हनुमान रचित रामायण, जिसे ‘हनुमद रामायण’ के नाम से जाना जाता है,
पवनपुत्र हनुमान द्वारा हिमालय पर तपस्या के दौरान पत्थरों की शिलाओं पर अपने नाखूनों से लिखी गई थी।
मान्यता है कि यह वाल्मीकि रामायण से भी अधिक दिव्य और विस्तृत थी, जिसे वाल्मीकि जी के सम्मान में हनुमान जी ने समुद्र में विसर्जित कर दिया था।
हनुमद रामायण से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें :-
रचना का स्थान: लंका विजय के बाद, हनुमान जी हिमालय पर एकांतवास में शिव की आराधना करते हुए प्रतिदिन शिलाओं पर रामायण लिखते थे।
अनोखी रचना :-
उन्होंने अपनी वज्र के समान नाखूनों (वज्रनख) से पर्वत की शिलाओं पर यह काव्य लिखा था।
वाल्मीकि से भेंट :-
जब महर्षि वाल्मीकि ने हनुमान जी की रामायण देखी, तो वे दुखी हो गए क्योंकि वह रचना अत्यंत अद्भुत थी।
समुद्र में समर्पण :-
हनुमान जी ने वाल्मीकि जी के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए अपने द्वारा रचित रामायण की शिलाओं को समुद्र में विसर्जित कर दिया।
कथा का उद्देश्य :-
यह रामायण राम कथा के प्रति हनुमान जी की अटूट भक्ति और प्रेम की अनकही अभिव्यक्ति मानी जाती है, जिसमें लंका विजय के बाद की घटनाओं का भी वर्णन था।
लोक कथाओं के अनुसार, आज उपलब्ध
‘हनुमद रामायण’ उस मूल ग्रंथ का केवल एक छोटा सा अंश हो सकता है या यह पूरी तरह से लुप्त मानी जाती है।
क्या सच में Hanuman Ji ने अपनी लिखी हुई रामायण समुद्र में फेंक दी थी? 😳
और इसकी वजह जानकर आप भी भावुक हो जाएंगे…
ये कहानी हमें सिखाती है कि असली महानता अपने नाम में नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण में होती है ❤️🚩
जय श्रीराम 🙏
जय बजरंग बली 🚩






