन 2021 में एक बड़ा रिस्क लेते हुए दोनों ने अपनी हाई-पेइंग नौकरियां छोड़ दीं और लोकल नर्सरी को सीधे ग्राहकों से जोड़ दिया जिससे पौधों की लागत आधी और डिलीवरी सुपरफास्ट हो गई। आज वही आकांक्षा जो कभी तानों के बीच घिरी थीं, हर दिन 10,000 से ज़्यादा पौधे बेच रही हैं और महीने की 3 लाख से ज्यादा डिलीवरी मैनेज कर रही हैं। 25 लोगों की टीम और करोड़ों की फंडिंग के साथ वो अब 100 करोड़ के टर्नओवर की तरफ तेज़ी से बढ़ रही हैं—ये कहानी गवाह है कि अगर इरादा पक्का हो तो दुनिया का हर ताना आपकी सफलता की सीढ़ी बन जाता है।




