कोलकाता में घूमते हुए भूख लगी तो हमने टैक्सी चालक से कहा कि भाई ऐसी जगह ले जाओ जहां नानवेज ना बनता हो। यहां ऐसी जगह मिलनी मुश्किल है। मैंने कहा कि यहां हल्दीराम वगैरह हो तो वहां ले चलो। उसने कहा कि पार्क स्ट्रीट में हल्दीराम है। वहां पहुंचे तो देखा कि हल्दीराम का लोगो व अंदर का काउंटर व बुकिंग सिस्टम उत्तर भारत व दिल्ली के हल्दीराम से बिल्कुल अलग। लेकिन खाना व अंदर रखे उत्पाद सब कुछ वैसे ही और शुद्ध शाकाहारी।
पता चला कि ये एक ही फैमिली के हैं लेकिन देश में तीन हिस्सों में बंटे हैं। पूरी कहानी कुछ इस तरह हैः-
👉🏾 हल्दीराम की नींव 1937 में राजस्थान के बीकानेर में गंगाबिशन अग्रवाल (जिन्हें प्यार से ‘हल्दीराम’ बुलाया जाता था) ने एक छोटी सी नमकीन की दुकान से रखी थी। उनकी बीकानेरी भुजिया इतनी मशहूर हुई कि व्यापार तेजी से बढ़ा। समय के साथ, व्यापार का विस्तार हुआ और परिवार के बड़े होने पर इसे भौगोलिक आधार पर गंगाबिशन जी के पोतों के बीच बांट दिया गया।आज हल्दीराम मुख्य रूप से तीन अलग-अलग पारिवारिक धड़ों (factions) में बंटा हुआ है, जिनका एक-दूसरे के व्यापार में कोई दखल नहीं है:
🏨उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में आप जो हल्दीराम देखते हैं (जो देश में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है), वह मुख्य रूप से इसी कंपनी का है। इसका संचालन मनोहर लाल अग्रवाल और उनका परिवार करता है।
महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के हिस्सों में व्यापार का संचालन शिवकिशन अग्रवाल और उनका परिवार करता है।
कोलकाता (पूर्वी भारत – Haldiram Bhujiawala): कोलकाता और पूर्वी भारत का व्यापार प्रभु शंकर अग्रवाल के परिवार के पास गया।
कोलकाता का हल्दीराम दिल्ली वाले हल्दीराम से कानूनी और व्यावसायिक रूप से बिल्कुल अलग है। ‘हल्दीराम’ नाम के इस्तेमाल को लेकर इन पारिवारिक धड़ों (खासकर दिल्ली और कोलकाता) के बीच दशकों तक लंबी कानूनी लड़ाई चली।
कानूनी विवादों के कारण और अपनी एक अलग पहचान बनाने के लिए, कोलकाता वाले धड़े ने अपने उत्पादों को ‘प्रभुजी’ (Prabhuji – From the house of Haldiram’s) ब्रांड नाम के तहत प्रमोट करना शुरू कर दिया।ये सब कोलकाता में ही बनते हैं प्रतीक फूड्स के बैनर मेंं। यहां रखे डिब्बों पर मैंने ये सब विवरण पाया। दोनों की मैनेजमेंट, फैक्ट्रियां और रेसिपी बिल्कुल अलग हैं, इसलिए कोलकाता के हल्दीराम आउटलेट्स का लोगो, पैकेजिंग, मिठाइयों का स्वाद और रेस्टोरेंट का डिज़ाइन उत्तर भारत के हल्दीराम से पूरी तरह भिन्न है।




