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प्रदोष व्रत कैसे करें? जानिए पूजा विधि, महत्व और चमत्कारी उपाय

प्रदोष व्रत कैसे करते हैं आओ जानें

प्रत्येक महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस बार 14 मई, गुरुवार को प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। प्रदोष पर व्रत व पूजा कैसे करें और इस दिन क्या उपाय करने से आपका भाग्योदय हो सकता है।
ऐसे करें व्रत व पूजा
– प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं।
– इसके बाद बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं।
– पूरे दिन निराहार (संभव न हो तो एक समय फलाहार) कर सकते हैं) रहें और शाम को दुबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें।
– भगवान शिवजी को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं।
– भगवान शिवजी की आरती करें। भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसीसे अपना व्रत भी तोड़ें। उस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।
ये उपाय करें
सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्ध्य देें। पानी में आकड़े के फूल जरूर मिलाएं। आंकड़े के फूल भगवान शिवजी को विशेष प्रिय हैं । ये उपाय करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी की कृपा भी बनी रहती है और भाग्योदय भी हो सकता है।

अभिचार क्रिया टोना टोटका काटने हेतु प्रभावशाली उपाय

१.👉 पीली सरसों, गुग्गल, लोबान व गौघृत इन सबको मिलाकर इनकी धूप बना लें व सूर्यास्त के १ घंटे भीतर उपले जलाकर उसमें डाल दें। ऐसा २१ दिन तक करें व इसका धुआं पूरे घर में करें। इससे नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं।

२.👉 जावित्री, जटामासी व केसर लाकर उनको कूटकर गुग्गल मिलाकर धूप बनाकर सुबह शाम २१ दिन तक घर में जलाएं। धीरे-धीरे तांत्रिक अभिकर्म समाप्त होगा।

३.👉 गऊ, लोचन व तगर थोड़ी सी मात्रा में लाकर लाल कपड़े में बांधकर अपने घर में पूजा स्थान में रख दें। शिव कृपा से तमाम टोने-टोटके का असर समाप्त हो जाएगा।

४.👉 घर में साफ सफाई रखें व पीपल के पत्ते से ७ दिन तक घर में गौमूत्र के छींटे मारें व तत्पश्चात् शुद्ध गुग्गल का धूप जला दें।

५.👉 कई बार ऐसा होता है कि शत्रु आपकी सफलता व तरक्की से चिढ़कर तांत्रिकों द्वारा अभिचार कर्म करा देता है। इससे व्यवसाय बाधा एवं गृह क्लेश होता है अतः इसके दुष्प्रभाव से बचने हेतु सवा किलो काले उड़द, सवा किलो कोयला को सवा मीटर काले कपड़े में बांधकर अपने ऊपर से २१ बार घुमाकर शनिवार के दिन बहते जल में विसर्जित करें व मन में हनुमान जी का ध्यान करें। ऐसा लगातार ७ शनिवार करें। तांत्रिक अभिकर्म पूर्ण रूप से समाप्त हो जाएगा।

६.👉 यदि आपको ऐसा लग रहा हो कि कोई आपको मारना चाहता है तो पपीते के २१ बीज लेकर शिव मंदिर जाएं व शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाकर धूप बत्ती करें तथा शिवलिंग के निकट बैठकर पपीते के बीज अपने सामने रखें। अपना नाम, गौत्र उच्चारित करके भगवान् शिव से अपनी रक्षा की गुहार करें व एक माला महामृत्युंजय मंत्र की जपें तथा बीजों को एकत्रित कर तांबे के ताबीज में भरकर गले में धारण कर लें।

७.👉 शत्रु अनावश्यक परेशान कर रहा हो तो नींबू को ४ भागों में काटकर चौराहे पर खड़े होकर अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए चारों दिशाओं में एक-एक भाग को फेंक दें व घर आकर अपने हाथ-पांव धो लें। तांत्रिक अभिकर्म से छुटकारा मिलेगा।

८.👉 शुक्ल पक्ष के बुधवार को ४ गोमती चक्र अपने सिर से घुमाकर चारों दिशाओं में फेंक दें तो व्यक्ति पर किए गए तांत्रिक अभिकर्म का प्रभाव खत्म हो जाता है।

ये कोई भी उपाय करने से पहले हमें अपनी जन्मकुंडली अवश्य दिखाए धन्यवाद

पंचमुखी हनुमान जी का दिव्य एवं दुर्लभ स्वरूप

पंचमुखी हनुमान (पञ्चमुखी हनुमान) श्री हनुमान जी का अत्यंत शक्तिशाली, तांत्रिक और रक्षक स्वरूप है। इस रूप में उनके पाँच मुख हैं, और प्रत्येक मुख एक अलग दिव्य शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। मान्यता है कि यह स्वरूप बड़े-बड़े संकटों का विनाश कर भक्तों को अभेद्य सुरक्षा प्रदान करता है।

पंचमुखी हनुमान जी के पाँच दिव्य मुख

1. पूर्व दिशा – श्री हनुमान मुख (वानर रूप)

यह मूल हनुमान स्वरूप है—भक्ति, निष्ठा, अद्वितीय बल और भगवान श्री राम के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक। यह मुख भय, बाधाओं और संकटों को तुरंत दूर करने वाला माना जाता है।

2. दक्षिण दिशा – श्री नरसिंह मुख

भगवान विष्णु के उग्र अवतार नरसिंह का स्वरूप। यह मुख अत्यंत शक्तिशाली है और दुष्ट, नकारात्मक तथा तांत्रिक शक्तियों का पूर्णतः संहार करता है। भक्तों की रक्षा इसका मुख्य उद्देश्य है।

3. पश्चिम दिशा – श्री गरुड़ मुख

भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ का रूप। यह मुख सर्प-दोष, विष-दोष, काला जादू, बाधाओं और विषैले जीवों से रक्षा करता है। इसे सुरक्षा-कवच का सर्वोत्तम रूप माना जाता है।

4. उत्तर दिशा – श्री वराह मुख

भगवान विष्णु के वराह अवतार का स्वरूप। यह पृथ्वी और संपत्ति की रक्षा करने वाला रूप है। भूमि, स्थिरता, समृद्धि तथा पाताल संबंधित नकारात्मक शक्तियों को शांत करता है और दूर भगाता है।

5. ऊर्ध्व दिशा (ऊपर) – श्री हयग्रीव मुख

अश्वमुख (घोड़े के सिर वाले) देव हयग्रीव, जो ज्ञान, विद्या और गूढ़ शक्तियों के देवता हैं। यह मुख उच्च कोटि की तांत्रिक बाधाओं, छिपे शत्रुओं और सूक्ष्म दुष्ट शक्तियों का नाश करता है।

राधा रानी के 21 प्रमुख नाम और उनका संक्षिप्त महत्व
1. राधा – जो श्रीकृष्ण को सबसे अधिक प्रिय हैं, प्रेम की पराकाष्ठा।

2. राधिका – भक्ति और प्रेम से पूजनीय स्वरूप।

3. वृषभानु नंदिनी – वृषभानु महाराज की पुत्री।

4. किशोरी जी – सदैव युवा, मधुर और कोमल स्वरूप वाली।

5. लाड़ली जी – बरसाना की सबसे प्रिय और दुलारी।

6. श्यामा – श्यामसुंदर की प्रिया, दिव्य प्रेम की प्रतीक।

7. ब्रजेश्वरी – ब्रज की स्वामिनी और अधिष्ठात्री देवी।

8. वृंदावनेश्वरी – वृंदावन धाम की रानी।

9. करुणामयी – दया, कृपा और प्रेम से भरी हुई।

10. कृपा मयी – अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाने वाली।

11. भानु दुलारी – भानु (वृषभानु) की दुलारी पुत्री।

12. गोपीश्वरि – समस्त गोपियों में श्रेष्ठ और पूजनीय।

13. रसिकेश्वरी – दिव्य प्रेम रस की अधिष्ठात्री।

14. माधवी – माधव (कृष्ण) की प्रियतम।

15. कृष्णप्रिया – श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय।

16. प्रेममयी – शुद्ध और निष्काम प्रेम का स्वरूप।

17. भक्तवत्सला – भक्तों से अत्यंत स्नेह रखने वाली।

18. आनंदमयी – आनंद और शांति प्रदान करने वाली।

19. हरिप्रिया – भगवान हरि की प्रिय।

20. गोलोकवासीनी – गोलोक धाम में विराजमान दिव्य शक्ति।

21. सर्वेश्वरी – समस्त शक्तियों की अधिष्ठात्री देवी।

महत्व
राधा रानी के इन नामों का जप करने से मन को शांति, प्रेम, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। कहा जाता है कि जो भक्त श्रद्धा से राधा नाम का स्मरण करता है, उसके जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और श्रीकृष्ण की कृपा सहज प्राप्त होती है।

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Author: sssrknews

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