“हाइजीन इज नॉट जस्ट इंपॉर्टेंट टू प्रवेंट डिजीज बट आलसो फॉर डिजायर” मोटा-मोटा इसका अर्थ हिंदी में यह होना चाहिए कि साफ सफाई न सिर्फ रोगों की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि इच्छाओं की पूर्ति के लिए भी जरूरी है।
अगर आप किसी से मिलने जा रहे हैं बेशक वह मेल हो या फीमेल तो आपको ब्रश करके और नहा धो के ही जाना चाहिए क्योंकि ये न सिर्फ आपके स्वास्थ्य के लिए जरूरी है बल्कि अच्छे मिलन के लिए भी जरूरी है।
हर किसी को रिजेक्शन के लिए तैयार रहना चाहिए। यह रिजेक्शन किसी से रिलेशन बनाने से संबंधित है। रिजेक्शन मतलब किसी को प्रपोज करने पर सामने वाले की तरफ से आपका प्रपोजल स्वीकार न करना या फिर बिना प्रपोजल के भी ऐसा आपको महसूस हो सकता है। तमाम लोग रिजेक्ट होने पर आपा खो देते हैं जबकि यह बेहद सामान्य होना चाहिए। मुझे खुद न जाने कितने बार रिजेक्शन मिला है।
सोशल मीडिया पर कई पोस्ट ऐसी देखी जिसमें सेक्स संबंधित जानकारी देने वाली सीमा आनंद की तमाम लोगों ने तीखी आलोचनाएं की हैं। तमाम लोग लिख रहे कि पोता-पोती खिलाने की उम्र में सेक्स एजुकेटर बनी घूम रही हैं उनको शर्म आनी चाहिए।
मैने भी सोचा कि सही बात है एक औरत जिसकी उम्र लगभग 63 साल के करीब हो वो इस तरह की बहकी बहकी बातें क्यों करेगी वो भी इतना खुलकर? उत्सुकतावश मैने भी उनके कुछ वीडियो फेसबुक और यूट्यूब वगैरह पर खोज निकाले और उनमें से एक क्लिप के कुछ ही मिनट देखे तो बड़ा मजा आया।
समय अभाव के चलते वीडियो को बहुत थोड़ा ही देखा हूं लेकिन इतने ही कम समय में जो भी बातें सीमा आनंद जी ने बताई हैं वह बेहद सटीक और जानकारी युक्त लगी हैं। उनमें से ही कुछ ऐसी बातें जो मुझे शानदार लगीं जो ऊपर के पैराग्राफ में लिख दिया है। जिस उम्र में सीमा आनंद जी यह सब बातें कर रही हैं उस उम्र तक पहुंचने के बाद तमाम लोग या तो ईश्वर का नाम जपते हैं या फिर सही मायनों में पोता-पोती में ही उलझे रहते हैं।
जिस विषय पर हमारे यहां तमाम लोग मुंह खोलना तक पसंद नही करते और उस पर बात करना ही असभ्यता कि निशानी समझते हैं सीमा आनंद जी के साहस को सलाम है जो खुलकर खुले मंच से ज्ञान दे रही हैं लेकिन इस विषय को इतना गंभीरता से समझने के लिए इतनी अधिक उम्र का होना बेहद जरूरी है। इसलिए कोई भी उनकी उम्र की आलोचना न करे। यह एक ऐसा विषय है जिसके बारे में कोई भी सटीक बात नही कर सकता है। सीमा आनंद ने अपने ही अंदाज में आसानी से लव,लस्ट,प्लेजर,प्रेसर,इमोशन,रिजेक्शन,रिएक्शन और रिलेशन हर चीज के बारे में बहुत ही अच्छे से समझाया है। उनके बारे में कोई भी बुरा ख्याल मन में लाने से पहले लोगों को उनकी लिखी किताबों को पढ़ना चाहिए और उनके वीडियोज पूर्वाग्रह से मुक्त होकर जरूर एक बार देखनी चाहिए।
जिस तरह इंसानों के चेहरे एक जैसे नहीं हैं उसी तरह इस विषय के अनुभव भी एक जैसे कदापि नही हो सकते हैं फिर भी सीमा आनंद जी ने अपने अनुभव से कुछ हद तक सटीकता से ही अपनी राय दी है जो ज्यादातर मामलों में सटीक होता है। सीमा आनंद जी वाकई अद्भुत महिला हैं और वह तारीफ लायक हैं और उनकी मेहनत, खुलकर बोलने की हिम्मत और अनुभव की सभी को कद्र करनी चाहिए। उनकी फिटनेस भी इस बात की गवाह है कि अगर इंसान खुलकर जीवन जीता है तो पोता-पोती खिलाने की उम्र में भी वेलेंटाइन डे के बारे में सोच सकता है।






