पंचकूला | अग्रवाल भवन, सेक्टर-16 | 25 सितंबर 2026
|| हर हर महादेव ||
पंचकूला के सेक्टर-16 स्थित अग्रवाल भवन में चल रही 7 दिवसीय भगवान शिव कथा के तीसरे दिन शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को कथा का विषय रहा—“क्या ईश्वर दिखाई देता है? शास्त्रीय प्रमाण?”
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से आयोजित इस कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। तीसरे दिन व्यास पीठ से श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य एवं शिवपुराण मर्मज्ञ स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी ने ईश्वर के स्वरूप, आध्यात्मिक अनुभूति और शास्त्रों में वर्णित ईश्वर-दर्शन की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की।
‘क्या ईश्वर दिखाई देता है?’ — जिज्ञासा से शुरू हुई चर्चा
कथा के दौरान स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी ने कहा कि आज का युवा यह सवाल पूछता है कि यदि ईश्वर हैं तो दिखाई क्यों नहीं देते?
उन्होंने इस सवाल को जिज्ञासा बताते हुए कहा कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में ईश्वर की अनुभूति और दर्शन से जुड़े विभिन्न शास्त्रीय संदर्भ मिलते हैं।
कथा में उन्होंने भगवद्गीता, वेद और उपनिषद सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों के संदर्भ देते हुए ईश्वर-दर्शन की अवधारणा को समझाने का प्रयास किया।
कथा के 5 प्रमुख बिंदु
1. ईश्वर को लेकर प्रत्यक्ष अनुभव की अवधारणा
स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी ने भगवद्गीता के “प्रत्यक्षावगमं धर्म्यम्” संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि आध्यात्मिक साधना को केवल सैद्धांतिक विषय नहीं माना गया है, बल्कि इसे अनुभव से जोड़कर देखा गया है।
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को विराट स्वरूप दिखाने के प्रसंग का उदाहरण देते हुए दिव्य दृष्टि की अवधारणा पर प्रकाश डाला।
2. गुरु की भूमिका पर दिया जोर
कथा में वक्ता ने आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने में गुरु की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार किसी विशेष प्रक्रिया के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन आवश्यक होता है, उसी प्रकार आध्यात्मिक मार्ग में भी गुरु का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण माना गया है।
उन्होंने “गुरु बिन ज्ञान न उपजे” जैसी पारंपरिक धारणा का उल्लेख करते हुए ब्रह्मज्ञान और गुरु-परंपरा की चर्चा की।
3. भगवान शिव को बताया आदि गुरु
कथा के दौरान भगवान शिव को आदि गुरु के रूप में प्रस्तुत करते हुए उनके त्रिनेत्र के आध्यात्मिक प्रतीकात्मक अर्थ पर चर्चा की गई।
स्वामी डॉ. सर्वेश्वर जी ने कहा कि शिव का त्रिनेत्र केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना और दिव्य दृष्टि से जुड़ी अवधारणा के रूप में भी समझा जाता है।
4. आधुनिक समय में आध्यात्मिक अनुभव की चर्चा
वक्ता ने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान में ब्रह्मज्ञान की दीक्षा के माध्यम से साधना और आध्यात्मिक अनुभव की परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने इसे शास्त्रीय आध्यात्मिक ज्ञान से जोड़कर समझाया।
5. भजनों से भक्तिमय हुआ माहौल
कथा के दौरान भजन और संगीत की प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। “दिखा दे कहीं वो सूरत…” और “ज्योति से ज्योति जगाओ” जैसे भजनों पर श्रद्धालु भक्ति भाव में नजर आए।
कथा के समापन पर मंगल आरती का आयोजन किया गया।
चौथे दिन नारी सशक्तिकरण पर होगी चर्चा
सात दिवसीय शिव कथा के चौथे दिन, 26 सितंबर 2026 को “सच्चा नारी सशक्तिकरण क्या है?” विषय पर चर्चा होगी।
आयोजकों के अनुसार, इस दौरान शिव परंपरा और आध्यात्मिक दृष्टिकोण में नारी शक्ति के स्वरूप तथा वर्तमान समाज में महिलाओं की भूमिका पर विचार रखा जाएगा।
कथा का समय और स्थान
📅 तारीख: 23 से 29 सितंबर 2026
⏰ समय: शाम 6:30 बजे से रात 9:30 बजे तक
📍 स्थान: अग्रवाल भवन, सेक्टर-16, पंचकूला
🙏 प्रवेश: निशुल्क
🪔 प्रतिदिन: पूजन के साथ कथा का शुभारंभ और मंगल आरती के साथ समापन
आयोजक दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, पंचकूला की ओर से श्रद्धालुओं से आगामी कथा में भी सपरिवार शामिल होने की अपील की गई है।
— Reporter: Rajeev Kumar Srivastava
📞 84497 77680
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