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हूतियों पर हमले की तैयारी के बाद पीछे हटे ट्रंप, सऊदी अरब को लेकर क्यों बदला प्लान?

हूतियों के खिलाफ हमले से आखिरी वक्त में पीछे हटे ट्रंप? सऊदी अरब की अपील के बाद भी अमेरिका ने क्यों बनाई दूरी

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। हूती लड़ाकों ने यमन के पश्चिमी तट पर तेजी से बढ़त बनाई है और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास रणनीतिक इलाकों पर नियंत्रण मजबूत किया है। इसके साथ ही सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमलों तथा उसके ऊर्जा ढांचे और समुद्री व्यापार को निशाना बनाए जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

इस बीच सबसे बड़ा सवाल अमेरिका के रुख को लेकर है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया गया था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से हूतियों के खिलाफ कार्रवाई का आग्रह किया था। हालांकि, ट्रंप ने अंततः सीधे अमेरिकी हमले का फैसला नहीं किया।

हूतियों पर हमले की तैयारी के बाद बदला फैसला?

रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने हूतियों के खिलाफ संभावित हवाई हमले के विकल्प पर विचार किया था और सैन्य लक्ष्यों की पहचान भी की गई थी। बाद में ट्रंप ने कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया। रॉयटर्स के अनुसार, सऊदी अरब अमेरिकी समर्थन की मांग कर रहा है, लेकिन वॉशिंगटन फिलहाल प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप से बच रहा है।

इससे पहले 11 सितंबर को अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि प्रशासन की तत्काल हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य हमले की योजना नहीं है। हालांकि, अमेरिका सऊदी अरब को खुफिया जानकारी और टारगेटिंग संबंधी सहायता उपलब्ध करा रहा था। अधिकारियों ने यह भी कहा था कि परिस्थितियां बदलने पर अमेरिकी नीति में बदलाव हो सकता है।

अमेरिका सीधे युद्ध में क्यों नहीं उतर रहा?

अमेरिका के इस रुख के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। एक प्रमुख कारण यह है कि वॉशिंगटन पहले से ही ईरान के साथ जारी संघर्ष में सैन्य संसाधनों और रणनीतिक प्राथमिकताओं को संभाल रहा है। ऐसे में यमन में हूतियों के खिलाफ नया मोर्चा खोलने से क्षेत्रीय संघर्ष के और फैलने का जोखिम बढ़ सकता है।

इसके अलावा, अमेरिका और हूतियों के बीच ओमान की मध्यस्थता से संपर्क भी हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक, हूतियों ने अमेरिका को आश्वासन दिया है कि वे अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। इसके बाद वॉशिंगटन ने सऊदी अरब को समर्थन देने के बावजूद सीधे सैन्य कार्रवाई से दूरी बनाए रखी है।

बाब अल-मंदेब पर हूतियों की बढ़त से बढ़ी चिंता

हूतियों की हालिया सैन्य बढ़त ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग लाल सागर के जरिए वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है। हूतियों ने मोखा बंदरगाह और आसपास के रणनीतिक इलाकों पर कब्जा कर अपनी स्थिति मजबूत की है।

सऊदी अरब के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि क्षेत्रीय संघर्ष के कारण उसके तेल निर्यात के वैकल्पिक समुद्री मार्गों पर दबाव बढ़ रहा है। रॉयटर्स के अनुसार, हूतियों की बढ़त से सऊदी तेल निर्यात और लाल सागर के समुद्री मार्गों को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।

सऊदी अरब को अमेरिका की मदद, लेकिन सीधे हमले से दूरी

अमेरिका ने सऊदी अरब को पूरी तरह अकेला नहीं छोड़ा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, वॉशिंगटन खुफिया और टारगेटिंग सहायता उपलब्ध करा रहा है और दोनों देशों के बीच सैन्य समन्वय जारी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने भी सऊदी अधिकारियों के साथ बातचीत की है।

हालांकि, अभी तक अमेरिका ने हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य अभियान में शामिल होने का फैसला नहीं किया है। राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया रुख से संकेत मिलता है कि उनका प्रशासन यमन में एक और बड़े सैन्य मोर्चे में सीधे उतरने से पहले क्षेत्रीय तनाव और संभावित व्यापक संघर्ष के जोखिम को तौल रहा है।

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