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दिल्ली के टोल प्लाज़ा अस्थायी रूप से बंद होंगे? प्रदूषण पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते में निर्णय के दिए संकेत

दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को तीन-सदस्यीय पीठ ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने गुरुग्राम रोड पर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम का जिक्र करते हुए कहा कि जाम की वजह से लोग सामाजिक कार्यक्रमों में तक शामिल नहीं हो पाते। इस दौरान कोर्ट ने दिल्ली के 9 टोल प्लाज़ा को अस्थायी रूप से निलंबित करने की संभावना पर विचार करने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एमसीडी से कहा है कि वह इन टोल प्लाज़ा को अस्थायी अवधि के लिए बंद करने पर गंभीरता से विचार करे।

एक सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश

अदालत ने स्पष्ट किया कि दिल्ली के 9 टोल प्लाज़ा को अस्थायी तौर पर बंद करने को लेकर एक सप्ताह के भीतर फैसला लिया जाए और उसे रिकॉर्ड पर रखा जाए। कोर्ट ने कहा कि टोल प्लाज़ा पर वाहनों की लंबी कतारों के कारण प्रदूषण और उत्सर्जन बढ़ता है, ऐसे में यह कदम जनहित में हो सकता है।

स्कूल बंद करने के मुद्दे पर भी चर्चा

सुनवाई के दौरान दिल्ली में स्कूलों को बंद करने के फैसले पर भी बहस हुई। वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने बताया कि कक्षा 5 तक के स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जिससे मिड-डे मील योजना भी प्रभावित हो रही है। इस पर CJI ने कहा कि यदि मिड-डे मील जारी रहा, तो लोग बच्चों को जबरन स्कूल भेजने लगेंगे, जबकि स्कूल बंद हैं।

CJI सूर्यकांत ने कहा कि ये सभी फैसले अस्थायी हैं और नीति से जुड़े विषय हैं। स्कूल बंद करने को लेकर विरोधाभासी दावे सामने आ रहे हैं, इसलिए ऐसे निर्णय नीति-निर्माताओं पर ही छोड़े जाने चाहिए। गुरुस्वामी ने सवाल उठाया कि बच्चों को घर पर रखकर उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। इस पर CJI ने कहा कि अदालत से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह यह तय करे कि स्कूल जाना या वहां से लौटना जोखिम भरा है या नहीं।

एएसजी भाटी ने कहा कि कक्षा 1 से 5 तक के लिए हाइब्रिड विकल्प पर विचार किया जा रहा है। CJI ने यह भी सवाल उठाया कि यदि कुछ अभिभावक बच्चों को स्कूल छोड़ने जाते हैं, तो क्या उसमें भी जोखिम नहीं है।

दीर्घकालिक समाधान पर ज़ोर

सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि हाइब्रिड विकल्प उन्हीं अभिभावकों के लिए होगा, जिनके पास इसकी क्षमता है। इस पर CJI ने कहा कि समस्या का स्थायी समाधान निकालने और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक उपायों पर विचार करना ज़रूरी है, क्योंकि छोटे बच्चे, बुज़ुर्ग और आम नागरिक सभी एक ही समस्या से जूझ रहे हैं।

बच्चों की जान खतरे में: एएसजी

एएसजी ने कोर्ट को बताया कि रविवार से गंभीर आपात स्थिति बनी हुई है और बच्चों की जान खतरे में है। सड़कों पर भीड़ कम करने के प्रयास किए गए हैं। इस पर CJI ने कहा कि अब केवल यही उम्मीद की जा सकती है कि छुट्टियों के बाद प्रदूषण के स्तर में कमी आए। गुरुस्वामी ने तर्क दिया कि गरीब परिवारों के बच्चे प्रदूषण में योगदान नहीं देते, वे पैदल स्कूल जाते हैं।

मजदूरों को समय पर भुगतान पर टिप्पणी

एएसजी ने बताया कि 2.5 लाख मजदूरों का पंजीकरण किया गया है और 35 हजार का सत्यापन हो चुका है, जिन्हें सीधे बैंक खातों में पैसा भेजा जाएगा। इस पर CJI ने कहा कि मजदूरों को समय पर भुगतान मिलना ही सबसे ज़रूरी है। एएसजी भाटी ने बताया कि आधार-सीडेड खातों में राशि भेजी जा रही है और बाकी के लिए भी व्यवस्था की जा रही है।

प्रदूषण के दौरान टोल वसूली पर सख्त रुख

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगले साल से 1 अक्टूबर से 31 जनवरी तक टोल वसूली न करने की ठोस योजना पर विचार किया जाए। CJI ने टिप्पणी की कि इतने प्रदूषण के बीच टोल से आय अर्जित करना उचित नहीं है। इस मामले में कोर्ट ने नोटिस जारी करने का निर्देश दिया, जिसे एनएचएआई की ओर से वरिष्ठ वकील ने स्वीकार किया।

टोल बूथ शिफ्ट करने का सुझाव

कोर्ट ने एनएचएआई से यह भी कहा कि वह दिल्ली में मौजूद एमसीडी के 9 टोल बूथों को अन्य स्थानों पर शिफ्ट करने की संभावना पर विचार करे, जहां एनएचएआई के कर्मचारी तैनात किए जा सकें। टोल से मिलने वाली आय का एक हिस्सा एमसीडी को देने का सुझाव भी दिया गया, ताकि अस्थायी नुकसान की भरपाई हो सके। CJI ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाज़ा 5-10 किलोमीटर के बजाय 50 किलोमीटर के अंतर पर बनाए जा सकते हैं, जिससे ट्रैफिक डायवर्जन संभव हो सके।

स्कूल बंद करने के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल बंद करने के मुद्दे पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। सीएक्यूएम को अक्टूबर से जनवरी के बीच टोल हटाने की मांग पर नोटिस जारी किया गया है। CJI ने कहा कि नर्सरी से कक्षा 5 तक के स्कूल अस्थायी रूप से बंद हैं और शीतकालीन अवकाश भी जल्द शुरू होने वाला है, इसलिए इस मामले में न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

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Author: sssrknews

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