#किस्मत कह लीजिए, या राजनीतिक सूझ-बूझ, या फिर बाबा #गोरखनाथ का आशीर्वाद —
जो भी योगी जी के सामने उनका #प्रतिद्वंदी बना,
उसका राजनीतिक प्रभाव समय के साथ सीमित होता चला गया।
कुछ लोग इसे संयोग कहते हैं,
कुछ इसे रणनीति मानते हैं,
और कुछ इसे संत-सत्ता के अद्भुत मेल का परिणाम।
पर इतना तो तय है —
योगी आदित्यनाथ के सामने खड़े होकर राजनीति करना आसान नहीं रहा।
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(1) #शिव_प्रताप_शुक्ला ????
साल 2002।
तत्कालीन मुख्यमंत्री थे राजनाथ सिंह जी।
गोरखपुर सदर से BJP के दिग्गज नेता,
लगातार 4 बार विधायक,
कैबिनेट मंत्री — शिव प्रताप शुक्ला।
पूरा संगठन उनके साथ था।
लेकिन योगी जी ने
अखिल भारतीय हिंदू महासभा से
राधा मोहन दास अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया।
परिणाम चौंकाने वाला रहा —
???? राधा मोहन दास अग्रवाल विजयी
???? शिव प्रताप शुक्ला तीसरे स्थान पर
इस चुनाव के बाद
शिव प्रताप शुक्ला जी लगभग 15 वर्षों तक संगठनात्मक राजनीति तक ही सीमित रहे।
बाद में राज्यसभा और फिर राज्यपाल बनाकर
उन्हें सम्मान अवश्य मिला,
लेकिन सक्रिय राजनीति में उनकी भूमिका पहले जैसी नहीं रही।
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(2) #मनोज_सिन्हा ????
2017 में UP में BJP की ऐतिहासिक जीत के बाद
मुख्यमंत्री पद के लिए
जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा थी,
वो था — मनोज सिन्हा।
यहाँ तक कहा गया कि
बनारस में उन्हें
CM स्तर का प्रोटोकॉल तक मिलने लगा था।
लेकिन राजनीति परिस्थितियों से चलती है।
2019 लोकसभा चुनाव में
मनोज सिन्हा चुनाव हार गए।
बाद में LG बनकर
एक तरह से सक्रिय राजनीति से सम्मानजनक दूरी बन गई।
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(3) #उपेंद्र_दत्त_शुक्ला ????
2018 गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में
योगी जी के विरोधी गुट ने
शिव प्रताप शुक्ला के करीबी
उपेंद्र दत्त शुक्ला को टिकट दिलाया।
नतीजा वही रहा —
???? चुनाव में पराजय
???? और राजनीतिक प्रभाव सीमित हो गया।
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(4) #AK_शर्मा ????
मोदी और अमित शाह जी के
सबसे भरोसेमंद ब्यूरोक्रेट्स में गिने जाने वाले
AK शर्मा।
2021 में गुजरात से समय से पहले VRS लेकर
UP की राजनीति में प्रवेश।
चर्चा थी कि
CM या Dy CM बनाए जाएंगे।
लेकिन हकीकत में —
???? BJP प्रदेश उपाध्यक्ष (जहाँ पहले से 17 लोग थे)
???? बाद में किसी तरह MLC
???? वर्तमान में कैबिनेट मंत्री
जिस स्तर की उम्मीदें थीं,
उस अनुपात में उनका राजनीतिक प्रभाव
उतना सशक्त बनता नहीं दिखा,
और भविष्य को लेकर चर्चाएँ बनी हुई हैं।
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(5) #केशव_प्रसाद_मौर्य ????
2017 में UP BJP की जीत के बाद
मुख्यमंत्री पद के लिए
सबसे ज्यादा चर्चा
केशव प्रसाद मौर्य जी के नाम की थी।
प्रदेश अध्यक्ष भी थे,
लेकिन CM बने — योगी आदित्यनाथ
और केशव जी को Dy CM से संतोष करना पड़ा।
2018 में
योगी जी के खिलाफ
BJP के लगभग 200 विधायक धरने पर बैठे —
यह भी सबने देखा।
फिर आया 2022 का चुनाव —
???? केशव मौर्य अपनी सीट हार गए
???? फिर भी Dy CM बने
???? मंत्रालय सीमित कर दिया गया
आज स्थिति यह है कि
राजनीतिक प्रभाव से अधिक
PR के जरिए सक्रियता दिखाई देती है।
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(6) #पंकज_चौधरी ????
UP में जब-जब CM परिवर्तन की चर्चा हुई,
अंदरखाने
पंकज चौधरी का नाम तेजी से उभरा।
दो बार
4 लाख से अधिक वोटों से जीत दर्ज की।
लेकिन इस बार —
???? जीत का अंतर घटकर
???? सिर्फ 30 हजार वोट रह गया।
राजनीति संकेतों से चलती है,
और संकेत बहुत कुछ कह जाते हैं।
—
???? निष्कर्ष
यह डर की राजनीति नहीं है,
यह अपमान की राजनीति नहीं है।
यह उस नेतृत्व की कहानी है
जो धर्म, राष्ट्र और निर्णय को
सत्ता से ऊपर रखता है।
???? योगी आदित्यनाथ
के सामने जो भी
सत्ता की महत्वाकांक्षा लेकर खड़ा हुआ,
राजनीतिक परिस्थितियाँ उसके लिए
अलग दिशा में जाती दिखाई दीं।
क्योंकि
योगी जी सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं,
एक विचार, एक संकल्प और एक युग का नाम हैं।
????️
जय बाबा गोरखनाथ
जय योगी
जय हिंद ????????
अगर ये पोस्ट
आपके दिल में हलचल पैदा न करे,
तो राजनीति को समझना अभी बाकी है।
साभार: भाई शरद राय जी की वाल से






