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“जहाँ एक घर नहीं, पूरा गांव मेहमाननवाज़ है — आरण्यम, उत्तराखंड”

उत्तराखंड का वो अनोखा गांव जहाँ 114 साल पुराने घर में पूरा गांव मिलकर होमस्टे चलाता है ❤️

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के दिहोली गांव में एक 114 साल पुराना पारंपरिक कुमाऊंनी घर आज ‘आरण्यम (Aaranyam) होमस्टे’ के नाम से नई पहचान बना चुका है।
यह कोई आम होमस्टे नहीं, बल्कि पूरे गांव की साझी पहल है।

इस होमस्टे की सबसे खास बात है —
???? नो सीमेंट, नो प्लास्टिक
???? सिर्फ मिट्टी, पत्थर और लकड़ी
???? शुद्ध कुमाऊंनी वास्तुकला और संस्कृति

यह पहल शुरू की गांव के युवा लेखक कुमार शिवम ने।
लॉकडाउन के दौरान जब वह गांव लौटे, तो उन्होंने खाली होते घर और बेरोजगार होते लोगों को देखा।
इसके बाद उन्होंने अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर गांववालों के साथ मिलकर आरण्यम की शुरुआत की।

यहां आने वाले टूरिस्ट का स्वागत पूरा गांव मिलकर करता है —
???? कोई खाना बनाता है
???? कोई लोककथाएं सुनाता है
???? कोई अपनी कला दिखाता है

होमस्टे में परोसा जाने वाला खाना पूरी तरह जैविक होता है।
यहां Wi-Fi नहीं है, ताकि लोग सच में प्रकृति से जुड़ सकें।
पानी भी पुरानी पारंपरिक तकनीक से गर्म किया जाता है।

आरण्यम सिर्फ एक होमस्टे नहीं, बल्कि
???? गांव की विरासत
???? लोगों की रोज़ी-रोटी
???? और संस्कृति को जिंदा रखने की कोशिश है।

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Author: sssrknews

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