एकता कपूर—बॉलीवुड अभिनेता जितेंद्र की बेटी—आज भारतीय टेलीविजन की सबसे चर्चित और विवादित नामों में से एक हैं। 50 वर्ष की उम्र में, अविवाहित एकता अपने धारावाहिकों के ज़रिए देश के लाखों घरों में न केवल पहचान बना चुकी हैं, बल्कि अपने कंटेंट को लेकर कटघरे में भी खड़ी हैं।
उनके बनाए धारावाहिकों की पहचान बन चुके हैं:
???? सास-बहू के अंतहीन झगड़े
???? ननद-भावज की साज़िशें
???? मां-बेटी और बहनों के बीच विवाद
???? नागिन जैसी अवास्तविक और अति-नाटकीय कहानियां
इन धारावाहिकों ने भारतीय समाज, खासकर मध्यमवर्गीय और कम पढ़े-लिखे दर्शकों की मानसिकता पर गहरा प्रभाव डाला है। कहा जा रहा है कि इन्होंने पारिवारिक रिश्तों में अविश्वास, ईर्ष्या और नफरत का ज़हर घोला है।
टीवी चैनलों पर इनकी डिमांड इतनी है कि सोनी, स्टार प्लस, जी टीवी, कलर्स, सब टीवी जैसे बड़े चैनल्स करोड़ों में इनके शो खरीदते हैं। घरों की बर्बादी के इस कथित कारोबार को ‘मनोरंजन’ की आड़ में परोसा जा रहा है।
एकता कपूर फिल्मों और वेब सीरीज़ की दुनिया में भी सक्रिय हैं। OTT प्लेटफॉर्म पर उनकी पकड़ मजबूत होती जा रही थी, जब हाल ही में सरकार ने उनकी ऐप ALTT को ब्लॉक कर दिया, जिस पर अश्लील कंटेंट का आरोप लगा था। बताया जा रहा है कि इस कदम से उनका हज़ार करोड़ का नुकसान हुआ।
लेकिन सवाल उठता है—क्या सिर्फ ऐप ब्लॉक करना काफी है?
टीवी पर चल रहे तथाकथित ‘घर तोड़ू’ धारावाहिक क्या समाज के लिए उतने ही खतरनाक नहीं हैं?
क्या सेंसर बोर्ड और ब्रॉडकास्टिंग एजेंसियों को अब कड़ी निगरानी और नियम नहीं बनाने चाहिए?
क्या भारत को पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों से सीख लेकर अपने टीवी कंटेंट में गुणवत्ता और सामाजिक जिम्मेदारी नहीं लानी चाहिए?
आज ज़रूरत है एक ठोस और सख्त कदम की—
✅ अश्लीलता फैलाने वाले ऐप्स और साइट्स को हमेशा के लिए बंद किया जाए।
✅ टेलीविजन धारावाहिकों की निगरानी बढ़ाई जाए।
✅ फूहड़ता और पारिवारिक अविश्वास फैलाने वाले कंटेंट को तत्काल रोका जाए।
याद रखिए:
इंटरनेट और टेलीविजन की ताकत दोधारी तलवार है। जहां यह ज्ञान और मनोरंजन का माध्यम हो सकता है, वहीं समाज को खोखला करने का जरिया भी बन सकता है।
अब समय आ गया है—मनोरंजन के नाम पर परोसी जा रही बर्बादी को पहचानकर, उसके खिलाफ आवाज़ उठाने का।
#Repost
#बेटे_हैं_कोई_खिलौना_नहीं
#ContentCleansingNow



