Home » ताजा खबर » क्या पर्दे के पीछे बदल रही है दक्षिण एशिया की रणनीतिक तस्वीर? जानिए किन घटनाओं से जुड़ रहे हैं संकेत

क्या पर्दे के पीछे बदल रही है दक्षिण एशिया की रणनीतिक तस्वीर? जानिए किन घटनाओं से जुड़ रहे हैं संकेत

पर्दे के पीछे कुछ चल रहा है….और जो चल रहा है…उसे समझने के लिए कुछ points….जो अलग अलग बिखरे पड़े हैं…लेकिन जब इन्हें जोडा जाए तो एक साफ़ तस्वीर सामने नजर आती है….

* म्यांमार मे लगभग 8 साल बाद 10 अप्रैल को नए राष्ट्रपति का चुनाव हुआ…नए राष्ट्रपति इससे पहले म्यांमार के सेना प्रमुख थे…और राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने सबसे पहला दौरा भारत का किया…जहां उन्होंने भारत को ये गारंटी दी…कि म्यांमार की भूमि पर भारत विरोधी किसी भी गतिविधि या आतंकी संगठन को पनपने नहीं दिया जाएगा….साथ ही फ्री मूवमेंट रेजिम (FMR) को बंद कर दिया गया और सीमा पर बाड़ लगाने का काम शुरू हो गया.

* पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद सिलीगुड़ी Corridor अब भारत सरकार के नियन्त्रण मे आ चुका है…और साथ ही बांग्लादेश के साथ लगने वाली सीमा पर smart fencing का काम पूरे जोर शोर से शुरू हो चुका है…और भारत में बसे अवैध बांग्लादेशीयों को भी भारत से बाहर करने का काम शुरू है.

* अफगानिस्तान को इजराइल से मदद के बहाने जहाज भर भर के ड्रोन की supply हुई है जिसका इस्तेमाल वो पाकिस्तान पर कर रहा है….और अब रूस के जरिए Air Defence System भी अफगानिस्तान को दिया जा रहा है.

* निकोबार प्रोजेक्ट के जरिए भारत हिंद महासागर में खुद को रणनीतिक तौर पर बेहद ताकतवर बनाने के मिशन पर काम शुरू कर चुका है.

* तुर्की के पड़ोसी देश साइप्रस और आर्मेनिया को भारत बड़े पैमाने पर हथियार supply कर रहा है…जिसमें ब्रह्मोस जैसी घातक मिसाइल भी शामिल है ….तुर्की ने Operation Sindoor के दौरान पाकिस्तान को ड्रोन supply किए थे.

* पाकिस्तान की पूर्वी और पश्चिमी दोनों सीमा पर रणनीतिक पकड़ ढीली हो चुकी है….बांग्लादेश मे मोहम्मद यूनुस की सरकार के साथ मिलकर बंगाल और North East मे अराजकता फैलाने की साजिश अब नाकामयाब हो चुकी है.

पिछले दिनों अमेरिका के विदेश मंत्री का भारत आना…यूरोप के कुछ मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाना…और उसके बाद अमेरिका से “तिलचट्टा पार्टी” का बनना…कॉंग्रेस के युवराज द्वारा निकोबार प्रोजेक्ट का विरोध…..

ये सब तिलमिलाहट है…..भारत को घेरने की वर्षों की मेहनत के मिट्टी मे मिल जाने की तिलमिलाहट…..

……मोदी और डोभाल की नीति ने भारत विरोधी रणनीति की हवा निकाल दी है….

पर्दे के पीछे कुछ चल रहा है….और जो चल रहा है…उसे समझने के लिए कुछ points….जो अलग अलग बिखरे पड़े हैं…लेकिन जब इन्हें जोडा जाए तो एक साफ़ तस्वीर सामने नजर आती है….

साथियों जिओ पॉलिटिक्स में ऐसा बहुत कुछ होता है जहां दुश्मन की चाल को भांप कर अपनी चाल चलनी पड़ती है लेकिन वह जनता की समझ से परे होती है इसलिए आप धैर्य रखें विश्वास बनाए रखें क्योंकि 2014 से भारत की जो स्थिति दुनिया में बनी है उसकी आप सिर्फ कल्पना कर सकते थे परंतु आज वह हकीकत है.

पूरी दुनिया में घूम कर पुराने साथियों के साथ संबंध मजबूत करना,
नए मित्र देशों के साथ मुलाकात करना,
किसी भी आपदा में सबसे पहले मदद भेजना,
दुनिया के किसी भी कोने में चल रहे युद्ध में फंसे भारतीयों और भारतीय विद्यार्थियों को निकाल कर घर सकुशल वापसी करवाना, और दुनिया को इस्लामीक आतंकवाद से मुक्त करने के लिए एक जुट होने की पॉलिसी बनाना,
कर मुक्त व्यापार की नीव रखना और डॉलर रूपी शैतान की बादशाहत को खत्म करने की पहल को करना तो कुछ चंद बातें हैं जो अपने स्वयं अपनी आंखों से अच्छी है पिछले 12 सालों की अगर लिस्ट बनाएं तो आप पढ़ते-पढ़ते थक जाएंगे इसलिए कृपया अपना यह विश्वास अगले 10 साल के लिए और बनाए रखें…

😀😀😀😀😀😀😀

साभार: सोशल मीडिया

” जय सियाराम”
💐🙏💐

sssrknews
Author: sssrknews

इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया जारी करें

Leave a Comment

Share This