आप सभी देश बासियों क़ो सीतानवमी (सीताजी के जन्मोत्सव) की हार्दिक शुभकामनायें आशीर्वाद सदा बना रहे…
🌤️ दिनांक – 25 अप्रैल 2026
🌤️ दिन – शनिवार
🌤️ विक्रम संवत 2083
🌤️ शक संवत -1948
🌤️ अयन – उत्तरायण
🌤️ ऋतु – ग्रीष्म ॠतु
🌤️ मास – वैशाख
🌤️ पक्ष – शुक्ल
🌤️ तिथि – नवमी शाम 06:27 तक तत्पश्चात दशमी
🌤️ नक्षत्र – अश्लेशा रात्रि 08:04 तक तत्पश्चात मघा
🌤️ योग – गण्ड रात्रि 11:43 तक तत्पश्चात वृद्धि
🌤️राहुकाल – सुबह 09:25 से सुबह 11:01 तक
🌤️ सूर्योदय – 06:13
🌤️ सूर्यास्त – 07:00
दिशाशूल – पूर्व दिशा मे
सीतानवमी व्रत कथा महत्व आओ जानें :
सीतानवमी, जिसे ‘जानकी जयंती’ भी कहा जाता है, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माता सीता जी के प्राकट्य (जन्म) दिवस के रूप में मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन मिथिला नरेश राजा जनक को हल जोतते समय भूमि से माता सीता कलश में मिली थीं। यह त्यौहार पवित्रता, त्याग, पतिव्रता और नारी शक्ति के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
सीता नवमी मनाने के मुख्य कारण और महत्व :
माता सीता का प्राकट्य पौराणिक कथाओं के अनुसार, वैशाख शुक्ल नवमी को ही माता सीता धरती से प्रकट हुई थीं, इसलिए इस दिन को उनके अवतरण दिवस के रूप में हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
अखंड सौभाग्य का वरदान सुहागन महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और माता सीता तथा भगवान श्रीराम की पूजा करती हैं, जिससे उन्हें अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद मिलता है।
भूमि और प्रकृति की पूजा चूँकि माता सीता भूमि से प्रकट हुई थीं, उन्हें भूमि का स्वरूप माना जाता है। इस दिन पूजा से सुख-समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है।
आदर्शों का सम्मान यह दिन माता सीता के धैर्य, त्याग और धर्मपरायणता को याद करने का अवसर है, जो जीवन की हर कठिनाई से लड़ना सिखाती हैं।




