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गुरु प्रदोष व्रत आज: जानिए पूजा विधि, महत्व और चमत्कारी उपाय

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🌤️ दिनांक – 14 मई 2026
🌤️ दिन – गुरूवार
🌤️ विक्रम संवत 2083
🌤️ शक संवत -1948
🌤️ अयन – उत्तरायण
🌤️ ऋतु – ग्रीष्म ॠतु
🌤️ मास – ज्येष्ठ
🌤️ पक्ष – कृष्ण
🌤️ तिथि – द्वादशी सुबह 11:20 तक तत्पश्चात त्रयोदशी
🌤️ नक्षत्र – रेवती रात्रि 10:34 तक तत्पश्चात अश्विनी
🌤️ योग – प्रीति शाम 05:53 तक तत्पश्चात आयुष्मान
🌤️*राहुकाल – दोपहर 02:14 से शाम 03:52 तक*
🌤️ सूर्योदय – 06:02
🌤️ सूर्यास्त – 07:07
दिशाशूल – दक्षिण दिशा मे

प्रदोष व्रत कथा महत्व पूजा विधि एवं मासिक संक्रांति शिवरात्रि व्रत कल कैसे करें आओ जानें

प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी और शुक्ल पक्ष त्रयोदशी को मनाया जाता है। वर्ष 2026 के वैशाख मास,कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को यह व्रत गुरुवार,14 मई को पड़ रहा है। गुरुवार का दिन गुरु (बृहस्पति) ग्रह को समर्पित है। जब प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़ता है, तो इसे गुरु प्रदोष या बृहस्पति प्रदोष कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की संध्या काल (सूर्यास्त से पूर्व की दो घड़ी) में पूजा करने से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, बाधाएँ दूर होती हैं, तथा गुरु ग्रह मजबूत होता है।
प्रदोष व्रत का धार्मिक,पौराणिक एवं ज्योतिषीय महत्व
‘प्रदोष’ का अर्थ है – संध्या काल, विशेष रूप से सूर्यास्त से पहले और बाद का समय। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव एवं पार्वती पृथ्वी पर विचरण करते हैं। प्रदोष काल में किया गया शिव पूजन, अभिषेक और मंत्र जप सामान्य दिनों की तुलना में अनेक गुना अधिक फलदायी होता है। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने इसी प्रदोष काल में ग्रहण किया था। इसलिए इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बिल्वपत्र चढ़ाने से विषैले प्रभाव (ग्रह दोष, रोग) नष्ट होते हैं।
ज्योतिषीय दृष्टि से, त्रयोदशी तिथि का स्वामी चंद्रमा का एक अंश है, लेकिन प्रदोष का प्रभाव शिव से जुड़ा है। जब यह तिथि गुरुवार (बृहस्पतिवार) को पड़ती है, तो गुरु (ज्ञान, धन, विवाह, संतान) की शुभता और शिव की कृपा दोनों एक साथ मिलती है। गुरु प्रदोष विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जिनकी कुंडली में गुरु कमजोर है, विवाह में विलंब हो रहा है, या व्यापार/शिक्षा में बाधाएँ आ रही हैं।

प्रदोष व्रत विधि
व्रत का संकल्प प्रातः स्नान के बाद संकल्प लें – “मैं आज प्रदोष व्रत रखूंगा, संध्या काल में भगवान शिव का पूजन करूंगा, और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करूंगा।”

दिन का आहार व्रती दिन में केवल एक बार फलाहार (दूध, फल, साबूदाना) ले सकते हैं। कठोर व्रती निर्जला (बिना जल) भी रख सकते हैं, किंतु स्वास्थ्य ध्यान में रखें।

प्रदोष काल में पूजन (सायं 5:35 – 8:35 बजे)

स्नान कर स्वच्छ वस्त्र (सफेद या पीला – गुरुवार के लिए पीला शुभ) पहनें।
शिवलिंग या शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। पीले या सफेद पुष्प, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, मदार के फूल चढ़ाएँ।
शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल से अभिषेक करें। विशेष रूप से “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का उच्चारण करते हुए प्रत्येक द्रव्य से अभिषेक करें।
बिल्वपत्र – 3 पत्तों का एक समूह (बिल्व दल) – शिवलिंग पर चढ़ाएँ। प्रत्येक बिल्वपत्र के साथ मंत्र: “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्”।
धूप, दीपक (घी का दीपक या तिल के तेल का दीपक) जलाएँ।
नैवेद्य – खीर, पंचामृत, फल, मिठाई (पीले रंग की – बेसन के लड्डू, केसरिया हलवा) अर्पित करें।
शिव पुराण या शिव चालीसा का पाठ करें। शिव सहस्रनाम का पाठ भी फलदायी है।
प्रदोष व्रत कथा सुनें या पढ़ें। इस कथा में शिव की कृपा से राजा मान्धाता को पुत्र प्राप्ति और ऋण मुक्ति की कहानी है।
आरती करें और प्रणाम करें।
दान ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराएँ, गाय को हरा चारा या गुड़ खिलाएँ। गुरुवार के दिन पीले वस्त्र, पीले फल (केले), हल्दी, चने की दाल, सोना या पीतल का दान शुभ होता है।
व्रत पारण अगले दिन (15 मई) सूर्योदय के बाद, स्नान-पूजन करके अन्न ग्रहण करें।

प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक एवं ग्रह दोष निवारण संदेश
प्रदोष व्रत केवल शिव की उपासना नहीं, बल्कि मन को एकाग्र करने और कर्मों के प्रभाव को शुद्ध करने का दिन है। ज्योतिषीय रूप से, यह व्रत विशेष रूप से चंद्र दोष, मंगल दोष, शनि दोष और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव को कम करता है। जब प्रदोष गुरुवार को पड़ता है, तो गुरु (बृहस्पति) – जो ज्ञान, धर्म, संतान और व्यापार का कारक है – की कृपा प्राप्त होती है। जिनकी कुंडली में गुरु नीच का हो, अस्त हो, या शत्रु राशि में हो, उनके लिए गुरु प्रदोष व्रत अमृत समान है। इस दिन किया गया शिव पूजन और गुरु मंत्र का जप चमत्कारिक परिणाम देता है।

गुरु प्रदोष पर विशेष उपाय
गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए प्रदोष काल में पीले वस्त्र पहनकर शिवलिंग पर पीले पुष्प (गेंदा, सरसों) चढ़ाएँ। केले का पेड़ जल दें। “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
विवाह बाधा / मांगलिक दोष के लिए: प्रदोष काल में 11 बिल्वपत्र पर “ॐ नमः शिवाय” लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएँ। इसके बाद 11 कन्याओं को पीले वस्त्र दान करें।
ऋण मुक्ति के लिए: शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय “ॐ नमः शिवाय ऋण मोचनाय नमः” का 21 बार उच्चारण करें। प्रदोष के बाद ताँबे का सिक्का नदी में प्रवाहित करें।
व्यापार/शिक्षा में उन्नति के लिए: प्रदोष के दिन पीले रंग की मिठाई (बेसन के लड्डू) बनाकर शिव को अर्पित करें, फिर उसे किसी विद्वान ब्राह्मण या शिक्षक को दान करें।
स्वास्थ्य लाभ (रोग निवारण): शिवलिंग पर चंदन, दूध, गंगाजल से अभिषेक करें। फिर उसी जल को घर के सभी सदस्यों पर छिड़कें।

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टाइगर आई स्‍टोन के चमत्कारी फायदे
* ये रत्‍न काला जादू और भूत-प्रेत से रक्षा करता है। बुरी नज़र से भी बचाता है एवं नेगेटिव एनर्जी को दूर करता है।

* आत्‍मविश्‍वास की कमी के कारण व्‍यापार में बार-बार असफल हो रहे व्‍यक्‍ति को इस रत्‍न के प्रभाव से सफलता मिल सकती है। यह रत्‍न आत्‍मबल और साहस प्रदान करता है।

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* शीघ्र विवाह के लिए भी इस रत्‍न की अंगूठी को तर्जनी अंगुली में पहनना चाहिए।

* अगर किसी के संतान होती है और वो मर जाती है तो उसे भी संतान सुख प्राप्‍त करने के लिए ये रत्‍न धारण करना चाहिए

* शत्रुओं से परेशान व्‍यक्‍ति मंगलवार के दिन टाइगर आई स्‍टोन पहन सकता है। कर्ज में दबे व्‍यक्‍ति को शुक्रवार के दिन अभिमंत्रित टाइगर आई स्‍टोन को धारण करना चाहिए।

* मानसिक तनाव या दुर्घटना से बचने के लिए भी ये रत्‍न पहना जाता है।

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प्रदोष व्रत आज,पंचक (समाप्त – रात्रि 10:34)

जय जिनेंद्र
🔔 मंदिर की घंटी 🔔
मंदिर में घंटी बजाने का रहस्य..

यह कोई रिवाज़ नहीं है। यह विज्ञान है, भक्ति है, और एक बहुत पुरानी याद है — कि आवाज़ से अंधेरा कटता है।

1. पहली घंटी-:

तुम मंदिर में घुसते हो। जूते उतारते हो। हाथ जोड़ते हो। और सबसे पहले — घंटी बजाते हो।

क्यों?

क्योंकि घंटी दरवाज़ा नहीं, मन खोलती है।

हमारे शास्त्र कहते हैं — मंदिर में प्रवेश से पहले घंटी बजाओ, ताकि तुम्हारे साथ आई हुई बातें — ऑफिस का टेंशन, घर की लड़ाई, फोन की नोटिफिकेशन — सब बाहर रह जाएँ।

घंटी की आवाज़ 7 सेकंड तक गूँजती है। वैज्ञानिक नाप चुके हैं — 7 सेकंड में तुम्हारा दिमाग अल्फा वेव में चला जाता है। यानी वही अवस्था जो ध्यान में होती है।

तुमने अभी भगवान को देखा भी नहीं, पर तुम शांत हो गए।

2. ध्वनि का विज्ञान-:

घंटी पीतल की होती है — 78% तांबा, 22% टिन। यही अनुपात क्यों?

क्योंकि जब यह बजती है, तो 7 धात्विक तरंगें निकलती हैं — जो तुम्हारे शरीर के 7 चक्रों से मिलती हैं।

सबसे नीचे की गूँज — मूलाधार को हिलाती है — डर कम होता है
बीच की तेज़ आवाज़ — अनाहत को छूती है — प्रेम जागता है
सबसे ऊपर की महीन झंकार — सहस्रार तक जाती है — मन एकाग्र होता है

पुराने मंदिरों में घंटी इतनी बड़ी होती थी कि उसकी आवाज़ 2 किलोमीटर तक जाती थी। गाँव के लोग घड़ी नहीं देखते थे — घंटी सुन कर जानते थे, आरती का समय हो गया।

आज हम ईयरबड लगाते हैं। तब लोग घंटी सुनते थे।

3. नकारात्मकता कैसे जाती है-;

तुमने देखा होगा — अस्पताल में, श्मशान के पास, या लड़ाई वाली जगह पर मन भारी लगता है।

विज्ञान कहता है — वहाँ हवा में नकारात्मक आयन ज्यादा होते हैं।

घंटी जब बजती है, तो उसकी ध्वनि 110 डेसिबल तक जाती है — एक सेकंड के लिए। यह शॉक वेव हवा के बैक्टीरिया, फंगस, और स्थिर ऊर्जा को तोड़ देती है।

इसीलिए पुराने समय में महामारी के समय मंदिरों में लगातार घंटी बजाई जाती थी। यह अंधविश्वास नहीं था — यह साउंड सैनिटाइज़र था।

जब तुम घंटी बजाते हो, तो तुम्हारे आसपास 5 मीटर का घेरा — 7 सेकंड के लिए — शुद्ध हो जाता है। तुम्हारे कपड़ों से, तुम्हारे विचारों से निकली हुई भारी ऊर्जा कट जाती है।

इसीलिए कहते हैं — घंटी बजाने से भूत-प्रेत भागते हैं। भूत मतलब — बासी विचार। प्रेत मतलब — अटका हुआ डर।

4. श्री राम और घंटी-:

रामायण में घंटी का ज़िक्र सीधा नहीं है, पर ध्वनि का है।

जब श्री राम अयोध्या लौटे, तो नगर में शंख, नगाड़े, घंटियाँ बजीं। तुलसीदास लिखते हैं — “बाजहिं बाजने विविध विधाना।”

क्यों? क्योंकि 14 साल का वनवास — लोगों के मन में डर, दुख, अनिश्चितता भर गया था। राम के आने की खबर से पहले, आवाज़ ने नगर को साफ किया।

आज भी जब तुम “जय श्री राम” बोल कर घंटी बजाते हो, तो तुम वही कर रहे हो — अपने अंदर के 14 साल के वनवास को खत्म कर रहे हो।

घंटी की पहली टन — “ज” — तुम्हारा अहंकार टूटता है
दूसरी गूँज — “य” — मन स्थिर होता है
तीसरी झंकार — “श्री” — हृदय में प्रेम आता है
आखिरी शांति — “राम” — तुम खाली हो जाते हो

खाली बर्तन में ही प्रसाद भरता है।

5. मन की एकाग्रता-:

तुम घंटी बजाते हो — आँख बंद होती है। क्यों?

क्योंकि आवाज़ इतनी मधुर होती है कि आँख अपने आप बंद हो जाती है। यह शरीर का नेचुरल रिफ्लेक्स है।

उस 7 सेकंड में तुम न अतीत में हो, न भविष्य में। तुम सिर्फ आवाज़ में हो।

यही ध्यान है।

बड़े-बड़े योगी घंटों बैठ कर जो अवस्था लाते हैं, एक बच्चा मंदिर की घंटी बजा कर एक पल में पा लेता है।

इसीलिए माँएँ बच्चों को कहती हैं — “जाओ, घंटी बजा आओ।” वह पूजा नहीं सिखा रहीं, वह मेडिटेशन सिखा रही हैं।

6. सकारात्मक ऊर्जा का सर्किट-:

मंदिर का आर्किटेक्चर देखो — गर्भगृह गुंबददार, घंटी ठीक दरवाज़े पर।

जब घंटी बजती है, तो आवाज़ गुंबद से टकरा कर वापस आती है — तुम्हारे सिर पर।

यह साउंड बाथ है। जैसे तुम पानी से नहाते हो, वैसे ही ध्वनि से नहाते हो।

पीतल की घंटी से निकली तरंगें तुम्हारे शरीर के पानी के अणुओं को व्यवस्थित करती हैं। जापानी वैज्ञानिक इमोटो ने सिद्ध किया — अच्छी ध्वनि से पानी के क्रिस्टल सुंदर बनते हैं। हमारा शरीर 70% पानी है।

तो घंटी बजाना — अपने अंदर के पानी को राम नाम से चार्ज करना है।

7. जीवन में असर-:

रोज़ मंदिर जाने वाले लोग ज्यादा शांत क्यों दिखते हैं?

क्योंकि वह रोज़ 7 सेकंड का रीसेट बटन दबाते हैं।

सुबह घंटी — दिन की शुरुआत शुद्धता से
शाम घंटी — दिन भर की थकान धुल जाती है

श्री राम की कृपा कोई बाहर से आने वाली चीज़ नहीं। कृपा मतलब — तुम्हारा मन साफ होना। जब मन साफ, तो निर्णय साफ। जब निर्णय साफ, तो जीवन सुख, शांति और आनंद से भर जाता है।

घंटी तुम्हें राम नहीं देती — घंटी तुम्हें तुम देती है।

8. आज के लिए-:

अगली बार मंदिर जाओ — जल्दबाज़ी में घंटी मत बजाओ।

रुको। रस्सी पकड़ो। आँख बंद करो। “जय श्री राम” मन में कहो। फिर बजाओ — एक बार, पूरी ताकत से नहीं, पूरी श्रद्धा से।

सुनो — कैसे आवाज़ उठती है, फैलती है, और धीरे-धीरे शून्य में मिल जाती है।

उसी शून्य में श्री राम बैठे हैं।

घंटी की आवाज़ खत्म होती है, पर उसकी गूँज तुम्हारे अंदर रह जाती है। वही गूँज पूरे दिन तुम्हें बचाती है — गुस्से से, डर से, नकारात्मकता से।

इसीलिए हमारे पूर्वजों ने कहा —

“आगमार्थं तु देवानां गमनार्थं तु राक्षसाम्।
कुर्वे घंटारवं तत्र देवताह्वानलक्षणम्।।”

अर्थ—: घंटी की आवाज़ देवताओं को बुलाती है, राक्षसों को भगाती है/

देवता बाहर नहीं, तुम्हारे अंदर के अच्छे विचार हैं। राक्षस बाहर नहीं, तुम्हारे अंदर के बुरे विचार हैं।

एक घंटी — और सब बदल जाता है।


* मंदिर में घंटी सिर्फ धातु नहीं, वह तुम्हारी आत्मा का दरवाज़ा है। उसे रोज़ बजाओ — आवाज़ से नहीं, भाव से। प्रभु श्री राम की कृपा अपने आप उतर आएगी।

मासिक शिवरात्रि और संक्रांति कल विष्णुपदी-वृषभ संक्रांति *जप तिथि : 15 मई 2026 शुक्रवार को विष्णुपदी संक्रांति में किये गये जप-ध्यान व पुण्यकर्म का फल लाख गुना होता है | – (पद्म पुराण , सृष्टि खंड)

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Author: sssrknews

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