मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने इस वर्ष गेहूं उपार्जन में नया रिकॉर्ड कायम किया है। प्रदेश में निर्धारित 100 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीदी की गई है। पहले प्रदेश को 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य मिला था, लेकिन मुख्यमंत्री मोहन यादव के प्रयासों के बाद केंद्र सरकार ने इसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से गेहूं खरीदी कर मध्यप्रदेश ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। वहीं कुल गेहूं उपार्जन के मामले में प्रदेश पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।
10 वर्षों में सबसे ज्यादा खरीदी
कोविड काल को छोड़ दें तो पिछले 10 वर्षों में इस बार समर्थन मूल्य पर सबसे अधिक गेहूं खरीदा गया है। सरकार ने सबसे पहले लघु एवं सीमांत किसानों से खरीदी सुनिश्चित की। प्रदेश के 8 लाख 9 हजार 990 छोटे एवं सीमांत किसानों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा गेहूं खरीदा गया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं कई खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और किसानों को दी जा रही सुविधाओं का जायजा लिया। साथ ही किसानों से सीधे संवाद कर भुगतान और खरीदी प्रक्रिया की जानकारी भी ली। किसानों के हित में सरकार ने स्लॉट बुक कराने वाले किसानों के लिए गेहूं खरीदी की अंतिम तिथि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई कर दी थी।
किसानों को 23 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा भुगतान
सरकार द्वारा अब तक किसानों को 23,708.13 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। खरीदे गए गेहूं में से 96 लाख 52 हजार 957 मीट्रिक टन का परिवहन भी पूरा हो चुका है, जो कुल उपार्जन का लगभग 93 प्रतिशत है।
प्रदेश में किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस जोड़कर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा गया।
किस संभाग में कितना हुआ उपार्जन
प्रदेश के विभिन्न संभागों में गेहूं उपार्जन के आंकड़े इस प्रकार रहे—
- भोपाल संभाग — 28.47 लाख मीट्रिक टन
- उज्जैन संभाग — 22.84 लाख मीट्रिक टन
- जबलपुर संभाग — 12.73 लाख मीट्रिक टन
- नर्मदापुरम संभाग — 9.22 लाख मीट्रिक टन
- इंदौर संभाग — 8.62 लाख मीट्रिक टन
- सागर संभाग — 8.56 लाख मीट्रिक टन
- रीवा संभाग — 6.15 लाख मीट्रिक टन
- ग्वालियर संभाग — 4.36 लाख मीट्रिक टन
- चंबल संभाग — 2.40 लाख मीट्रिक टन
- शहडोल संभाग — 70 हजार मीट्रिक टन से अधिक
किसानों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम
सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए कई विशेष व्यवस्थाएं कीं। तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई और जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाने का अधिकार जिलों को दिया गया। तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक और भुगतान संबंधी कार्यों का समय रात 12 बजे तक किया गया।
इसके अलावा खरीदी सप्ताह में 6 दिन तक जारी रखी गई। केंद्रों पर पीने का पानी, छायादार बैठने की व्यवस्था, साफ-सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। समय पर तौल सुनिश्चित करने के लिए बारदाना, तौल कांटे, हम्माल, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, पंखे और छन्ने जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गईं।



