प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के बीच गुरुवार को हुई मुलाकात में खालिस्तानी उग्रवाद के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि लोकतांत्रिक समाजों में उग्रवाद और हिंसक अतिवाद के लिए कोई स्थान नहीं है।
लोकतांत्रिक समाजों में उग्रवाद का कोई स्थान नहीं
विदेश सचिव मिस्री के अनुसार, बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उग्रवाद और हिंसक गतिविधियों से जुड़े तत्वों के खिलाफ दोनों देशों को अपने-अपने कानूनी ढांचे के भीतर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
भारत को ब्रिटेन का मिला स्थायी सदस्यता समर्थन
मिस्री ने यह भी बताया कि ब्रिटेन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के बाद भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन की घोषणा की है। उन्होंने कहा, “हम इसका स्वागत और सराहना करते हैं।”
इसके साथ ही दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी चर्चा हुई, जिसे भारत के “विकसित भारत” के दृष्टिकोण को मजबूत करने और युवाओं के लिए रोजगार सृजन में सहायक बताया गया।
व्यापार, शिक्षा और नवाचार में सहयोग पर जोर
ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टारमर के साथ उनके देश के 125 शीर्ष व्यापारिक नेताओं, उद्यमियों और शिक्षाविदों का प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर बल दिया गया।
“भारत और ब्रिटेन स्वाभाविक भागीदार”
बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ब्रिटेन “स्वाभाविक भागीदार” हैं, जिनके संबंध लोकतंत्र, स्वतंत्रता और कानून के शासन जैसे साझा मूल्यों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा, “जब दुनिया अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, तब भारत- ब्रिटेन की साझेदारी वैश्विक स्थिरता और आर्थिक प्रगति का एक अहम स्तंभ है।”
वैश्विक मुद्दों पर भी हुई चर्चा
दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र, पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता, और यूक्रेन में जारी संघर्ष सहित कई वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यूक्रेन संघर्ष और गाजा संकट पर भारत संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांति बहाल करने के सभी प्रयासों का समर्थन करता है। हम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”






