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इमरजेंसी के विरोधी का सफर: नागपुर का 5 साल का बच्चा बन मुख्यमंत्री

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नागपुर के इंदिरा कौन्वेंट स्कूल में पढ़ने वाला 5 साल का बच्चा जब उस दिन घर लौटा तो उसने देखा कि उसके पिता जी को पुलिस पकड़ कर ले जा रही है। वह रोने लगा। उसके पिता जी तो विधायक हैं फिर पुलिस ने क्यों पकड़ लिया है?
रात में मां ने बताया कि चूंकि उसके पिता जी ने इमरजेंसी का विरोध किया है इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया है। बच्चे ने बालसुलभ उत्सुकता में पूछा कि इमरजेंसी क्या है और किसने लगाया है?
मां ने बताया इमर्जेंसी का मतलब है तुम्हारे बोलने सोचने पर पाबन्दी और इंदिरा गांधी ने इसे लगाया है

दूसरी सुबह उस बच्चे ने स्कूल जाने से इंकार कर दिया।
उसने कहा कि जिस इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई है उसके नाम वाले स्कूल में मैं नहीं पढूंगा।
और इस तरह उस बच्चे ने इंदिरा कौन्वेंट स्कूल छोड़ कर सरस्वती विद्या मंदिर में एडमिशन लिया और बाकी की पढ़ाई वहीं से की।
फिर ला कालेज में दाखिला लिया बाद में बर्लिन जर्मनी से एम बी ए किया।
22 साल की उम्र में नागपुर का मेयर बना
27 साल की उम्र में महाराष्ट्र भाजपा का अध्यक्ष
और 44 साल की उम्र में महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री
जी हां हम देवेन्द्र फडनवीस की बात कर रहे हैं जिसने लोकसभा विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनाव में कमल खिला कर यह साबित कर दिया है कि देवा भाऊ का कोई जबाब नहीं है।
एक साथ शरद पवार और ठाकरे परिवार का वर्चस्व खतम करने वाले देवेन्द्र फडनवीस का अभिनंदन।
ये अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा है।

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Author: sssrknews

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