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इतिहास की अनदेखी नायिका: वैज्ञानिक बिभा चौधुरी की भूली-बिसरी विरासत

प्रसिद्ध वैज्ञानिक महिला #कायस्थ बिभा चौधुरी: वह वैज्ञानिक
जिन्हें इतिहास ने भुला दिया।

भारत की शुरुआती
महिला भौतिकविदों
में Bibha Choudhuri
का नाम गर्व से लिया
जाना चाहिए था।

लेकिन लंबे समय
तक ऐसा नहीं हुआ।

उनकी कहानी प्रेरक भी है
और पीड़ादायक भी,क्योंकि
जिन खोजों ने उन्हें विश्वविख्यात
बना देना चाहिए था,वही धीरे-धीरे
पाठ्यपुस्तकों और स्मृतियों से
गायब होती चली गईं।

1939 में,वैज्ञानिक
D M Bose के साथ काम
करते हुए बिभा चौधुरी ने
क्लाउड चैम्बर की मदद
से कॉस्मिक किरणों का
अध्ययन किया।

उनके प्रयोगों में एक नए
उप-परमाण्विक कण के ठोस
संकेत मिले,ऐसी खोज जो
अपने समय से बहुत आगे थी।

उचित समर्थन और पहचान मिलती,
तो यह काम उन्हें नोबेल पुरस्कार की
दिशा में ले जा सकता था।

लेकिन उस दौर में महिला
वैज्ञानिकों को श्रेय मिलना
दुर्लभ था।

बाद में जब विदेशी वैज्ञानिक
ने मिलते-जुलते निष्कर्ष प्रकाशित
किए,तो प्रशंसा उन्हें मिली,
बिभा अनदेखी रह गईं।

बाद में उन्होंने इंग्लैंड में नोबेल
विजेता Patrick Blackett के
साथ काम किया।

कण भौतिकी के शुरुआती ज्ञान
को आकार देने में उनका डेटा
महत्वपूर्ण था,फिर भी उनका
नाम पृष्ठभूमि में ही रहा।

भारत लौटकर उन्होंने दशकों
तक शांतिपूर्वक शोध किया
और प्रकाशित किया—बिना
शोहरत,बिना सुर्खियों के।

उनकी कहानी का सबसे मार्मिक
पहलू है उनका धैर्य और गरिमा।

दुनिया ने भले ही नज़रें फेर ली हों,
बिभा चौधुरी ने विज्ञान से नाता नहीं
तोड़ा।

आज जब उनके शोध को फिर से
खोजा जा रहा है,तब समझ आता है
कि उन्होंने विज्ञान को कितना दिया,
और उन्हें कितना अन्यायपूर्ण ढंग से
भुला दिया गया।

अब समय है कि हम इतिहास
को ठीक करें और उन नामों को
उनका हक़ लौटाएँ, जिन्होंने ज्ञान
की सीमाएँ आगे बढ़ाईं।

sssrknews
Author: sssrknews

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