जब श्री माताजी ने हवन के लिए भैरवनाथ को बुलाया।
बात उस समय की है जब श्री माताजी मुंबई में थे। अचानक श्री माताजी ने कह दिया हमें नागपुर जाना है।
उपस्थित गिने-चुने सहजयोगी थोड़ा हडबडा गयें। श्री माताजी ने एकदम से ऐसा क्यों कहा? श्री माताजी ने कहा है तो सबने तैयारी करके मुंबई एयरपोर्ट से नागपुर में उस समय का सबसे महंगे होटल प्राइड में चले गए।
श्री माताजी ने नागपुर पहुंच कर हवन कि तैयारी करने के लिए कहा।
साथ ही कुछ सहजयोगियों को बुलाकर निर्देश दिया की वह लोग नागपुर से छिंदवाड़ा के लिए तुरंत रवाना हो जाएं और श्री माताजी द्वारा एक निश्चित दूरी बताकर उनको बताया गया की उस जगह पर एक बूढ़ा वृद्ध आदमी खड़ा मिलेगा उसे गाड़ी में बैठाकर तुरंत लेकर आओ।
मां का आदेश मिलते ही कुछ सहजी तुरंत गाड़ी लेकर छिंदवाड़ा के लिए रवाना हो गए। श्री माताजी द्वारा बताये जगह पर उनको वह वृद्ध बूढ़ा व्यक्ति दिख गया।
वृद्ध आदमी देखने में कुछ विशेष नहीं लग रहा था। कपड़े फटे हुए थे। दाढ़ी बाल सब अस्त व्यस्त थे। उस आदमी की हैसियत गाड़ी में बैठने की बिलकुल भी नहीं थी, लेकिन अब बेचारे सहजी क्या करें?
श्री माताजी ने कहा है तो लेकर जाना ही पडेगा। वृद्ध को गाड़ी में बैठाया गया। आश्चर्यजनक रूप से उस वृद्ध ने रास्ते भर किसी से कोई बात नही की। सहजी भाइयों ने उससे बात करने का प्रयास भी किया लेकिन उसने बिलकुल भी किसी की बात में कोई रुचि नहीं दिखाई और ना ही एक भी शब्द बोला।
गाड़ी नागपुर पहुंची। श्री माताजी ने बोला उस वृद्ध को हवन में लेकर आओ। तुरंत उस वृद्ध को नहला धुलाकर नए वस्त्र पहनाकर हवन में लाया गया।
सम्पूर्ण हवन में वह वृद्ध पुरुष पूर्ण शांति और तन्मयता के साथ बैठे रहे। उनकी दृष्टि श्री माताजी के श्रीचरणों की ओर निरंतर बनी रही और उनके चेहरे पर गजब का भक्ति भाव प्रकट होता रहा।
जब हवन सम्पन्न हुआ।
श्री माताजी ने निर्देश दिया इन वृद्ध को वापस उसी जगह पर छोड़ा जाएं जहां से इनको लिया गया था।
एक गाड़ी उनको लेकर तुरंत रवाना हो गई। गाड़ी ने उनको निर्धारित जगह पर छोड़ा और वापस मुड़ी।
जैसे ही गाड़ी के बैक मिरर में सहजी भाइयों ने देखा। वह वृद्ध उनको देख कर मुस्कुराया और एकदम से हवा में गायब हो गया। यह देख सब एकदम से बुरी तरह हड़बड़ा गए।
सब तुरंत होटल पहुंचे और जाकर श्री माताजी को यह बात बताई। घटना सुनकर श्री माताजी मुस्कुराने लगे और मुस्कुराते हुए बोले!!
“वह भैरवनाथ थे।”
मां की बात समाप्त होते ही सम्पूर्ण वातावरण में एकदम से तीव्र चैतन्य बहने लगा।
जब एक सहजयोगीे यह सारी आँखों देखी घटना हमे सुना रहा था तब हमे भी जबरदस्त ठंडा महसूस हो रहा था।




