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राजीव गांधी हत्याकांड, पेरारिवलन की रिहाई और न्याय व्यवस्था पर उठते सवाल

ए. जी. पेरारिवलन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड के मुख्य दोषियों में से एक थे। उन्होंने इस मामले में 31 साल से अधिक समय जेल में बिताया और मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रिहा हुए।
राजीव गांधी हत्याकांड में पेरारिवलन पर आरोप था कि उसने लिट्टे (LTTE) के मास्टरमाइंड शिवरासन को 9 वोल्ट की दो बैटरी खरीदकर दी थीं। इन बैटरियों का इस्तेमाल उस आत्मघाती बेल्ट में किया गया था जिससे राजीव गांधी की हत्या की गई थी।
उस पर साजिश के तहत गलत पता देकर एक मोटरसाइकिल खरीदने का भी आरोप था।

1998 में टाडा अदालत ने उसे मौत की सज़ा सुनाई, जिसे 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा।
दया याचिका में 11 साल की लंबी देरी के कारण सुप्रीम कोर्ट ने उसकी मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया।
18 मई 2022 को, सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का उपयोग करते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया।
जेल में रहते हुए उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी और 2026 में, रिहाई के बाद वह मद्रास उच्च न्यायालय में एक वकील के रूप में नामांकित हुआ।

अच्छा हुआ अफजल गुरु और कसाब को फांसी दे दी गई वरना कसाब कराची बिरयानी के नाम से मुंबई में होटल चला रहा होता और अफजल गुरु कोचिंग सेंटर के नाम से नए आतंकी देश मे तैयार कर रहा होता।
हमारा सिस्टम ही सड़ चुका है।
हम अपने प्रधानमंत्री की हत्या के दोषी को आजीवन कारावास में नही रख सकते है।
मेरे समझ मे ये नही आ रहा है आतंकियो के लिये कोर्ट रात में खुलवाने वाली कांग्रेस इस मामले में कँहा थी ??

या राजीव जी की मौत उनके लिये कोई बड़ा सदमा नही थी। साभार समर प्रताप जी

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Author: sssrknews

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