भुवनेश्वर: भगवान श्री जगन्नाथ से जुड़ी जमीन और संपत्तियों को लेकर ओडिशा सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। सरकार अब ओडिशा के अलावा देश के अन्य हिस्सों और विदेशों में मौजूद श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की जमीनों की पहचान, सत्यापन और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। सरकार का उद्देश्य मंदिर की संपत्तियों को सुरक्षित करना और जमीन से जुड़े विवादों व अतिक्रमण के मामलों का व्यवस्थित तरीके से समाधान करना है।
बता दें कि श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के पास बड़ी मात्रा में जमीन और संपत्ति होने की जानकारी सामने आती रही है। हाल ही में मंदिर की संपत्तियों और बैंक में जमा राशि को लेकर भी चर्चा हुई थी।
कानून मंत्री ने दी बड़ी जानकारी
ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की जमीन को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मंदिर की जमीन, अतिक्रमण, भूमि रिकॉर्ड और जमीन के निपटारे से जुड़े नियमों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कानून मंत्री के मुताबिक, अब तक भगवान श्री जगन्नाथ से जुड़ी करीब 36 हजार एकड़ जमीन की पहचान की जा चुकी है। सरकार अब इन जमीनों का रिकॉर्ड तैयार करने के साथ यह भी पता लगाएगी कि जमीन कहां-कहां मौजूद है और उसकी वर्तमान स्थिति क्या है।
25 से 26 फीसदी जमीन पर अतिक्रमण का दावा
सरकार के मुताबिक, पहचान की गई जमीन में से करीब 25 से 26 फीसदी जमीन पर अतिक्रमण होने की जानकारी है। अब संबंधित जमीनों के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि किस जमीन पर किसका कब्जा है, कब्जे की स्थिति क्या है और किन मामलों में कानूनी कार्रवाई की जरूरत है। पात्र मामलों में जमीन के निपटारे या नियमितीकरण की प्रक्रिया भी नियमों के अनुसार अपनाई जा सकती है।
पाकिस्तान के सिंध में भी जमीन होने का दावा
इस पूरे मामले में कानून मंत्री का वह बयान भी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ से जुड़ी कुछ जमीन आज के पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में भी मौजूद होने की जानकारी है।
मंत्री के अनुसार, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की संपत्तियां भारत के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हैं और कुछ संपत्तियों की जानकारी देश के बाहर भी मिली है। सरकार अब ऐसी संपत्तियों की पहचान और उनके रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने की दिशा में काम करेगी।
सिर्फ कब्जा हटाना नहीं, संपत्तियों को सुरक्षित करना है लक्ष्य
ओडिशा सरकार का कहना है कि इस पूरी कवायद का उद्देश्य केवल अतिक्रमण हटाना नहीं है। सरकार श्री जगन्नाथ मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक संपत्तियों को सुरक्षित करना चाहती है, ताकि भविष्य में इनका बेहतर प्रबंधन किया जा सके।
सरकार का मानना है कि मंदिर की जमीन का सही रिकॉर्ड तैयार होने और संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन से भविष्य में मंदिर प्रशासन की आय को बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। इससे एक मजबूत कॉर्पस फंड तैयार किया जा सकता है, जिसका इस्तेमाल मंदिर के विकास और प्रबंधन से जुड़े कार्यों में किया जा सकेगा।
पात्र लोगों को मिल सकता है नियमितीकरण का मौका
सरकार ने संकेत दिया है कि हर मामले में सीधे कब्जा हटाने की कार्रवाई नहीं की जाएगी। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से मंदिर की जमीन पर रह रहा है और मौजूदा कानूनों के तहत जमीन के निपटारे या नियमितीकरण के लिए पात्र है, तो उसके मामले पर नियमों के अनुसार विचार किया जा सकता है।
वहीं, जिन मामलों में अवैध कब्जा पाया जाएगा या संबंधित व्यक्ति नियमितीकरण के लिए पात्र नहीं होगा, वहां जमीन को मंदिर प्रशासन के नियंत्रण में वापस लेने की कार्रवाई की जा सकती है।
2003 की सेटलमेंट नीति में बदलाव की तैयारी
कानून मंत्री ने बताया कि साल 2003 में लागू की गई समान सेटलमेंट नीति में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। सरकार का मानना है कि मौजूदा प्रक्रिया में जरूरी संशोधन किए जाने से जमीन से जुड़े मामलों का निपटारा तेजी से किया जा सकेगा।
इस दिशा में कई समीक्षा बैठकें भी हो चुकी हैं। सरकार अब मौजूदा जमीन सेटलमेंट व्यवस्था में आवश्यक संशोधन की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पात्र लोगों को तय नियमों के अनुसार जमीन नियमित कराने का अवसर मिल सकता है, जबकि अपात्र मामलों में जमीन को मंदिर प्रशासन के नियंत्रण में वापस लाने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
मंदिर की जमीन और संपत्तियों का बनेगा विस्तृत रिकॉर्ड
ओडिशा सरकार को उम्मीद है कि इस पूरी प्रक्रिया से श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की जमीन और संपत्तियों का एक व्यवस्थित और स्पष्ट रिकॉर्ड तैयार होगा। अतिक्रमण वाली जमीन की पहचान, पात्र मामलों का कानूनी निपटारा और मंदिर की संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन इस योजना के प्रमुख हिस्से हैं।
सरकार का लक्ष्य श्री जगन्नाथ मंदिर की ऐतिहासिक संपत्तियों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ भविष्य में इनसे होने वाली संभावित आय का बेहतर इस्तेमाल करना है, ताकि मंदिर के विकास और प्रबंधन के लिए आर्थिक आधार को और मजबूत किया जा सके।
Diclaimer : इसका हमारी The भारत SSSRK News24x7 समाचार और राष्ट्र दर्शन (सबसे तेज़, सबसे आगे…),
यह एक आंकलन मात्र है…







