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रतन टाटा और नाज़िया–ज़ोहेब हसन: सादगी, संगीत और इतिहास रच देने वाली एक मुलाक़ात की कहानी

“कोई रतन टाटा जी हैं। नाज़िया और ज़ोहेब, तुमसे बात करना चाहते हैं ये।” पाकिस्तान की मशहूर गायिका नाज़िया हसन, जिनका जलवा भारत में भी ज़बरदस्त था, एक दिन रतन टाटा ने उन्हें फोन किया था। वो फोन नाज़िया की मां ने उठाया। जब रतन टाटा जी ने उन्हें अपने बारे में बताया तो वो पहचान नहीं सकी कि ये साहब कौन हैं। उन्होंने अपने बच्चों, नाज़िया और ज़ोहेब को आवाज़ लगाकर बुलाया।

और फिर नाज़िया हसन ने रतन टाटा से फोन पर बात की। रतन टाटा ने नाज़िया से कहा,”मेरा नाम रतन है। और मैं सीबीएस इंडिया नाम से एक म्यूज़िक कंपनी शुरू कर रहा हूं। मैं चाहता हूं कि तुम और ज़ोहेब हमारे लिए एक एल्बम रिकॉर्ड करो। अगर हो सके तो। क्या मैं तुम दोनों से मिलने आ सकता हूं?”

“मां, क्या मिस्टर रतन एक म्यूज़िक प्रोजेक्ट डिस्कस करने हमारे यहां आ सकते हैं?” अति उस्ताहित नाज़िया ने अपनी मां से पूछा। “आज नहीं, फ्राइडे को बुला लो।” मां ने नाज़िया से कहा। “मिस्टर रतन, क्या आप शुक्रवार को विम्बलडन, हमारे घर आ सकते हैं?” नाज़िया ने ज़रा प्रोफेशनल होकर रतन टाटा जी से ये बात कही।

फ्राइडे को एक वैल ड्रैस्ड, लंबा सा आदमी नाज़िया हसन के घर आया। उस आदमी के चेहरे पर एक अनोखी सी मुस्कान थी। और बोलने का लहज़ा बहुत नरम, बहुत खूबसूरत था। वो रतन टाटा थे। उन्होंने नाज़िया हसन और उनके भाई से बहुत खुलकर और पूरी ईमानदारी से बात की। जबकी उस वक्त तक नाज़िया हसन को पता भी नहीं था कि वो जिससे बात कर रही हैं वो भारत के बहुत बड़े इंडस्ट्रीलिस्ट हैं। खुद रतन टाटा ने भी उन लोगों के सामने अपने बारे में कोई शेखी बघारी। खैर, यही तो खानदानी रईसों की पहचान होती है।

“अगर तुम दोनों तैयार हो तो हम इस एल्बम पर काम शुरू करें। मैं एग्रीमेंट के लिए अपने किसी आदमी को तुमसे मिलवा दूंगा। लेकिन ध्यान रखना कि जब तुम एग्रीमेंट साइन करो तो तुम्हारे साथ तुम्हारे पेरेंट्स और कोई वकील भी रहना चाहिए। अगर किसी चीज़ से कोई परेशानी है तो बेझिझक मुझे बता दो।”

आगे जो हुआ वो म्यूज़िक इंडस्ट्री में इतिहास है। सीबीएस के साथ मिलकर जो एल्बम नाज़िया और ज़ोहेब ने रिकॉर्ड की थी उसका नाम था “यंग तरंग।” साल 1983 में ये एल्बम पहले पाकिस्तान में रिलीज़ हुई थी। फिर 1984 में वर्ल्डवाइड रिलीज़ हुई। नाज़िया के भाई ज़ोहेब कहते हैं कि यंग तरंग के लिए उन्होंने और नाज़िया ने जो म्यूज़िक वीडियो रिकॉर्ड किया था वो संभवत: दक्षिण एशिया का पहला म्यूज़िक वीडियो था।

उसी वक्त अमेरिका में एमटीवी लॉन्च हुआ था। एमटीवी वालों ने नाज़िया और ज़ोहेब से संपर्क किया। बकौल ज़ोहेब, एमटीवी वाले बोले कि उन्होंने ऐसा कुछ पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने ये भी पूछा कि क्या आप दोनों ने अंग्रेजी में भी कभी ऐसा कुछ किया है? यानि एमटीवी वाले भी नाज़िया और ज़ोहेब में संभावनाएं तलाशने लगे थे।

यंग तरंग का वो म्यूज़िक वीडियो दूरदर्शन पर भी खूब चला। ये एल्बम इतनी लोकप्रिय हुई भारत में कि इसने नाज़िया की पुरानी एल्बम “डिस्को दीवाने” का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। नाज़िया और ज़ोहेब की रतन टाटा जी से अगली मुलाकात हुई मुंबई के ताज होटल में जहां यंग तरंग एल्बम लॉन्च का एक प्रोग्राम रखा गया था। उस वक्त सीबीएस के एमडी ने नाज़िया और ज़ोहेब को बताया कि रतन टाटा वास्तव में कौन हैं। भारत और दुनिया में उनकी क्या हस्ती है। ज़ोहेब के मुताबिक, उससे पहले तक उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि रतन टाटा इतनी बड़ी शख्सियत होंगे।

एल्बम लॉन्च इवेंट के बाद रतन टाटा ने नाज़िया और ज़ोहेब को को अपने घर पर डिनर के लिए इनवाइट किया। अब तक चूंकि नाज़िया और ज़ोहेब जान चुके थे कि रतन टाटा कौन हैं तो उन्होंने सोचा कि ये तो किसी पैलेस नुमा मकान में रहते होंगे। लेकिन जब ये रतन टाटा के घर पहुंचे तो इन्हें बड़ी हैरानी हुई। भारत का इतना बड़ा इंडस्ट्रीलिस्ट एक दो बेडरूम वाले बहुत सादे से फ्लैट में अपनी बहन, एक नौकर और एक अलसेशियन कुत्ते के साथ रहता है। रतन टाटा को अपने कुत्ते से बहुत प्यार था।

ज़ोहेब कहते हैं कि उस दिन उन्होंने इतनी बड़ी हस्ती के साथ उनके सादे से घर में बहुत सिंपल और सादगी से डिनर किया। वो दिन उनके लिए यादगार बन गया। ज़ोहेब के मुताबिक, उस दिन के बाद एक-दो दफा रतन टाटा जी से उनकी मुलाकात फिर हुई थी। एक दफा तो ज़ोहेब लंदन में कुछ शॉपिंग कर रहे थे जब रतन टाटा उनके पास आए। रतन टाटा ने उनसे कहा,”कैसे हो ज़ोहेब? नाज़िया और तुम्हारे पेरेंट्स कैसे हैं?” ज़ोहेब ने कहा,”हाय मिस्टर रतन। वो सब ठीक हैं। थैंक्यू। आप यहं यूके में कैसे आए?”

रतन टाटा मुस्कुराए और बोले,”कुछ हवाई जहाज़ देखने आया हूं।” ज़ोहेब को बाद में पता चला कि उस दिन वाकई में रतन टाटा कुछ नए हवाई जहाज़ खरीदने का सौदा करने लंदन आए थे। ज़ोहेब कहते हैं कि मिस्टर रतन टाटा इस बात का सबूत थे कि एक इंसान आइकॉनिक बिजनेसमैन होने के साथ-साथ एक जेंटलमैन भी हो सकता है।

नोट- साथियों पिछले साल जब रतन टाटा जी का देहांत हुआ था तब ज़ोहेब हसन ने रतन टाटा जी के बारे में अपने फेसबुक हैंडल पर ये जानकारियां साझा की थी। अगर इन जानकारियों में कोई फैक्चुअल एरर हो तो उन्हें चिन्हित ज़रूर कीजिएगा। मुझे ज़ोहेब हसन की पोस्ट में एक जानकारी फैक्चुअली गलत लगी। हालांकि मैं सौ प्रतिशत श्योर नहीं हूं कि वो जानकारी गलत ही है। लेकिन फिलहाल तो लग रही है।

ज़ोहेब ने आखिर में लिखा कि जिस वक्त रतन टाटा लंदन में नए हवाई जहाज़ खरीदने आए थे तब उन्हें पता चला कि वो ही एयर इंडिया के मालिक हैं। जबकी मुझे फिलहाल जो पता है उसके हिसाब से तो उस समय एयर इंडिया भारत सरकार की कंपनी थी। एयर इंडिया, जो कभी टाटा एयरलाइन के नाम से जे.आर.डी. टाटा जी ने स्थापित की थी, उसे साल 1953 में भारत सरकार ने अपने अधीन लेकर एयर इंडिया बना दिया था। कुछ ऐसा हो जो मुझे ना पता हो तो कृप्या मुझे अवगत अवश्य कराइएगा।

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Author: sssrknews

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