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“दादा-दादी vs चोर: दिमाग की गोली, असली नहीं!”

एक बार की बात है, एक 83 साल की दादी 87 साल के दादा एक रात बिस्तर पर लेटी हुई थीं..??.

दादी ने खिड़की से बाहर देखा और दादा से कहा, “सुनो जी वह देखो, गैराज की लाइट जल रही है। क्या आप जाकर उसे बंद कर देंगे…???

दादाजी ने बड़ी मुश्किल से अपनी हड्डियों को हिलाया और… खिड़की से बाहर देखा वहाँ वह देखते हैं..?.?

पाँच-छह चोर उनके गैराज का दरवाज़ा तोड़ने की कोशिश कर रहे थे..???
जैसे वो कोई बैंक लू’ट रहे हों…

दादाजी ने बिना देर किए, अपने अपना फोन उठाया और 100 नंबर डायल कर दिया..???

हेलो पुलिस स्टेशन..??? दादा जी बोले देखिए, घर पर सिर्फ हम दो बूढ़े हैं।

अभी पाँच-छह चोर हमारे गैराज का दरवाज़ा तोड़ रहे हैं। जल्दी से टीम भेज दो..???

दूसरी तरफ से आवाज़ आई, “सर, हमने आपका पता नोट कर लिया है।

लेकिन अभी हमारी कोई टीम फ्री नहीं है..???

जैसे ही कोई टीम मिलेगी, हम जरूर भेज देंगे…

दादाजी का पारा बहुत चढ़ गया ..???
चोर अभी भी गैराज का ताला तोड़ रहे थे, दो मिनट बाद, दादाजी ने फिर से फोन उठाया,सुनो, अब किसी को भेजने की कोई जरूरत नहीं है..???

मैंने पाँचों चोरों को गो’ली मा’र दिया है..???

फोन रखते ही पुलिस स्टेशन में तो भूचाल सा आ गया हो.???

पाँच मिनट के भीतर, उनके घर के बाहर पुलिस की गाड़ियाँ, एक हेलीकॉप्टर, पैरामेडिक टीम, डॉक्टर और दो एंबुलेंस का मेला लग गया।????????

चोरों को तुरंत काबू करके गिरफ्तार कर लिया गया….

बाद में, पुलिस इंचार्ज दादाजी के पास आए और बोले…
दादाजी, आपने झूठ क्यों बोला था कि आपने उन पाँच चोरों को गोली मार दी है ..???
हमने उन्हें ज़िंदा पकड़ लिया है..???
इस पर दादाजी ने आँख मारते हुए कहा…????????

और आपने भी तो झूठ बोला था कि अभी आपकी कोई टीम फ्री ही नहीं है..???

सीख :-
आप कभी भी एक बुजुर्ग को कम मत समझना..???और ये मत भूलना कि जब बात घर की सुरक्षा की हो,तो दादा-दादी से बढ़कर कोई नहीं भी नही है।

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Author: sssrknews

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