दुबई: सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। सऊदी अरब ने गुरुवार को आरोप लगाया कि UAE ने यमन के एक अलगाववादी नेता को, जिस पर देशद्रोह का आरोप है, यमन से बाहर निकालकर अबू धाबी पहुंचाया। सऊदी के इस दावे पर UAE की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इस घटनाक्रम के बाद अरब प्रायद्वीप में पड़ोसी देशों के बीच तनाव और गहरा गया है।
सऊदी सेना का बड़ा दावा
सऊदी अरब की सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के नेता ऐदारौस अल-जुबैदी यमन से नौका के जरिए सोमालिया भाग गए थे। सेना के मुताबिक, इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने उन्हें वहां से अबू धाबी ले जाया।
UAE के मेजर जनरल पर मदद का आरोप
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की ने अपने बयान में उस व्यक्ति की पहचान भी उजागर की, जिसने अल-जुबैदी को देश से बाहर निकलने में मदद की थी। इस व्यक्ति को UAE का एक मेजर जनरल बताया गया है। बयान में यह भी दावा किया गया कि इस ऑपरेशन में इस्तेमाल किया गया इल्यूशिन Il-76 विमान पहले इथियोपिया, लीबिया और सोमालिया जैसे संघर्षग्रस्त इलाकों में भी इस्तेमाल किया जा चुका है।
इंटरसेप्ट कॉल्स का दावा
सऊदी अरब के इस बयान को देश के मीडिया में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। सऊदी के स्वामित्व वाले सैटेलाइट चैनल अल अरबिया ने कथित तौर पर इंटरसेप्ट की गई टेलीफोन कॉल्स प्रसारित कीं, जिनमें अल-जुबैदी के भागने की बातचीत होने का दावा किया गया है। वहीं, सऊदी अरब के अंग्रेजी अखबार Arab News ने अल-जुबैदी की तस्वीर को पहले पन्ने पर “Wanted” शीर्षक के साथ प्रकाशित किया।
सरकारी अखबार का तीखा संपादकीय
सरकारी अखबार के फ्रंट पेज पर प्रकाशित संपादकीय में कहा गया कि अल-जुबैदी का सऊदी अरब में प्रवेश से इनकार करना उन्हें “अपने ही देश का गद्दार” साबित करता है। संपादकीय में आरोप लगाया गया कि अल-जुबैदी ने निजी सत्ता की लालसा में विदेशी ताकतों से हाथ मिलाया और दक्षिणी यमन में जबरन अलगाव थोपने की कोशिश की।
यमन युद्ध की भयावह तस्वीर
गौरतलब है कि यमन में जारी युद्ध में अब तक 1.5 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें आम नागरिक और लड़ाके दोनों शामिल हैं। इस संघर्ष ने दुनिया की सबसे गंभीर मानवीय आपदाओं में से एक को जन्म दिया है। हाल के महीनों में हूती विद्रोहियों ने गाजा युद्ध के विरोध में शिपिंग मार्गों पर भी हमले किए हैं, जिससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ा है।
और बिगड़ सकते हैं हालात
विश्लेषकों का मानना है कि यह नया आरोप सऊदी अरब और UAE के बीच रिश्तों में और खटास ला सकता है। दोनों देश न केवल OPEC के सदस्य हैं, बल्कि पड़ोसी भी हैं और आर्थिक व क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर, खासकर लाल सागर क्षेत्र में, एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। यमन संकट दोनों देशों के बीच दशकों में सबसे गंभीर टकराव के रूप में उभर चुका है।






