भानु सप्तमी व्रत कथा महत्व पूजा विधि आओ जानें :
जिस माह के सप्तमी तिथि को रविवार पड़ता है, उस दिन भानु सप्तमी मनाई जाती है। वैशाख, मार्गशीर्ष, कार्तिक, ज्येष्ठ, फाल्गुन, और माघ के महीनों में शुक्ल पक्ष के दौरान भी भानु सप्तमी मनाई जाती है। इस वर्ष फाल्गुन मास का यह पर्व कृष्ण पक्ष मे 07 जून रविवार के दिन मनाया जायेगा।
यह पवित्र दिन सूर्य देव (भगवान सूर्य) को समर्पित है। यह प्रत्येक सप्तमी पर मनाई जाती है जो रविवार को आती है। इस दिन को व्यसवत्मा सप्तमी या सूर्य सप्तमी के रूप में भी जाना जाता है।
भानु सप्तमी का सबसे बड़ा महत्व यह है कि इस दिन जो लोग सूर्यदेव की पूजा करते हैं उन्हें धन, दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह माना जाता है कि भानु सप्तमी के दिन व्रत रखने से व्यक्ति को अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है और सभी प्रकार की बीमारियां दूर रहती हैं।
यह माना जाता है कि भानु सप्तमी की पूर्व संध्या पर, सूर्य देवता ने सात घोड़ों के रथ पर अपनी पहली उपस्थिति दर्शायी थी।
विभिन्न सप्तमी तीथों में, भानु सप्तमी बहुत शुभ मानी जाती है और पश्चिमी भारत और दक्षिणी भारत के क्षेत्रों में व्यापक रूप से मनाई जाती है।
भानु सप्तमी के शुभ दिन पर, भक्त सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए कई पवित्र सूर्य स्तोत्रों और आदित्य हृदय स्तोत्रों का जाप करने के साथ महा-अभिषेक करके भगवान सूर्य की पूजा करते हैं। भक्त गरीबों को फल, कपड़े आदि का दान भी करते हैं। इस सप्तमी को सूर्य सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है।
भानु सप्तमी उस दिन का संकेत भी देती है, जब भगवान सूर्य या सूर्य देवता अपने रथ पर पृथ्वी पर आये थे। भगवान सूर्य के आगमन ने पृथ्वी पर जीवन ला दिया।
भगवान सूर्य एक पवित्र कमल के फूल पर स्वर्ण रथ में बैठे हैं। सात घोड़े रथ खींचते हैं और ये घोड़े सूर्य की सात किरणों को दर्शाते हैं। अरुण भगवान सूर्य का सारथी है, जो सूर्य की चिलचिलाती गर्मी से पृथ्वी को बचाने और ढाल बन कर सामने खड़ा है। भगवान सूर्य सभी प्राणियों के निर्माता हैं और जीवन शक्ति और स्वास्थ्य के स्वामी भी हैं। जो व्यक्ति भगवान सूर्य की पूजा करते हैं और भानु सप्तमी का व्रत रखते हैं उन्हें अच्छे स्वास्थ्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
भानु सप्तमी का ज्योतिषीय महत्व :
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी व्यक्ति का सूर्य कमजोर है तो उसे सूर्य नारायण की पूजा करनी चाहिए। पौराणिक ग्रन्थ भविष्य पुराण में वर्णन मिलता है कि भगवान् श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र को सूर्य पूजा का महत्व बताया है। भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा है कि सूर्यदेव एक प्रत्यक्ष देवता हैं। अर्थात ऐसे भगवान हैं जिन्हें रोज देखा जा सकता है। पुराणों के अनुसार भानु सप्तमी की तिथि को जो भी सूर्य देव की उपासना तथा व्रत करते हैं, वो सभी शारीरिक कष्टों से मुक्ति पाते हैं।
भानु सप्तमी के व्रत-पूजन से होने वाले लाभों से इस तिथि का महत्व ओर भी बढ़ जाता है।
भानु सप्तमी पर सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति को धन- धान्य और समृद्धि की प्राप्ती होती है।
सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के दुखों और शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। सूर्य देव को जीवन का आधार माना जाता है। सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है।
इस तिथि पर सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है। सूर्य देव को ऊर्जा का भी कारक माना जाता है। सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति में ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है।
ज्योतिष शास्त्र कहता है कि भानु सप्तमी पर सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति की कुंडली में सूर्य ग्रह की अशुभता दूर होती है। शास्त्रों में सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है। सूर्य की अशुभता से व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। भानु सप्तमी पर सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति की कुंडली में सूर्य ग्रह की अशुभता दूर होती है और व्यक्ति को मानसिक शान्ति और शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।
भानु सप्तमी पूजा विधि :
पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ भानु सप्तमी की पूजा करने से सभी तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से मुक्ति मिलती है और सूर्यदेव जीवन में खुशियों का आशीर्वाद देते हैं।
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शौचादि से निवृत होने के बाद स्नान करें स्नान के दौरान, इक्सोरा कैलोट्रोपिस (अक्का) और हल्दी के कुछ पत्तों को सिर पर रखा जाता है, जिस पर पानी डाला जाता है और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
सूर्य उदय के पश्चात पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान सूर्य का ध्यान करें।
ताम्बे के लोटे में जल, थोड़ा सा गंगाजल, लाल फूल, अक्षत (चावल) डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। सूर्य देव को जल चढ़ाते समय भानु सप्तमी मंत्र ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें।
सूर्य भगवान् को झुककर प्रणाम करें और सूर्य देव को दिए गए अर्घ्य से अपने मस्तक पर तिलक लगाएं।
इसके बाद धूप दीप से सूर्य देव का पूजन करें।
भानु सप्तमी के व्रत का संकल्प लें।
पूरे दिन निराहार रहें।
फलों का सेवन कर सकते हैं।
शाम को सूर्यास्त के समय फिर से भगवान सूर्य की पूजा करें और व्रत का समापन करें।
भानु सप्तमी पर दान :
भानु सप्तमी पर दान करने से भी विशेष लाभ प्राप्त होते हैं। इस दिन निम्नलिखित चीजों का दान करना शुभ माना जाता है:
* पीले या लाल वस्त्र
* ताम्बे के बर्तन
* पीले फल
* गुड़
* गेंहु
अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार इनमे से किसी भी वस्तु का दान किया जा सकता है।
भानु सप्तमी व्रत कथा :
भानु सप्तमी की व्रत कथा के अनुसार प्राचीनकाल में इंदुमती नाम की एक वेश्या हुआ करती थी। उसने अपना पूरा जीवन इसी वेश्यावृत्ति में गुजारा था। इंदुमती ने कभी भी कोई धार्मिक कर्मकांड या फिर कोई पुण्य कर्म नहीं किया था। एक दिन उसके मन में मरणोपरांत मोक्ष प्राप्ति का विचार आया, फिर उसने सोचा कि उसने जीवन में कभी कोई पूजा-पाठ या धार्मिक कार्य नहीं किया। फिर भला उसे मोक्ष कैसे मिल सकता है।
मोक्ष प्राप्ति की इसी महत्वकाँक्षा के साथ वह ऋषि वशिष्ठ के पास गयी। उसने उनसे पूछा कि हे ऋषिदेव! मैंने अपने जीवन में कभी भी कोई धार्मिक कार्य और पुण्य कर्म नहीं किया किन्तु इस समय मेरे मन में मोक्ष प्राप्ति की अभिलाषा है।
हे ऋषिवर! कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे मेरे जैसी महिला जिसने पूरा जीवन वैश्यावृत्ति में गुजारा हो, उसे मरणोपरांत मोक्ष की प्राप्ति हो।
इंदुमती के ये वचन सुनकर ऋषि वशिष्ठ को उस पर दया आ गयी। उनहोंने कहा हे इंदुमती! स्त्रियों को सौभाग्य, सुख और मोक्ष प्रदान करने वाला एक ही व्रत है। वह व्रत है “भानु सप्तमी व्रत”। इस दिन जो भी महिला व्रत रखती है, पुरे विधि विधान से सूर्य देव की पूजा-अर्चना करती है। उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। तुम भी व्रत रखकर पूरे विधि-विधान से सूर्य देव की पूजा करना। तुम्हारी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।
इंदुमती ने ऋषि वशिष्ठ के कहे अनुसार पुरे विधि – विधान और और निष्ठा के साथ भानु सप्तमी का व्रत रखा और सूर्य देव की पूजा किया। इसके फलस्वरूप मरने के बाद इंदुमती को मोक्ष की प्राप्ति हुई, वह जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो गयी। यह व्रत का ही फल था कि उसे स्वर्ग की प्राप्ति हुई और उसे स्वर्ग में अप्सराओं की नायिका के रूप में स्थान मिला। तभी से भानु सप्तमी का व्रत रखने की परंपरा की शुरुआत हो गयी और लोग हर भानु सप्तमी पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखकर सूर्य देव की पूजा अर्चना करते हैं।
भानु सप्तमी व्रत के लाभ :
भगवान सूर्य की उपासना करने वाले और भानु सप्तमी के दिन व्रत रखने वाले भक्तो को कई लाभ मिलते है, जैसे :
भानु सप्तमी की पूर्व संध्या पर पवित्र गंगा में स्नान करने वाले भक्तों को अपने जीवन में कभी भी गरीबी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
भानु सप्तमी पूजा करने वाली महिलाएं अपने अगले जन्म में कभी विधवा नहीं बनती हैं।
भानु सप्तमी व्रत स्वस्थ और सुखी जीवन और अच्छे धन का पर्यवेक्षक को आशीर्वाद देता है।
सूर्य देव के आशीर्वाद से, भक्त घातक रोगों से मुक्त हो जाते हैं और महान भाग्य और अच्छा ज्ञान प्राप्त करते हैं।
भानु सप्तमी हिंदू धर्म में सूर्य देव की उपासना का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह में दो सप्तमी तिथि आती हैं, जब रविवार के दिन सप्तमी तिथि का संयोग बनता है, तो उसे ‘भानु सप्तमी’ कहा जाता है। चूंकि रविवार सूर्य देव का दिन है और सप्तमी उनकी प्रिय तिथि, इसलिए यह दिन ‘सूर्य ग्रहण’ के समान ही प्रभावशाली और पुण्यदायी माना जाता है।
आरोग्य की प्राप्ति : शास्त्रों में कहा गया है— ‘आरोग्यं भास्करादिच्छेत्’ अर्थात् अच्छे स्वास्थ्य की कामना सूर्य देव से करनी चाहिए। भानु सप्तमी का व्रत करने से गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है।
पितृ दोष से मुक्ति : इस दिन तर्पण और दान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
मान-सम्मान : सूर्य सफलता और तेज का कारक है। इस दिन पूजा करने से समाज में यश और पद-प्रतिष्ठा बढ़ती है।
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान : इस दिन सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए।
सूर्य अर्घ्य : तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डालकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ‘ॐ सूर्याय नमः’ का जाप करें।
आदित्य हृदय स्तोत्र : अर्घ्य के बाद वहीं खड़े होकर ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ करें। यह शत्रुओं पर विजय और आत्मविश्वास के लिए अचूक है।
दीपदान और भोग : सूर्य देव के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक जलाएं और उन्हें गुड़ या लाल फल अर्पित करें।
उपवास : इस दिन बिना नमक का भोजन करने या केवल फलाहार करने का विशेष महत्व है।
व्रत के लाभ :
1. मानसिक शांति : यह व्रत मन की चंचलता को दूर कर एकाग्रता बढ़ाता है।
2. त्वचा रोगों से मुक्ति : धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से सूर्य पूजा करने पर चर्म रोगों में लाभ होता है।
3. सौभाग्य में वृद्धि : महिलाओं के लिए यह व्रत अखंड सौभाग्य और संतान सुख देने वाला माना गया है।
4. स्मरण शक्ति: विद्यार्थियों के लिए भानु सप्तमी का व्रत और सूर्य ध्यान बुद्धि को प्रखर बनाता है।
क्यों मनाई जाती है भानु सप्तमी…??? (पौराणिक कथा) पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भानु सप्तमी के दिन ही सूर्य देव पहली बार अपने रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड में प्रकट हुए थे। उन्होंने इसी दिन अपने सात घोड़ों के रथ से संसार को आलोकित (प्रकाशित) किया था। इसीलिए इसे सूर्य देव के जन्म उत्सव के रूप में भी देखा जाता है।
जन्मकुंडली में पंचम स्थान में राहु बेठे हो तो संतान को संघर्ष करना पड़ता है, सन्तान के विवाह में देरी भी होती है।
जन्मकुंडली के पांचवे स्थान में राहु हो तो आय में उतार – चढ़ाव ज्यादा रहते है व खर्च ज्यादा होता है। कुटुम्ब में मनमुटाव ज्यादा रहते है।
उपाय : तर्जनी अंगुली में सोने का छल्ला धारण करे।



