क्या कोई नदी फिर से ज़िंदा हो सकती है?
ये मुमकिन है, अगर पूरा गाँव मिलकर जिम्मेदारी उठा ले।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में तमसा नदी इसकी जीती-जागती मिसाल बन रही है।
गंगा की यह ऐतिहासिक सहायक नदी कभी गाद, कचरे और अतिक्रमण से जूझ रही थी।
आज़मगढ़ जिले की 111 ग्राम पंचायतों ने नमामि गंगे योजना के तहत 89 किलोमीटर लंबे हिस्से को फिर से जीवन देने का बीड़ा उठाया।
श्रमदान के जरिए गाँव के लोग, मनरेगा के मजदूर, सफाईकर्मी, स्कूल के बच्चे, महिलाओं के स्वयं सहायता समूह और कई स्वयंसेवक एक साथ जुटे।
नदी से गाद निकाली गई, प्लास्टिक और कचरा हटाया गया, घाटों और किनारों को साफ किया गया।
सिर्फ सफाई ही नहीं—
नदी किनारे खाली जमीन पर फलदार पेड़ लगाए गए, ताकि पर्यावरण भी सुधरे और गांव वालों को आगे चलकर आर्थिक लाभ भी मिले।
जागरूकता अभियान चलाए गए और कचरा अलग-अलग जमा करने की व्यवस्था शुरू की गई, ताकि नदी लंबे समय तक स्वच्छ बनी रहे।
आज बदलाव साफ दिखाई दे रहा है—
पानी बेहतर हुआ है, जैव विविधता लौट रही है और खेतों की सिंचाई में सुधार आया है।
सच, जब पूरा समुदाय ठान ले, तो नदी भी फिर से सांस लेने लगती है।







