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BRICS समिट के बाद भारत-अमेरिका की सैन्य साझेदारी को मजबूती, 700 सैनिक करेंगे युद्ध की नई तकनीक और रणनीति का अभ्यास

नई दिल्ली: BRICS समिट के बाद भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक और अहम गतिविधि सामने आई है। दोनों देशों की सेनाएं 15 से 28 सितंबर तक होने वाले 22वें संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ में हिस्सा ले रही हैं। इस बार यह अभ्यास खास है, क्योंकि पहली बार इसे दो अलग-अलग ऑपरेशनल थिएटरों में आयोजित किया जा रहा है। एक ओर राजस्थान का गर्म रेगिस्तानी इलाका है, तो दूसरी ओर उत्तराखंड का ऊंचाई वाला पहाड़ी क्षेत्र।

अभ्यास का एक चरण राजस्थान के बीकानेर के पास महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया जा रहा है। यहां भारतीय और अमेरिकी सैनिक रेगिस्तानी परिस्थितियों में लॉन्ग-रेंज फायरिंग, प्रिसीजन स्ट्राइक, मैन्युवर और संयुक्त सैन्य अभियानों का अभ्यास कर रहे हैं। वहीं उत्तराखंड के औली में होने वाले चरण में हाई-ऑल्टिट्यूड वॉरफेयर, चुनौतीपूर्ण पहाड़ी इलाकों में ऑपरेशन, एयर मोबिलिटी और लॉजिस्टिक्स पर जोर रहेगा। औली LAC से करीब 95 किलोमीटर दूर स्थित है।

करीब 700 सैनिक ले रहे हैं हिस्सा

‘युद्ध अभ्यास 2026’ में भारत और अमेरिका के करीब 700 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। दोनों देशों से लगभग 350-350 सैनिक इस संयुक्त अभ्यास का हिस्सा हैं। इस बार अभ्यास में काउंटर-ड्रोन वॉरफेयर को भी प्रमुखता दी गई है।

पहली बार अमेरिकी Mobile Low, Slow, Small Unmanned Aircraft Integrated Defeat System (MLIDS) को भारत में इस अभ्यास के दौरान तैनात किया जा रहा है। इसके जरिए ड्रोन से आने वाले संभावित खतरों की पहचान, ट्रैकिंग और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमताओं का अभ्यास किया जाएगा।

अभ्यास में Command Post Exercise, Field Training Exercise और Combined Live-Fire Demonstration जैसे चरण शामिल हैं। इसका उद्देश्य सिर्फ हथियारों और फायरिंग का अभ्यास करना नहीं है, बल्कि दोनों सेनाओं के बीच कमांड, कम्युनिकेशन, फायर सपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं में इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करना भी है।

आधुनिक युद्ध तकनीक पर खास फोकस

इस बार के अभ्यास में आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दोनों देशों की सेनाएं नई तकनीक, हथियार प्रणालियों और अपने युद्ध अनुभवों को साझा कर रही हैं।

हाल के संघर्षों में ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, प्रिसीजन फायर और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की बढ़ती भूमिका को देखते हुए ‘युद्ध अभ्यास 2026’ में भी इन क्षमताओं को परखा जा रहा है। इसका उद्देश्य अलग-अलग परिस्थितियों में दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त कार्रवाई की क्षमता विकसित करना है।

अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर भी होंगे शामिल

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्गियो गोर भी अभ्यास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल होंगे। अमेरिकी सेना के मुताबिक, उनकी मौजूदगी दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत हो रहे रक्षा संबंधों को दर्शाती है।

2004 में शुरू हुआ था युद्ध अभ्यास

भारत और अमेरिका के बीच ‘युद्ध अभ्यास’ की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी। इसके बाद से यह दोनों देशों के बीच वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास के रूप में आयोजित होता रहा है और इसकी मेजबानी भारत तथा अमेरिका बारी-बारी से करते हैं।

हालांकि, युद्ध अभ्यास 2026 कई मायनों में अलग है। पहली बार एक ही सैन्य अभ्यास में हिमालयी क्षेत्र से लेकर राजस्थान के रेगिस्तान तक अलग-अलग ऑपरेशनल परिस्थितियों को शामिल किया गया है।

एक तरफ राजस्थान का रेगिस्तानी युद्धक्षेत्र है, जो पाकिस्तान सीमा के करीब है, तो दूसरी तरफ उत्तराखंड का ऊंचाई वाला इलाका चीन सीमा के करीब स्थित है। ऐसे में भारत और अमेरिका की सेनाएं इस अभ्यास के जरिए अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में अपनी जॉइंटनेस, इंटरऑपरेबिलिटी और आधुनिक युद्ध क्षमताओं को परख रही हैं।

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