जोसफ विजय चंद्रशेखर….थालापति विजय सिनेमैटिक नाम..थालापति यानी कमांडर..नेता या सेनापति..अभी ये तमिलनाडु के मुख्यमंत्री है…और उदयनिधि स्टालिन उप मुख्यमंत्री..जो कि पूर्व मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन के पुत्र है…जिन्होंने कई बार सनातन विरोधी बयान दिए है……
तमिलनाडु के मदुरै स्थित तिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित प्राचीन मुरुगन मंदिर के पारंपरिक दीप स्तंभ (दीपथून) पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर दीया जलाने से रोकने का काम M.K.स्टालिन के कार्यकाल में हुआ और कारण इन्होंने पास की किसी धर्म विशेष के स्थान के होने और उनके अनुयायियों की भावना को आहत होना बताया था…और इसमें कांग्रेस सपा या कहें कि पूरे इंडी गठबंधन ने इनका समर्थन किया था..अगर दीपक जलने से धर्म विशेष की भावनाएं आहत हो रही थी…तो क्या प्राचीन समय से चली आ रही दीपथून की परंपरा को रोकने से सनातन धर्म के अनुयायियों की भावनाएं आहत नहीं हुई????? या हर बार इन्होंने ठेका ले रखा है कि सनातन परम्पराओं पर ही रोक लगानी है…और मजे की बात ये भी है कि 87% प्रतिशत हिन्दू आबादी वाले राज्य में ये सब हो रहा है….और हिन्दू मूक दर्शक बना हुआ है….या फिर ये कहे कि सेक्युलरिज्म की अफीम चाट रखी है..या फिर कुछ और है…
आज इसी का परिणाम है कि सांप्रदायिक सौहाद्र के पक्षधर थालापति विजय या जोसफ चंदशेखर विजय की सरकार के गठन के बाद राज्यसभा में उदयनिधि स्टालिन का बयान की सनातन धर्म को समाप्त कर देना चाहिए… क्योंकि ये धर्म लोगों को बांटता है????विजय की मां तो स्वयं हिन्दू है और पिता ईसाई तो उनसे बेहतर कौन जानता है कि कौन धर्म बांटने की बात करता है और कौन जोड़ने की…. इस बयान पर विजय का मौन उचित नहीं लगता…..
सनातन धर्म एक ऐसा धर्म है जो कभी ये नहीं कहता कि तुम अपना धर्म छोड़ दो…लेकिन मुस्लिम और ईसाई धर्म दोनों का ही ये कहना की निकाह या चर्च में विवाह उक्त धर्म को अपनाने के बाद ही विवाह सत्यापित होगा..हिंदू धर्म आप स्वेच्छा से स्वीकार कीजिए….कोई दबाव नहीं होता…लेकिन यदि आप मन और आत्मा से तैयार है तो आपका स्वागत है…यहां कोई अन्य धर्म का व्यक्ति किसी अन्य धर्म के नाम और प्रतीक चिन्हों को पहनकर किसी की बेटी को फंसाता नहीं है…आमीर से अमित बनकर कलावा पहनकर…..
जोसफ चंद्रशेखर विजय को उदयनिधि के बयान से आपत्ति क्यों नहीं हुई??? या उन्होंने इसका खंडन क्यों नहीं किया…जब बीजेपी ने हिन्दुधर्म के अनुरूप जय श्री राम का नारा लगाया तो लोगों की भावनाएं आहत होने लगी..तुरंत देश असुरक्षित हो गया..लेकिन थालापति विजय चुनाव के बाद यीशु मसीह का फोटो लेकर घूमते दिखाई दिए…तब न भावनाएं आहत हुईं न ही देश असुरक्षित हुआ…चुनाव जीतने के बाद इनके दूसरे हाथ में प्रभु श्री राम की भी फोटो होनी चाहिए थी और हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं का भी सामान रूप से सम्मान करना चाहिए था…हुआ क्या??यही तो जोसेफ चंद्रशेखर विजय की नीति थी???अचानक चुनाव जीतने के बाद प्राथमिकताएं बदल क्यों गई???? या सिर्फ वो चुनावी जुमले थे विजय के लिए….क्योंकि विपक्ष की नजर में जुमले तो कोई और देता है…फिर ये क्या है????
प्राचीन शिव मंदिर को तोड़ कर विद्यालय बनाने से विजय को कोई आपत्ति नहीं है….लेकिन क्या चर्च को तोड़ कर भी एक विद्यालय के निर्माण को मंजूरी मिलेगी?? शायद नहीं!!!!यही दोगला व्यवहार मुझे व्यक्तिगत तौर से पसंद नहीं…,क्योंकि जब तुम खुद को जात पात धर्म से ऊपर बताते हो तो सत्ता हाथ में आते ही शक्ल बदल क्यों जाती है….
थालापति विजय शायद उनका सेनापति है…उदय निधि के बयान पर चुप्पी साधकर..प्राचीन शिव मंदिर को तोड़ विद्यालय बनाने का आदेश देकर…और चुनाव के बाद धार्मिक समरसता की बात को ताख पर रखकर ईसाई धर्म को प्राथमिकता देकर…उन्होंने अपनी मंशा साफ जाहिर कर दी है… कि वो क्या चाहते है…अब वहां के 87% प्रतिशत हिंदुओं को 5 साल तक उन सारी बातों पर मौन धारण करना होगा…जो उनके हित का नहीं होगा शायद..क्या होगा क्या नहीं ये तो आने वाला समय बताएगा…फिलहाल तो देखना है कि पेरियार की विचारधारा के समर्थक ईसाई धर्म के अनुयायि थालापति जोसफ चंद्रशेखर विजय की अग्रिम कार्यशैली क्या होती है…लेकिन आने वाले समय में हिन्दू विरोधी निर्णय सनातन विरोधी कोई नियम आ जाए तो आश्चर्य वाली बात नहीं होगी….तमिलनाडु की जनता ने जो चुना है वहीं उनको मिलेगा…..
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हर हर महादेव🚩🚩🚩🚩🚩🔱🔱🔱🔱🚩
साभार : तनु प्रियंका सिंह जी






