कानपुर की तंग गलियों से आसमान तक ✈️
यह कहानी किसी फिल्म की नहीं, हकीकत है।
कभी टेंपो चलाने वाले श्रवण कुमार विश्वकर्मा अब अपनी खुद की एयरलाइन शुरू करने जा रहे हैं — Shankh Airlines ????????
???? 24 दिसंबर को नागरिक उड्डयन मंत्रालय से No Objection Certificate मिल चुका है।
यानी सपना अब उड़ान भरने को तैयार है।
???? मध्यम वर्गीय परिवार
???? पढ़ाई अधूरी, लेकिन हौसले पूरे
???? सरिया, सीमेंट, माइनिंग और ट्रांसपोर्ट से बिज़नेस की शुरुआत
???? ट्रकों के नेटवर्क से पहचान
???? और अब… एविएशन सेक्टर में एंट्री
श्रवण कहते हैं —
“नीचे से ऊपर तक का सफर ही आम आदमी की परेशानी समझाता है।”
???? Shankh Airlines का विजन
✔️ हवाई यात्रा = लग्ज़री नहीं, ज़रूरत
✔️ तय किराया, डायनामिक प्राइसिंग नहीं
✔️ त्योहार हो या भीड़ — टिकट अचानक महंगी नहीं होगी
✔️ भरोसेमंद सेवा, सीमित मुनाफा
✈️ शुरुआत होगी Airbus A320 विमानों से
???? अभी 3 विमान तैयार
???? 2025 तक 10+
???? 2026–27 तक 15–25 विमान
???? आगे चलकर इंटरनेशनल उड़ानें भी ????
???? हेड ऑफिस: लखनऊ
???? पहली उड़ान: उत्तर प्रदेश से
कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज को बड़े शहरों से जोड़ने की तैयारी
श्रवण आज भी खुद को कहते हैं —
“कानपुर का लड़का”
गंगा, टेंपो और संघर्ष — उनकी पहचान है।
यह कहानी सिर्फ एक एयरलाइन की नहीं…
???? हिम्मत
???? जोखिम
???? और सोच बदलने की मिसाल है
अब इंतज़ार है ✈️ Shankh Airlines की पहली उड़ान का।






