Pakistan Economic Fallout: पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए ईरान से जुड़े तनाव ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं। महंगाई की मार झेल रही जनता अब ईंधन संकट से भी परेशान है। इस बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्वीकार किया है कि अमेरिका-ईरान तनाव ने पिछले दो वर्षों में पाकिस्तान की आर्थिक प्रगति को बड़ा झटका दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार क्षेत्र में शांति बहाल करने और तनाव कम करने के लिए प्रयास जारी रखेगी।
पीएम शरीफ का बयान:
कैबिनेट बैठक में शहबाज शरीफ ने बताया कि इस संघर्ष के चलते पाकिस्तान का तेल आयात बिल 300 मिलियन डॉलर से बढ़कर 800 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जिससे अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल के दिनों में पेट्रोलियम की खपत में कमी आई है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, स्थिति पर नजर रखने के लिए एक टास्क फोर्स रोजाना समीक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं।
सीजफायर पर क्या कहा:
कैबिनेट बैठक में अमेरिका-ईरान वार्ता की प्रगति पर चर्चा करते हुए पीएम शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान ने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए ईमानदारी से प्रयास किए हैं। उन्होंने बताया कि 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच लंबी बातचीत हुई, जो करीब 21 घंटे चली और इसे एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल माना गया। उनके अनुसार, पाकिस्तान ने इस वार्ता को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके चलते संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने में मदद मिली और फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।
जमीनी हालात चिंताजनक:
हालांकि सरकारी दावों के बीच जमीनी स्थिति कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। ईंधन और गैस की कमी आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कराची के कुछ इलाकों में लोग गैस की कमी के चलते उसे प्लास्टिक के गुब्बारों में भरकर जमा करने को मजबूर हैं। यह हालात देश में गहराते ऊर्जा संकट और आर्थिक दबाव को साफ तौर पर दर्शाते हैं।




