यह एक सत्य घटना है जो नीम करोली बाबा के परम भक्त दादा मुखर्जी (सुधीर मुखर्जी) के साथ घटी थी। इसका वर्णन उनकी पुस्तक “By His Grace” में भी मिलता है।
एक बार दादा मुखर्जी और महाराज-जी भूमियाधार आश्रम में थे। शाम का समय था और चारों ओर शांति थी। बाबा आश्रम के बाहर सड़क के किनारे बनी एक छोटी दीवार (मुंडेर) पर बैठे थे और दादा उनके पास ही खड़े थे।
अचानक, जब दादा ने बाबा की ओर देखा, तो वे स्तब्ध रह गए। वहाँ बाबा नहीं बैठे थे। उनकी जगह एक विशाल वानर बैठा था !
दादा बताते हैं कि उन्होंने स्पष्ट देखा कि वह आकृति साक्षात हनुमान जी जैसी थी। उनका चेहरा काला था, पूरे शरीर पर सुनहरे बाल थे, और पीछे एक लंबी पूंछ थी जो उनके पैरों के नीचे दबी हुई थी। यह कोई सपना नहीं था, सब कुछ उनकी खुली आँखों के सामने हो रहा था।
दादा बहुत घबरा गए। उन्हें लगा कि शायद उन्हें कोई भ्रम हो रहा है। उन्होंने अपनी आँखें जोर से बंद कीं, उन्हें मला और फिर खोला। लेकिन दृश्य नहीं बदला वही विशाल हनुमान रूप अब भी उनके सामने बैठा था।
दादा कहते हैं कि उस समय वे इतने भयभीत हो गए थे कि वहाँ से भागना चाहते थे, लेकिन उनके शरीर में जैसे जान ही नहीं बची थी। कुछ क्षणों बाद, वह दिव्य रूप धीरे-धीरे वापस
महाराज-जी के साधारण रूप में बदल गया। बाबा ने उनकी ओर देखा और रहस्यमयी ढंग से मुस्कुराए, मानो कह रहे हों देख लिया मेरा असली रूप ?
इस घटना के बाद दादा मुखर्जी का विश्वास अटल हो गया कि नीम करोली बाबा कोई साधारण संत नहीं, बल्कि स्वयं हनुमान जी के अवतार हैं।






