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गमलों की राजनीति या विकास का दिखावा? मुजफ्फरनगर में उठे बड़े सवाल

“#गमलों_की_राजनीति_या_विकास_का_दिखावा?”

मुजफ्फरनगर में एक दिन की सजावट पर उठे बड़े सवाल..?

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मुजफ्फरनगर। क्या शहर का विकास अब सिर्फ वीआईपी दौरों तक सीमित रह गया है? क्या सरकारी मशीनरी जनता के लिए काम करती है या सिर्फ “दिखाने” के लिए? आज ही के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के बाद मुजफ्फरनगर में जो तस्वीर सामने आई है, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दौरे से पहले ‘#मॉडल_सिटी’, दौरे के बाद वही पुरानी तस्वीर
मुख्यमंत्री के आगमन से पहले शहर का नजारा पूरी तरह बदल दिया गया। जहां-जहां कार्यक्रम प्रस्तावित थे, वहां: सड़कों के गड्ढे रातों-रात भर दिए गए, बिजली व्यवस्था “चुस्त-दुरुस्त” कर दी गई
ठेले-खोमचे हटाकर रास्ते साफ कर दिए गए, डिवाइडरों पर नई पुताई कर दी गई।
किसी ने भ्रष्टाचार के सवाल उठाए तो उसे #जेल भेज दिया गया।

और सबसे खास #हरे_भरे_गमलों से शहर के कई #डिवाइडर को #सजाया गया
एक दिन के लिए मुजफ्फरनगर सचमुच “स्मार्ट सिटी” जैसा दिखने लगा।

परंतु मुख्यमंत्री के जाते ही हटने लगे गमले… आखिर क्यों?
जैसे ही मुख्यमंत्री का काफिला शहर से निकला, हालात बदलने लगे।
बताया जा रहा है कि नगर पालिका की गाड़ियों ने तुरंत ही डिवाइडरों से गमले हटाने शुरू कर दिए।
यहां से असली सवाल खड़े होते हैं..!
क्या ये गमले सिर्फ दिखावे के लिए लगाए गए थे?
अगर शहर को सुंदर बनाना था, तो इन्हें स्थायी क्यों नहीं रखा गया?
इन गमलों पर खर्च हुआ पैसा किस बजट से आया?
और सबसे बड़ा सवाल
क्या यह जनता और मुख्यमंत्री, दोनों की आंखों में धूल झोंकना नहीं है?

बजट, जिम्मेदारी और जवाबदेही.. कौन देगा जवाब?
अगर यह पूरा “#सौंदर्यीकरण” सिर्फ कुछ घंटों या एक दिन के लिए था, तो यह सीधे-सीधे सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
यह मामला अब केवल चर्चा का नहीं, बल्कि जांच का विषय बनता जा रहा है..!

क्या इस पर कोई टेंडर हुआ था?
क्या नगर पालिका के पास इसका लिखित रिकॉर्ड है?
क्या आरटीआई के जरिए इसका पूरा खर्च सामने आ सकता है?

जनता बेवकूफ नहीं है
सबसे अहम बात यह है कि जनता अब सब समझती है।
वह यह भी देख रही है कि
“विकास अगर स्थायी नहीं है, तो वह सिर्फ सजावट है, सुधार नहीं।”
एक दिन की चमक-दमक से न तो शहर बदलता है और न ही जनता का विश्वास बनता है।

यह घटना प्रशासन के लिए एक आईना है।
अगर वाकई विकास करना है, तो उसे जमीन पर स्थायी रूप में दिखना चाहिए, न कि सिर्फ वीआईपी विजिट तक सीमित रहना चाहिए।

समझ लीजिए दिखावे से नहीं, ईमानदार काम से बनेगा भरोसा
मुजफ्फरनगर की यह घटना एक बड़े सवाल के रूप में सामने आई है, क्या हम असली विकास कर रहे हैं या सिर्फ उसका अभिनय?
अब जरूरत है पारदर्शिता की, जवाबदेही की और सबसे बढ़कर, जनता के प्रति ईमानदारी की।

#विकास_बालियान जी की वाल से साभार

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Author: sssrknews

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