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जानिए क्यों अधिक मास में 33 वस्तुओं का दान माना जाता है अत्यंत पुण्यदायी

Daily panchang,अधिक मास में 33 की संख्या में वस्तुए दान करने का महत्व क्यों है, पुरुषोत्तममास की महिमा क्या है

🌤️ दिनांक – 17 मई 2026
🌤️ दिन – रविवार
🌤️ विक्रम संवत 2083
🌤️ शक संवत -1948
🌤️ अयन – उत्तरायण
🌤️ ऋतु – ग्रीष्म ॠतु
🌤️ मास – अधिक ज्येष्ठ
🌤️ पक्ष – शुक्ल
🌤️ तिथि – प्रतिपदा रात्रि 09:40 तक तत्पश्चात द्वितीया
🌤️ नक्षत्र – कृत्तिका दोपहर 02:32 तक तत्पश्चात रोहिणी
🌤️ योग – शोभन सुबह 06:15 तक तत्पश्चात अतिगण्ड
🌤️*राहुकाल – शाम 05:32 से शाम 07:10 तक*
🌤️ सूर्योदय – 06:01
🌤️ सूर्यास्त – 07:09
दिशाशूल – पश्चिम दिशा मे

अधिक मास में 33 की संख्या में वस्तुए दान करने का महत्व क्यों है, पुरुषोत्तममास की महिमा क्या है आओ जानें

अधिक मास (मलमास या पुरुषोत्तम मास) में 33 की संख्या में दान करने का अत्यधिक धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व है,यह दान मुख्यत भगवान विष्णु की कृपा,पितरों की शांति और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है। अधिक मास 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा। अधिक मास में कुंवारे (UNMARRIED)व्यक्ति क़ो दान करने से बचना चाहिए,ऐसे समय में धार्मिक यात्रा पूजा पाठ संकीर्तन नाम सुमिरन तीर्थ स्नान का बहुत महत्व होता है।

दान करने का महत्व
हिन्दू सनातन धर्म में 33 कोटि देवी-देवता माने गए हैं। 33 वस्तुओं का दान करके इन सभी देवताओं को प्रसन्न किया जाता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
33 का आंकड़ा अधिक मास सामान्यत हर 32-33 महीनों के अंतराल पर अधिकमास आता है,इसलिए इस मास में 33 की संख्या को बहुत शुभ और पवित्र माना गया है। दान हमेशा सुपात्र क़ो ही देना चाहिए वैष्णव ब्राह्मण क़ो जो ब्राह्मण प्याज़ लहसुन गुटखा पान तम्बाकू नहीं खाता हो ईश्वर का नाम जाप सुमिरन सतकर्म पुण्य कार्य करता हो ऐसे ही व्यक्ति क़ो दान देना चाहिए।
पृथ्वी दान का पुण्य धार्मिक ग्रंथों जैसे निर्णयसिन्धु के अनुसार,33 मालपुओं (या अन्य 33 वस्तुओं) का दान करने से “पृथ्वी दान” के समान पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। मालपुआ 33 मालपुए का दान करना सबसे उत्तम माना जाता है।
क्या दान किया जाता है?
33 वस्तुओं में आमतौर पर पूजा पाठ की सामग्री धार्मिक ग्रंथ,सुहाग सामग्री,मिट्टी का कलश एवं मालपुएअनारसे या कोई भी मीठी वस्तु (जैसे पेड़े,बताशे) कांसे या पीतल के बर्तन में रखकर दान की जाती है। इसके अलावा,मिठाई,मौसमी फल,सब्जी,अनाज,पीले वस्त्र भी 33 की संख्या में वैष्णव ब्राह्मणों को ही दान करना चाहिए। किसी वैष्णव ब्राह्मण क़ो पूरे 33 दिन का घर का खाने पीने का राशन आदि का सामान भी दान कर सकते हैं।
आप इसे एक ही बार में या अलग-अलग दिनों में थोड़ा-थोड़ा करके दान कर सकते हैं अधिक मास मे जरूर करे,ये 33 चीजों का दान अलग अलग 33 वस्तु गिनती करके भी कर सकते हैं। दान वित्त समान होता है जितना जिसकी सामर्थ हो उतना ही करना चाहिए।

अमिट पुण्य अर्जित करने का अवसर-पुरुषोत्तम मास
17 मई से 15 जून तक पुरुषोत्तम/अधिक मास
अधिक मास में सूर्य की सक्रांति (सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश) न होने से इसे ‘मल मास’ (मलिन मास) कहा गया है। स्वामीरहित होने से यह मास देव-पितर आदि की पूजा तथा मंगल कर्मों के लिए त्याज्य माना गया। इससे लोग इसकी घोर निंदा करने लगे।
मल मास ने भगवान को प्रार्थना की, भगवान बोले- “मल मास नहीं, अब से इसका नाम पुरुषोत्तम मास होगा। इस महीने जो जप, सत्संग, ध्यान, पुण्य आदि करेंगे, उन्हें विशेष फायदा होगा। अंतर्यामी आत्मा के लिए जो भी कर्म करेंगे, तेरे मास में वह विशेष फलदायी हो जायेगा। तब से मल मास का नाम पड़ गया ‘पुरुषोत्तम मास’।”
विशेष लाभकारी
अधिक मास में आँवला और तिल के उबटन से स्नान पुण्यदायी है और स्वास्थ्य प्रसन्नता में बढ़ोतरी करने वाला है अथवा तो आँवला, जौ तिल का मिश्रण बनाकर रखो और स्नान करते समय थोड़ा मिश्रण बाल्टी में डाल दिया। इससे भी स्वास्थ्य और प्रसन्नता पाने में मदद मिलती है। इस मास में आँवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करना अधिक प्रसन्नता और स्वास्थ्य देता है।
आँवले व पीपल के पेड़ को स्पर्श करने से स्नान करने का पुण्य होता है, सात्त्विकता और प्रसन्नता की बढ़ोतरी होती है। इन्हें स्नान करने के बाद स्पर्श करने से दुगुना पुण्य होता है। पीपल और आँवला सात्विकता के धनी हैं।
इस मास में धरती पर (बिस्तर बिछाकर) शयन व पलाश की पत्तल पर भोजन करे और ब्रह्मचर्य व्रत पाले तो पापनाशिनी ऊर्जा बढ़ती है और व्यक्तित्व में निखार आता है। इस पुरुषोत्तम मास को कई वरदान प्राप्त हैं और शुभ कर्म करने हेतु इसकी महिमा अपरम्पार है।

आज का आपका राशिफल
मेष राशि : अपने वाक्य चातुर से कार्य बना लेंगे। व्यापार व्यवसाय में यश कीर्ति की वृद्दि होगी। खेल जगत से जुड़े जातकों के लिए समय श्रेष्ठ है। यात्रा से लाभ संभव है। समय पर कार्य करना सीखें।
वृषभ राशि : वर्तमान समय शुभ फल देने वाला है। अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें। बने काम बिगड़ सकते है। अपनी सोच को बदलें न की दूसरों को बदलने की कोशीश करें। क्रोध पर नियंत्रण रखें। इष्ट आराधना सहायक होगी।
मिथुन राशि : संतान के विवाह की चिंता रहेगी। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। पूंजी निवेश से लाभ संभव है। राज कार्य से जुड़े जातकों के लिए समय मिश्रित फलदाई है। अपने अधिकारों का गलत प्रयोग न करें। अन्यथा नुकसान हो सकता है।
कर्क राशि : व्यापार विस्तार की योजना सफल होगी। स्वस्थ रहें, मस्त रहें। व्यर्थ चिंता छोड़ दें। खाद्य पदार्थ से जुड़े जातकों के लिए समय अति श्रेष्ट है। समय रहते पूंजी निवेश कर दें। शत्रु वर्ग सक्रिय होगा।
सिंह राशि : आपके व्यवहार से सहकर्मी खुश होंगे। जीवन में नई उड़ान भरने का समय आया है। इसका लाभ लें। पारिवारिक जानों से भेंट होगी। अनायास खर्च हो सकता है। समाजिक कार्यक्रमों में भाग ले सकेंगे।
कन्या राशि : धनकोष में वृद्धि होगी। अपने करियर के प्रति गंभीर निर्णय लें। आत्मविश्वास की कमी के कारण गलत फैसले ले सकते है। मन में कई दुविधाएं चल रही है। आध्यत्मिक बल से लाभ होगा।
तुला राशि : लंबे समय से चले आ रहे पारिवारिक विवाद का आज अंतिम दिन है। महत्वपूर्ण कार्य निपटाने में लगे रहेंगे। छात्रों के लिए समय मेहनत करने वाला है। ज्यादा घमंड से नुकसान आप को ही होगा।
वृश्चिक राशि : कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। नौकरी की तलाश में भटकना पढ़ेगा। आप कितना सोचते है, पर करते कितना है। इस पर ध्यान दें। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। भूमि भवन क्रय करने में पूंजी लगानी पढ़ सकती है।
धनु राशि : क्या करूं, क्या न करूं इसी स्थिति से आप गुजर रहे है। शांति से फैसले लें, जल्दबाजी में कोई भी कार्य न करें। वाहन क्रय करने का मन बना रहे है। अपनी सोच को बदलें लाभ होगा। मित्रों से मुलाकात मन प्रफुल्लित करेगी।
मकर राशि : आप दूसरों के लिए बुरा न सोचें। अपने आहार पर नियंत्रण रखें। पेट संबंधित रोग संभव है। समय कम है और काम ज्यादा। मन लगाकर अपने कार्य में लग जाएं, सफलता मिलेगी। मनचाहा जीवनसाथी मिलने से मन प्रसन्न होगा।
कुंभ राशि : जो करना चाहिये वो ही करिये। फालतू समय बर्बाद न करें। दूसरों की सीख में अपना नुकसान कर बैठेंगे। शान्ति से विचार कर कोई निर्णय लें। आजीविका के स्त्रोत्र में वृद्दि के आसार है। पूराने निवेश से लाभ होगा।
मीन राशि : कार्य की अधिकता के कारण जरुरी कार्य पुरे नहीं हो सकेंगे। उन्नति के पथ पर अग्रसर होंगे। अधिकारी वर्ग के लिए समय उत्तम है। दान पुण्य से मन को शांति मिलेगी।

पुरुषोत्तम मास महिमा

पुरुषोत्तम मास स्वयं पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्रीहरि का ही स्वरूप है। इस मल मास को स्वयं भगवान ने अपना लोक मंगलकारी नाम प्रदान करके पुरुषोत्तम मास बनाकर कलिकाल में लोकमंगल हेतु प्रतिष्ठित किया है। इस पावन मास में किया गया कोई भी सद्कर्म निश्चित ही अक्षय पुण्य फल प्रदायक हमारे शास्त्रों में बताया गया है। इस मास की एक विशेषता यह भी है, कि इसमें किया गया न्यून पुण्य कर्म भी अनंत गुना अधिक फलदायी होता है इसीलिए इसको अधिक मास के नाम से भी जाना जाता है।

यत्किञ्चित्कुरुते धर्मं पुरुषोत्तममासके।
तदक्षयं भवेत्सर्वं न अत्र कार्या विचारणा॥

मास पर्यंत इस पावन अवधि में यथा सामर्थ्य किसी श्रेष्ठ नियम का निष्ठापूर्वक पालन करके इस सौभाग्यशाली अवसर का लाभ लेकर अपने स्वयं के कल्याण के साथ-साथ अपने पितरों व पूर्वजों की सद्गति मार्ग भी प्रशस्त कर सकते हैं। इस पावन पुरुषोत्तम मास में प्रभु नाम का जप, कीर्तन, सुमिरण, दान, गंगा स्नान व दीपदान के साथ-साथ श्रीमद्भागवत, श्रीरामचरितमानस, श्रीमद्भगवद्गीता सहित अन्य सद्ग्रंथों का यथा संभव पाठ करते हुए इस समय को सफल करते हुए अपने जीवन को सार्थक करें।

आज से अधिक मास, पुरुषोत्तम मास प्रारम्भ।
👉 आज से गङ्गोत्सव आरम्भ।
👉 पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) में निष्काम भाव से किया गया भजन, पूजन, कीर्तन, जप, दान ही मान्य होता है।
👉 अधिक मास में किसी कामना से किया गया अनुष्ठान, व्रत, दान आदि निष्फल माना जाता है।
👉 आज से पूरे एक माह तक विवाह आदि माङ्गलिक कार्य नहीं होंगे।
👉 अन्य समय में जो एक लाख गायत्री मन्त्र जप का फल होता है, उतना इस अधिक मास में किसी भी एक मन्त्र जपने से हो जाता है-
सावित्रिलक्षजापेन लभ्यते यत्फलं नरै:।
सकृन्मन्त्र जपेनैव मासेऽस्मिन्नुपलभ्यते।।
(पुरुषोत्तम मास माहात्म्य 17/21)
👉 इसी माहात्म्य में कहा गया है कि जो 100 वर्ष तप करने का फल है, वह इस अधिक मास में एक दिन ही व्रत – तप करने से प्राप्त हो जाता है।
👉 पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) में गीता पाठ, श्रीराम – कृष्ण के मन्त्रों, पञ्चाक्षर शिवमन्त्र, अष्टाक्षर नारायण मन्त्र, द्वादशाक्षर वासुदेव मन्त्र आदि के जप का लाख गुना, करोड़ गुना या अनन्त फल प्राप्त होता है।
👉 अधिक मास में भगवान की पूजा, दीपदान एवं ध्वजादान की बड़ी महिमा है।
👉 अधिक मास में अन्न दान, तिल दान का अत्यधिक महत्त्व है।
👉 अधिक मास में तिल से हवन करने से आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है।
👉 पॉंच पाण्डव, द्रौपदी, सुदेव, शुकदेव, दृढ़धन्वा आदि ने अधिक मास में धर्म – तप का अनुष्ठान कर परम् सिद्धि प्राप्त की थी।

सूर्य का रत्न आपको दिला सकता है राजयोग!
सूर्य का रत्न माणिक्य बेहद ताकतवर रत्न है और नीलम के समान ही इसका भी बहुत जल्दी प्रभाव दिखता है। माणिक्य कुरुन्दम समूह का रत्न है और एल्युमिनियम ऑक्साइड इसका प्रमुख तत्व है. सूर्य प्रमुख रूप से अग्नि प्रधान ग्रह है और सूर्य का रत्न माणिक्य (रूबी) होता है. रूबी पहनने से व्यक्ति सफलता प्राप्त करता है. माणिक्य धन-दौलत, मान-सम्मान और यश दिलाता है, राजनेता, अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर बनने और बड़े पदों पर पहुंचने के लिए माणिक्य पहनना चाहिए. सूर्य के लिए गुलाबी रंग के माणिक्य का इस्तेमाल सर्वोत्तम होता है।

माणिक्य सूर्य का रत्न है,सूर्य ग्रहों का राजा है इसीलिए उसका रत्न भी राजयोग दिलाता है, पहले राजाओं के मुकुट में भी माणिक्य रत्न जरूर होता था जिसके पास अन्य रत्न जड़े होते थे. हालांकि माणिक्य रत्न का इस्तेमाल कुंडली दिखाने के बाद करें।

किसे पहनना चाहिए माणिक्य रत्न?

मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु मीन लग्न वाले माणिक्य पहन सकते हैं. जो लोग जुलाई के महीने या रविवार को पैदा हुए हैं उन्हें भी यह रत्न सूट करता है।

मूलांक के अनुसार, 1, 10, 19 और 28 तारीख को जन्म लेने वाले व्यक्ति भी माणिक्य रत्न पहन सकते हैं. सूर्य की महादशा हो तो माणिक्य पहन कर देख सकते हैं.

सच्चे माणिक्य रत्न की पहचान कैसे करें?

माणिक्य रत्न अनार के दाने के समान होता है. गाढ़े रंग का रत्न होता है. यह वजनी, भारी और ठंडा होता है। माणिक्य को आंखों पर रखेंगे तो ठंडक महसूस होगी।

अगर अधिकारीगण माणिक्य रत्न पहनते हैं तो उनके ऑफिस में कोई परेशानियां नहीं होती हैं. माणिक्य पहनने वाला बीमार नहीं पड़ता है और घर में खुशहाली बनी रहती है. अगर माणिक्य सूट करता है तो राजा बना देता है।

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Author: sssrknews

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