मध्य प्रदेश में विकास की रफ्तार 3 मई को और तेज हो गई, जब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2360 करोड़ रुपये की लागत वाले इंदौर–पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण का भूमिपूजन किया। इंदौर के नैनोद गांव में आयोजित इस कार्यक्रम में कॉरिडोर पर आधारित शॉर्ट फिल्म भी दिखाई गई। किसानों ने जमीन के बदले चार गुना मुआवजा मिलने पर मुख्यमंत्री का स्वागत किया और उन्हें हल व मुकुट भेंट किया। इस दौरान किसानों ने भूमि अधिग्रहण के सहमति पत्र भी सौंपे। खास बात यह है कि सरकार ने किसानों को उनकी जमीन का 60 प्रतिशत विकसित भूखंड लौटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिससे वे सीधे विकास के भागीदार बनेंगे। इस योजना से कई किसान करोड़पति भी बन चुके हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की समृद्धि के लिए लगातार काम कर रही है और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को विकास की मुख्यधारा में जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस कॉरिडोर के तहत किसानों को लगभग 650 करोड़ रुपये मूल्य के प्लॉट दिए जा चुके हैं। उनका कहना था कि यदि सरकार किसानों की जमीन लेती है, तो उनकी स्थायी आजीविका सुनिश्चित करना भी उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने दावा किया कि देश में पहली बार किसानों को 60 प्रतिशत हिस्सेदारी देकर विकास मॉडल में भागीदार बनाया गया है।
सीएम यादव ने बताया कि यह कॉरिडोर केवल इंदौर और पीथमपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उज्जैन सहित आसपास के कई जिलों को जोड़ते हुए एक बड़े मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित होगा। यह 8-लेन सुपर एक्सप्रेस-वे दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से भी जुड़ेगा, जिससे एग्री प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और वेयरहाउसिंग जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर से उद्योगों को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले किसानों को न तो पर्याप्त बिजली मिलती थी और न ही सिंचाई की सुविधाएं विकसित थीं। उन्होंने बताया कि राज्य में सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ाया गया है और किसानों को अब दिन में बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, गेहूं खरीद के आंकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को बेहतर समर्थन मूल्य और बोनस दे रही है।
उन्होंने आगे बताया कि नदी जोड़ो परियोजना से बुंदेलखंड से मालवा तक सिंचाई की व्यवस्था मजबूत होगी और प्रदेश में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए 48 नए इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित किए गए हैं। इस कॉरिडोर को उन्होंने आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर बताते हुए इसे “भाग्योदय का शंखनाद” करार दिया।
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस योजना को देश की सर्वश्रेष्ठ योजना बताया और कहा कि इसमें किसान खुद अपनी जमीन देने के लिए तैयार हुए हैं। वहीं मंत्री तुलसीराम सिलावट ने इसे विकास, प्रगति और रोजगार का आधार बताया।
परियोजना के तहत सुपर कॉरिडोर से पीथमपुर निवेश क्षेत्र तक लगभग 20.28 किलोमीटर लंबी सड़क विकसित की जाएगी। करीब 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में नियोजित विकास होगा, जिसमें 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क और दोनों ओर बफर जोन शामिल होंगे। यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग-47 और 52 को जोड़ते हुए औद्योगिक परिवहन को अधिक सुगम बनाएगा और इंदौर क्षेत्र में संतुलित शहरीकरण को नई दिशा देगा।





