कर्नाटक कांग्रेस में बड़ा फेरबदल तय? कामराज प्लान के तहत सीनियर मंत्रियों को संगठन में भेजने की तैयारी
कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी एक बड़े राजनीतिक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी जल्द ही “कामराज प्लान” को लागू कर सकती है — जिसके तहत कई वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों को पद छोड़कर संगठन में काम करने के लिए कहा जाएगा। यह फैसला मंत्रियों के प्रदर्शन और उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को देखते हुए लिया जा सकता है। माना जा रहा है कि करीब एक दर्जन सीनियर मंत्रियों को इस फेरबदल में कैबिनेट से बाहर किया जा सकता है, ताकि नए चेहरों को सरकार में मौका दिया जा सके। यह बदलाव साल के अंत तक संभव है।
डीके शिवकुमार पर भी असर पड़ सकता है
कर्नाटक सरकार ने हाल ही में अपने कार्यकाल के 2.5 साल पूरे किए हैं। इसी बीच डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार रोटेशनल चीफ मिनिस्टरशिप की मांग उठा रहे हैं। लेकिन अगर कामराज प्लान लागू होता है, तो उन्हें अपनी कुछ जिम्मेदारियों से हाथ धोना पड़ सकता है। फिलहाल वे राज्य कांग्रेस अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री — तीनों पद संभाल रहे हैं। पार्टी हाईकमान का मानना है कि सीनियर नेताओं को संगठन पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलना चाहिए ताकि पार्टी जमीनी स्तर पर और मजबूत हो।
क्या है कामराज प्लान?
“कामराज प्लान” की शुरुआत 1963 में हुई थी, जब तत्कालीन मद्रास (अब तमिलनाडु) के मुख्यमंत्री के. कामराज ने यह प्रस्ताव रखा था। उस समय भारत-चीन युद्ध के बाद कांग्रेस कमजोर हो रही थी और सीनियर नेता सरकारी कामकाज में उलझे थे। कामराज ने सुझाव दिया कि वरिष्ठ नेता अपनी सरकारी जिम्मेदारियां छोड़कर पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर ध्यान दें।
इस प्लान के तहत लाल बहादुर शास्त्री, मोरारजी देसाई, जगजीवन राम जैसे छह केंद्रीय मंत्रियों और कामराज सहित छह मुख्यमंत्रियों ने इस्तीफा दिया। इन नेताओं ने पार्टी संगठन को मजबूत करने का बीड़ा उठाया। नतीजतन, कांग्रेस ने नई ऊर्जा पाई और आगे चलकर शास्त्री व इंदिरा गांधी जैसे नेताओं को उभारने का रास्ता तैयार हुआ।
कांग्रेस को क्या मिला था इस प्लान से?
कामराज प्लान कांग्रेस के लिए उस दौर में पुनर्जीवन साबित हुआ। अनुभवी नेताओं ने संगठन को सशक्त किया और नए चेहरों को शासन का मौका मिला। इससे जनता के बीच पार्टी की छवि सुधरी और चुनावी सफलता भी हाथ लगी। यही कारण है कि आज भी कांग्रेस इस प्लान को “संगठन पुनर्निर्माण” के सफल मॉडल के रूप में देखती है।
कर्नाटक में क्यों दोहराना चाहती है कांग्रेस?
कर्नाटक कांग्रेस का मानना है कि कामराज प्लान लागू करने से सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को कम किया जा सकेगा, संगठन को ताजगी मिलेगी और जनता के बीच बेहतर संदेश जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, यह कदम आने वाले चुनावों से पहले पार्टी की छवि सुधारने की रणनीति का हिस्सा है। हालांकि इस फैसले से डीके शिवकुमार जैसे वरिष्ठ नेताओं की स्थिति पर असर पड़ सकता है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह “कामराज प्लान 2.0” कर्नाटक कांग्रेस के लिए नई ऊर्जा लेकर आएगा या फिर अंदरूनी खींचतान को और बढ़ाएगा — इसका जवाब आने वाले महीनों में मिलेगा।






