नई दिल्ली: दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में मंगलवार को दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री आशीष सूद और प्रवेश वर्मा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान राजधानी की आपदा प्रबंधन व्यवस्था, फायर सेफ्टी और आपातकालीन सेवाओं को लेकर व्यापक समीक्षा की गई।
फायर सर्विस में रिटायर्ड अग्निवीरों की नियुक्ति का सुझाव
बैठक में दिल्ली फायर सर्विस को और अधिक सक्षम बनाने के लिए उपराज्यपाल ने एक अहम सुझाव दिया। उन्होंने विभाग में मौजूद रिक्त पदों को भरने के लिए सेवानिवृत्त अग्निवीरों की नियुक्ति पर विचार करने की बात कही। उनका मानना है कि सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त अग्निवीर आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इसके अलावा, पिछले सप्ताह गठित विभिन्न अधिकारियों की टीमों को समयबद्ध तरीके से अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए।
अवैध निर्माण और फायर सेफ्टी पर हुई समीक्षा
बैठक के दौरान राजधानी में अवैध इमारतों के खिलाफ चल रहे अभियान, फायर सेफ्टी लाइसेंस के दुरुपयोग और भविष्य की आपदा तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली की भौगोलिक और संरचनात्मक चुनौतियां आपदा प्रबंधन के लिए गंभीर जोखिम पैदा करती हैं, लेकिन इन्हें बेहतर तैयारी और मजबूत प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करने के अवसर के रूप में भी देखा जाना चाहिए।
बैठक में यह भी सुनिश्चित करने पर बल दिया गया कि प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
कौन होते हैं अग्निवीर?
अग्निवीर भारत सरकार की ‘अग्निपथ योजना’ के तहत भारतीय सशस्त्र बलों—थल सेना, नौसेना और वायुसेना—में भर्ती किए जाने वाले जवान होते हैं। केंद्र सरकार ने जून 2022 में इस योजना की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य युवाओं को अल्पकालिक सैन्य सेवा का अवसर प्रदान करना है।
अग्निवीर भर्ती के लिए उम्मीदवारों को सेना की आधिकारिक वेबसाइटों के माध्यम से आवेदन करना होता है। चयन प्रक्रिया में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT), शारीरिक दक्षता परीक्षण और मेडिकल जांच शामिल होती है। आमतौर पर उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता 10वीं या 12वीं पास तथा आयु सीमा 17.5 से 22 वर्ष के बीच निर्धारित होती है।
4 साल की सेवा, 25 फीसदी को मिलती है स्थायी नियुक्ति
अग्निवीरों की कुल सेवा अवधि चार वर्ष की होती है, जिसमें शुरुआती प्रशिक्षण अवधि भी शामिल रहती है। सेवा पूरी होने के बाद उनके प्रदर्शन, अनुशासन और सेना की आवश्यकताओं के आधार पर लगभग 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सैन्य सेवा में शामिल कर लिया जाता है, जहां वे आगे लंबी अवधि तक देश की सेवा करते हैं।
वहीं शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को सम्मानपूर्वक सेवामुक्त किया जाता है। इन्हें विभिन्न केंद्रीय सुरक्षा बलों, पुलिस विभागों और कई राज्य सरकारों की भर्तियों में प्राथमिकता प्रदान की जाती है। इसी क्रम में अब दिल्ली फायर सर्विस में भी रिटायर्ड अग्निवीरों को अवसर देने का प्रस्ताव सामने आया है।



