अपनी सुरक्षा कायरता नही, जरुरत है :
एक बार अन्त तक पढ़िए,
विचार कीजिए
आपने अपने सुरक्षा का क्या प्रबन्ध किया है…???
हमारे देखते-देखते ही आस पास में उनकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रहीं है
“”पश्चिम बंगाल से व्यापार करते और वहां के व्यापारी वर्ग से जुड़े करीबन एक दशक से अधिक हो चला है।।
कोलकाता से करीबन 40 किलोमीटर दूर एक देहाती एरिया में हमारे एक व्यापारी बंधु का गोडाउन था।
उस गोडाउन से हमारा माल लोड होता था।
माल लोड करने के लिए ठेके पर लेबर आती थी और उनका एक ठेकेदार था।
मैं सुबह नाश्ता कर के टैक्सी बोर्ड कर गोडाउन पर पहुंच जाती थी।।
हर रोज वही लेबर और वही ठेकेदार मौजूद मिलते थे।
ठेकेदार अधेड़ उम्र का आदमी था।
बातचीत हुई और उससे अच्छी राम राम हो गई।
एक रोज माल लोड हो गया और मैं वापिस जाने के लिए टैक्सी में बैठ गयी। टैक्सी चालक ने सेल्फ लगाया पर गाड़ी स्टार्ट न हुई। बोनट खोला …..जांच पड़ताल की लेकिन कुछ समझ में ना आया।, ना…
मैने अपने व्यापारी मित्र से बात की तो उन्होंने कहा कि देर शाम उस इलाके में रुकना ठीक नहीं है……या कहें कि सेफ नहीं है। गांव से हाइवे करीबन 10 किलोमीटर की दूरी पर है। आपको हाइवे तक ड्रॉप कर देते हैं और हाइवे से आपको वापिस कोलकाता आने तक टैक्सी आसानी से मिल जाएगी।।
मैने व्यापारी भाई की बात मानते हूये ठेकेदार को कहा कि मुझे हाइवे तक ड्रॉप कर दे।
शाम ढल चुकी थी।
ठेकेदार ने बाइक निकाली और बोला ……”मेंम बगल में ही मेरा घर है। पहले घर चलेंगे फिर आपको हाइवे छोड़ दूंगा।”
मैने हामी भर दी।
वह घर गया। घर के बाहर बाइक लगाई। मुझसे पूछा चाय पियेंगे।
मैने कहा किसी और दिन पियेंगे आज लेट हो रहे हैं।।
उसने लुंगी और कमीज पहन रखी थी।।
वह घर के अन्दर गया …….बाहर आया तो उसने लुंगी में कट्टा ( देसी कट्टा यानी देसी रिवॉल्वर) दबा रखा था।
………..और इस तरह से दबा रखा था कि कमीज लुंगी के अंदर फंसा रखी थी ताकि कट्टा दिख सके।
यानी वह कट्टा दिखाना चाह रहा था।
मुझे सार्वजनिक मंच पर यह स्वीकार करने में लेश मात्र भी संकोच नहीं है कि उसे देख कर मेरी हल्की ** रही थी। मैं घबरा गई थी।
……….और मजे की बात थी घबराहट उसने मेरे चेहरे पर देख ली थी। वह मुस्कुराया और बोला……”मेंम। बचाव के लिए है।”
बचाव के लिए है……अरे कैसा बचाव। रास्ते में क्या पाकिस्तानी आर्मी अटैक कर देगी जो बचाव करना है?
खैर ……मैं फ़* में बाइक पर बैठ गयी और मानसिक रूप से तैयार होने लगा कि किसी भी समय यह आदमी मेरी कनपटी पर कट्टा सटा सकता है
वह खेत खलियान के रास्ते हाइवे की ओर बढ़ने लगा। कुछ समय बाद एक मंदिर दिखाई दिया। उने हल्की सी ब्रेक लगाई और बोला ” मां दुर्गा का मंदिर है। हमारे यहां इस मंदिर की बहुत श्रद्धा है।।”
मंदिर के बाहर से उने नमस्कार किया …..संभवतः बंगाली में कुछ श्लोक पढ़े और आगे बढ़ गया।
अगले पांच मिनट में हम हाईवे पर थे।
मैने उसे धन्यवाद कहा…..उसे जाने को कहा।
उसने कहा कि वह तब तक खड़ा रहेगा जब तक मुझे सवारी नहीं मिल जाती। कुछ समय पश्चात एक टैक्सी वहां रुकी।
उने टैक्सी चालक से होटल ड्रॉप करने को कहा ….. किराया तय किया और मैं टैक्सी में बैठ गयी।
अगली सुबह मैं पुनः गोडाउन पर पहुंची।
ठेकदार वहीं खड़ा था …….”मुस्कुराते हुए बोला ……आज तो चाय पियेंगे।”
जीवन में अक्सर ऐसा होता है हम किसी इंसान को गलत समझ लेते हैं।
मैं मन में ग्लानि भाव से भर गयी थी और ग्लानि को दूर करने का एक मात्र तरीका मुझे समझ आया और मैंने उससे कहा कि आज चाय आपके साथ पियेंगे और आपके घर पियेंगे।।
वह हतप्रभ रह गया।
हम बंधु के घर गए।
दो कमरों में सिमटे घर में एक ओर प्लास्टिक की एक टेबल और कुर्सी रखी थी।
भाई की अर्धांगिनी चाय बना लाई और साथ में एक प्लेट में पारले जी बिस्किट परोस दिए गए।
मै उसके घर को देख रही थी।
किसी गरीब आदमी के घर और घर के हालात का व्याख्यान करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।।
बस इतना कहूंगी कि साधन और संसाधन उतने ही थे जितने में गुज़र बसर हो सके।
अपनी बिटिया से मिलवाया जो उस समय सरकारी स्कूल में 8वि कक्षा में पढ़ रही थी।
चाय का स्वाद बेमिसाल था। असल में ग़रीब आदमी खान पान में जिन भावनाओं को मिश्रित कर देता है उससे स्वाद ही अनोखा हो जाता है।
परंतु एक यक्षप्रश्न था जो रह रह कर दिमाग में कौंध रहा था।
मस्तिष्क में बैठे व्यापारी की उत्सुकता काबू से बाहर हो गई तो पूछ ही लिया ……..”ठेकेदार जी। घर में कूलर लगवाओ। थोड़ा रंग रोगन करवा लो। दरवाजे के कब्जे टूटे हैं जुड़वा लो…… हाथियार खरीदने पर पैसा क्यों उजाड़ रहे हो। हथियार भी गैर लाइसेंसी है। धरे गए तो टांग दिए जाओगे।। ”
सवाल बहुत थे परंतु जब सवालों का जवाब मिला तो आभास हुआ कि सवाल बचकाना थे।
वास्तविकता यह थी कि गांव में धर्म विशेष की आबादी ठीक ठाक थी। ठेकेदार के अनुसार बीते एक साल में तीन बार धार्मिक आगजनी हो चुकी थी। बिटिया 8वि में पढ़ रही थी जिसकी अस्मिता हर समय खतरे में थी……..और भी कई ऐसी बातें पता चली कि लगा कि घर में कूलर या पंखा हो न हो……रसोई गैस हो न हो ……….कट्टा होना बहुत जरूरी हैं।
यही नहीं कट्टा होने के साथ साथ कट्टा चलाने का गुदा होना बहुत जरूरी है क्योंकि सवारी अपने सामान की स्वयं जिम्मेवार है। आप पर समुदाय विशेष हमला करता है तो आप भूल जाएं कि सरकार या प्रशासन से किसी भी प्रकार की कोई मदद मिलेगी। ना…
मदद उस समय कट्टा ही कर सकता है।
Basic necessities यानी मूलभूत सुविधाओं की फेहरिस्त में मेडिकल एजुकेशनल आदि सुविधाएं बहुत बाद में थी। सर्वप्रथम यह सवाल था कि उस माहौल में आत्मसुरक्षा का इंतजाम है या नहीं।।
जिन महानुभावों ने बंगाल को जड़ों को देखा तक नहीं देखा उन्हें लगता है कि भाजपा को बंगाल में सत्ता की आवश्यकता है…….उनकी दृष्टि से यह सत्य हो सकता है। हर सत्तादल सत्ता का प्यासा है।।
परंतु जिन्हें यथास्थिति का आभास है वह जानते हैं कि हालात इससे बिल्कुल उलट है।
बंगाल के हिन्दू को एक कट्टरवादी हिंदू सरकार की आवश्यकता है।।
💕आपकी अपनी बहन नेहा अग्रवाल की कलम से साभार
अब समय आ गया है कि सामने वाले की पूरी जानकारी लेकर कुछ ले चाहे वह समान हो या सेवा…
राजीव कुमार
1. संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, युवा स्वाभिमान ट्रस्ट अखंड भारत
2. सह-संस्थापक नन्हे नन्हे क़दम आपकी सुरक्षा औऱ सफलता फाउंडेशन (एक एनजीओ)
3. ग्लोबल रेड डायमंड डायरेक्टर, मोदीकेयर भारत
4. सह-संस्थापक भूक्खड (Bhukkhad) Junction शुद्ध शाकाहारी रेस्ट्रा चैन






